दुर्गा पूजा में मांस बिक्री पर वीएचपी की गाइडलाइंस: जदयू नेता ने पशु बलि पर भी रोक की मांग उठाई
सारांश
मुख्य बातें
विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) द्वारा पश्चिम बंगाल में दुर्गा पूजा के दौरान पंडालों के निकट मांस और मछली की बिक्री पर रोक लगाने संबंधी नई गाइडलाइंस जारी करने के बाद राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। जहाँ कुछ नेताओं ने इस कदम का स्वागत किया, वहीं विपक्षी दलों ने इसे संवैधानिक अधिकारों पर अतिक्रमण करार दिया है।
जदयू नेता का सवाल: पशु बलि पर भी हो विचार
पटना में जनता दल (यूनाइटेड) — जदयू — के नेता श्याम रजक ने गाइडलाइंस का समर्थन करते हुए एक अहम प्रश्न उठाया। उन्होंने कहा, 'यह अच्छी बात है कि दुर्गा पूजा के दौरान मांस और मछली की बिक्री बंद कर दी जाए। हालांकि, एक चिंता यह है कि दुर्गा पूजा के दौरान लोग पशु बलि देते हैं। पशु बलि कुछ परंपराओं और धार्मिक रीति-रिवाजों का हिस्सा भी है। जब ऐसी बलि दी जाती है, तो उस मांस का क्या होगा? क्या लोगों को इसका उपयोग करने की अनुमति होगी या नहीं? विश्व हिंदू परिषद को इस मुद्दे पर भी विचार करना चाहिए। अगर वे मांस और मछली की बिक्री को नियंत्रित करना चाहते हैं, तो उन्हें पहले धार्मिक समुदायों से पशु बलि की प्रथा को खत्म करने की अपील करनी चाहिए।' रजक का यह बयान गाइडलाइंस के भीतर ही एक अंतर्विरोध की ओर इशारा करता है जिस पर अब तक वीएचपी ने कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया है।
कांग्रेस और सपा का कड़ा विरोध
नई दिल्ली में कांग्रेस नेता उदित राज ने वीएचपी की गाइडलाइंस को सीधे चुनौती दी। उन्होंने कहा, 'वे कौन होते हैं यह बताने वाले कि लोगों को क्या करना चाहिए? क्या वे चुने हुए प्रतिनिधि हैं? वे गुंडे और उपद्रवी हैं, और वे गलत नैरेटिव बनाते हैं। कोई क्या खाता है और किसे क्या खाने को मिलता है, यह एक संवैधानिक अधिकार है। उन्हें इस पर कोई सर्कुलर जारी करने का कोई अधिकार नहीं है।'
लखनऊ में समाजवादी पार्टी (सपा) के प्रवक्ता फखरुल हसन चांद ने कहा कि पश्चिम बंगाल में नियम बनाने की जिम्मेदारी वीएचपी की नहीं, बल्कि निर्वाचित सरकार की है। उनके अनुसार, संविधान के तहत नागरिकों की व्यक्तिगत स्वतंत्रता और धार्मिक भावना का सम्मान करना सरकार का दायित्व है, न कि किसी गैर-सरकारी संगठन का।
वीएचपी की ओर से समर्थन में आवाज़
विश्व हिंदू परिषद, इंद्रप्रस्थ प्रांत की अध्यक्ष उपासना अरोड़ा ने नई दिल्ली में इस कदम का पुरजोर स्वागत किया। उन्होंने कहा, 'मैं इसे बहुत सकारात्मक रूप से देखती हूं क्योंकि बचपन से ही मैंने देखा है कि दुर्गा पूजा के दौरान लोग आमतौर पर अपने घरों में मांस और शराब का सेवन बंद कर देते हैं। मैं तो इन दिनों अपने घर में प्याज भी नहीं आने देती। इसलिए, मुझे लगता है कि यह हमारी संस्कृति का हिस्सा है और विश्व हिंदू परिषद की जिम्मेदारी है कि वह हमारे मूल्यों को आगे बढ़ाए और लोगों तक पहुंचाए।'
व्यापक संदर्भ: धर्म, राजनीति और अधिकार
गौरतलब है कि यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब पश्चिम बंगाल में दुर्गा पूजा को लेकर धार्मिक और सांस्कृतिक संवेदनशीलता का माहौल पहले से ही बना रहता है। वीएचपी की गाइडलाइंस किसी कानूनी बाध्यता के तहत नहीं, बल्कि एक सांगठनिक अपील के रूप में जारी की गई हैं — यह भेद विपक्षी नेताओं की आलोचना के केंद्र में है। आलोचकों का कहना है कि ऐसे दिशानिर्देश सामाजिक दबाव का रूप ले सकते हैं, भले ही वे औपचारिक रूप से बाध्यकारी न हों।
आगे क्या
अब सभी की निगाहें इस बात पर हैं कि पश्चिम बंगाल सरकार इस मुद्दे पर क्या रुख अपनाती है। वीएचपी ने अभी तक पशु बलि संबंधी जदयू नेता के सवाल का कोई सार्वजनिक जवाब नहीं दिया है। दुर्गा पूजा के नज़दीक आते ही यह बहस और तीखी होने की संभावना है।