29 अगस्त 2026
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मुंद्रा पोर्ट को 21वें एक्ससीड पुरस्कार में 'लीजेंड (इमर्जिंग)' सम्मान, पर्यावरणीय स्थिरता में अग्रणी भूमिका

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मुंद्रा पोर्ट को 21वें एक्ससीड पुरस्कार में 'लीजेंड (इमर्जिंग)' सम्मान, पर्यावरणीय स्थिरता में अग्रणी भूमिका

सारांश

मुंद्रा पोर्ट को 21वें एक्ससीड पर्यावरण पुरस्कार 2026 में 'लीजेंड (इमर्जिंग)' सम्मान मिला है — यह केवल एक ट्रॉफी नहीं, बल्कि भारत के बंदरगाह क्षेत्र में हरित संचालन की बदलती प्राथमिकताओं का प्रमाण है। एपीएसईजेड के 12 बंदरगाहों का 'जीरो वेस्ट टू लैंडफिल' दर्जा और TNFD ढाँचा अपनाना इसे उद्योग में अलग पहचान देता है।

मुख्य बातें

मुंद्रा पोर्ट (एपीएसईजेड) को 21वें एक्ससीड पर्यावरण पुरस्कार 2026 में 'लीजेंड (इमर्जिंग)' अवार्ड मिला।
यह सम्मान सतत विकास मिशन द्वारा आयोजित समारोह में दिया गया, जो केंद्र सरकार की LiFE पहल से जुड़ा है।
एपीएसईजेड के 12 बंदरगाहों को 'जीरो वेस्ट टू लैंडफिल' प्रमाणन प्राप्त है।
कंपनी एकीकृत परिवहन उपयोगिता क्षेत्र में TNFD ढाँचा अपनाने वाली पहली भारतीय कंपनी बनी।
मुंद्रा पोर्ट गुजरात में स्थित एपीएसईजेड का प्रमुख परिचालन केंद्र है।

अदाणी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक जोन लिमिटेड (एपीएसईजेड) के मुंद्रा पोर्ट को पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास में उल्लेखनीय योगदान के लिए 'लीजेंड (इमर्जिंग)' अवार्ड से नवाज़ा गया है। यह प्रतिष्ठित सम्मान 21वें एक्ससीड पर्यावरण पुरस्कार 2026 के अंतर्गत पर्यावरणीय स्थिरता श्रेणी में प्रदान किया गया। 29 अगस्त 2026 को घोषित यह उपलब्धि भारत के बंदरगाह क्षेत्र में हरित संचालन की बढ़ती प्रासंगिकता को रेखांकित करती है।

पुरस्कार का संदर्भ और महत्व

यह पुरस्कार सतत विकास मिशन द्वारा आयोजित एक्ससीड पर्यावरण पुरस्कार समारोह में दिया गया, जो केंद्र सरकार की 'लाइफस्टाइल फॉर एनवायरनमेंट (LiFE)' पहल से संबद्ध है। इस पहल का उद्देश्य उन संस्थानों और उद्यमों को पहचान देना है जो पर्यावरण संरक्षण, संसाधनों के जिम्मेदार उपयोग और टिकाऊ व्यावसायिक प्रथाओं के प्रति ठोस प्रतिबद्धता प्रदर्शित करते हैं। गौरतलब है कि यह पुरस्कार श्रृंखला दो दशकों से अधिक समय से पर्यावरणीय उत्कृष्टता को प्रोत्साहित करती आ रही है।

एपीएसईजेड की पर्यावरणीय उपलब्धियाँ

एपीएसईजेड के अनुसार, कंपनी के 12 बंदरगाहों को 'जीरो वेस्ट टू लैंडफिल' प्रमाणन प्राप्त हो चुका है, जो कचरा प्रबंधन और पुनर्चक्रण के क्षेत्र में उसकी उल्लेखनीय प्रगति को दर्शाता है। इसके अतिरिक्त, कंपनी ने प्रकृति-संबंधी वित्तीय प्रकटीकरण कार्यबल (TNFD) ढाँचे को भी अपनाया है। कंपनी का दावा है कि एकीकृत परिवहन उपयोगिता क्षेत्र में यह ढाँचा अपनाने वाली वह पहली भारतीय कंपनी बनी है।

कंपनी ने अपने आधिकारिक बयान में कहा, 'यह सम्मान हमारे संचालन में पर्यावरणीय दृष्टिकोण को शामिल करने और हितधारकों के लिए दीर्घकालिक मूल्य निर्माण के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।'

मुंद्रा पोर्ट की रणनीतिक भूमिका

मुंद्रा पोर्ट, जो गुजरात में स्थित है, एपीएसईजेड का प्रमुख और सबसे महत्वपूर्ण परिचालन केंद्र है। हाल के वर्षों में कंपनी ने यहाँ इंफ्रास्ट्रक्चर विस्तार, परिचालन दक्षता और पर्यावरण-अनुकूल उपायों पर बड़े पैमाने पर निवेश किया है। यह ऐसे समय में आया है जब भारत सरकार बंदरगाह क्षेत्र में हरित प्रौद्योगिकियों और कार्बन-तटस्थ संचालन को बढ़ावा देने पर ज़ोर दे रही है।

भारत के बंदरगाह क्षेत्र पर व्यापक असर

एक्ससीड पुरस्कार में मिली यह मान्यता यह संकेत देती है कि भारत का बंदरगाह क्षेत्र अब केवल व्यापार और लॉजिस्टिक्स तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पर्यावरणीय जिम्मेदारी और सतत विकास को भी अपनी मूल रणनीति का हिस्सा बना रहा है। अधिकारियों के अनुसार, यह सम्मान जिम्मेदार संसाधन उपयोग, प्राकृतिक संरक्षण और टिकाऊ विकास की दिशा में एपीएसईजेड के प्रयासों को और गति प्रदान करेगा। आने वाले वर्षों में कंपनी के भारत के व्यापक जलवायु और पर्यावरणीय लक्ष्यों में योगदान को लेकर उद्योग जगत की नज़रें बनी रहेंगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

उस पृष्ठभूमि में इस पुरस्कार की विश्वसनीयता स्वतंत्र सत्यापन पर निर्भर करती है। फिर भी, TNFD ढाँचे को अपनाना एक ठोस संरचनात्मक कदम है जिसे उद्योग में गंभीरता से लिया जाना चाहिए।
RashtraPress
29 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एक्ससीड पर्यावरण पुरस्कार क्या है?
एक्ससीड पर्यावरण पुरस्कार सतत विकास मिशन द्वारा आयोजित एक वार्षिक सम्मान है, जो पर्यावरण संरक्षण, संसाधन प्रबंधन और टिकाऊ व्यावसायिक प्रथाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले संस्थानों को दिया जाता है। यह केंद्र सरकार की LiFE (लाइफस्टाइल फॉर एनवायरनमेंट) पहल से जुड़ा हुआ है।
मुंद्रा पोर्ट को 'लीजेंड (इमर्जिंग)' अवार्ड क्यों मिला?
मुंद्रा पोर्ट को यह सम्मान बंदरगाह संचालन में पर्यावरणीय पहलुओं को शामिल करने, संसाधनों के प्रभावी प्रबंधन और प्राकृतिक संरक्षण के प्रयासों के लिए दिया गया। एपीएसईजेड के 12 बंदरगाहों को 'जीरो वेस्ट टू लैंडफिल' प्रमाणन और TNFD ढाँचे को अपनाना इसकी प्रमुख वजहें रहीं।
'जीरो वेस्ट टू लैंडफिल' प्रमाणन का क्या अर्थ है?
'जीरो वेस्ट टू लैंडफिल' प्रमाणन यह दर्शाता है कि संबंधित सुविधा अपना कोई भी कचरा सीधे लैंडफिल में नहीं भेजती — बल्कि उसे पुनर्चक्रण, पुनः उपयोग या ऊर्जा रूपांतरण के माध्यम से निपटाती है। एपीएसईजेड के अनुसार, उसके 12 बंदरगाहों ने यह मानक हासिल किया है।
TNFD ढाँचा क्या है और एपीएसईजेड ने इसे क्यों अपनाया?
TNFD (Taskforce on Nature-related Financial Disclosures) एक अंतरराष्ट्रीय ढाँचा है जो कंपनियों को प्रकृति और जैव विविधता पर उनके व्यावसायिक जोखिमों का वित्तीय प्रकटीकरण करने में मदद करता है। एपीएसईजेड का दावा है कि वह एकीकृत परिवहन उपयोगिता क्षेत्र में इसे अपनाने वाली पहली भारतीय कंपनी है।
एपीएसईजेड के मुंद्रा पोर्ट का भारत के पर्यावरण लक्ष्यों में क्या योगदान है?
एपीएसईजेड के अनुसार, मुंद्रा पोर्ट पर्यावरण-अनुकूल बंदरगाह संचालन, कचरा प्रबंधन और प्रकृति-संबंधी जोखिम प्रकटीकरण के माध्यम से भारत के व्यापक जलवायु और पर्यावरणीय लक्ष्यों में योगदान दे रहा है। यह उपलब्धि भारत के बंदरगाह क्षेत्र में सतत विकास की बढ़ती भूमिका को दर्शाती है।
राष्ट्र प्रेस
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