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दुर्गा पूजा में मांस बिक्री पर वीएचपी की गाइडलाइंस: जदयू नेता ने पशु बलि पर भी रोक की मांग उठाई

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दुर्गा पूजा में मांस बिक्री पर वीएचपी की गाइडलाइंस: जदयू नेता ने पशु बलि पर भी रोक की मांग उठाई

सारांश

दुर्गा पूजा में मांस बिक्री पर वीएचपी की गाइडलाइंस ने सियासी बहस छेड़ दी है। जदयू नेता ने समर्थन देते हुए पशु बलि पर भी रोक माँगी, जबकि कांग्रेस और सपा ने इसे संवैधानिक अधिकारों पर हमला बताया। असली सवाल यह है कि धार्मिक दिशानिर्देश तय करने का अधिकार किसे है।

मुख्य बातें

विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) ने पश्चिम बंगाल में दुर्गा पूजा पंडालों के निकट मांस और मछली की बिक्री पर रोक की गाइडलाइंस जारी की हैं।
जदयू नेता श्याम रजक ने गाइडलाइंस का समर्थन करते हुए वीएचपी से पशु बलि की प्रथा पर भी विचार करने की अपील की।
कांग्रेस नेता उदित राज ने वीएचपी को 'चुने हुए प्रतिनिधि नहीं' बताते हुए गाइडलाइंस को संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन करार दिया।
सपा प्रवक्ता फखरुल हसन चांद ने कहा कि नियम बनाने का अधिकार निर्वाचित सरकार का है, किसी संगठन का नहीं।
वीएचपी इंद्रप्रस्थ प्रांत की अध्यक्ष उपासना अरोड़ा ने गाइडलाइंस को सांस्कृतिक मूल्यों की रक्षा का हिस्सा बताया।

विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) द्वारा पश्चिम बंगाल में दुर्गा पूजा के दौरान पंडालों के निकट मांस और मछली की बिक्री पर रोक लगाने संबंधी नई गाइडलाइंस जारी करने के बाद राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। जहाँ कुछ नेताओं ने इस कदम का स्वागत किया, वहीं विपक्षी दलों ने इसे संवैधानिक अधिकारों पर अतिक्रमण करार दिया है।

जदयू नेता का सवाल: पशु बलि पर भी हो विचार

पटना में जनता दल (यूनाइटेड) — जदयू — के नेता श्याम रजक ने गाइडलाइंस का समर्थन करते हुए एक अहम प्रश्न उठाया। उन्होंने कहा, 'यह अच्छी बात है कि दुर्गा पूजा के दौरान मांस और मछली की बिक्री बंद कर दी जाए। हालांकि, एक चिंता यह है कि दुर्गा पूजा के दौरान लोग पशु बलि देते हैं। पशु बलि कुछ परंपराओं और धार्मिक रीति-रिवाजों का हिस्सा भी है। जब ऐसी बलि दी जाती है, तो उस मांस का क्या होगा? क्या लोगों को इसका उपयोग करने की अनुमति होगी या नहीं? विश्व हिंदू परिषद को इस मुद्दे पर भी विचार करना चाहिए। अगर वे मांस और मछली की बिक्री को नियंत्रित करना चाहते हैं, तो उन्हें पहले धार्मिक समुदायों से पशु बलि की प्रथा को खत्म करने की अपील करनी चाहिए।' रजक का यह बयान गाइडलाइंस के भीतर ही एक अंतर्विरोध की ओर इशारा करता है जिस पर अब तक वीएचपी ने कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया है।

कांग्रेस और सपा का कड़ा विरोध

नई दिल्ली में कांग्रेस नेता उदित राज ने वीएचपी की गाइडलाइंस को सीधे चुनौती दी। उन्होंने कहा, 'वे कौन होते हैं यह बताने वाले कि लोगों को क्या करना चाहिए? क्या वे चुने हुए प्रतिनिधि हैं? वे गुंडे और उपद्रवी हैं, और वे गलत नैरेटिव बनाते हैं। कोई क्या खाता है और किसे क्या खाने को मिलता है, यह एक संवैधानिक अधिकार है। उन्हें इस पर कोई सर्कुलर जारी करने का कोई अधिकार नहीं है।'

लखनऊ में समाजवादी पार्टी (सपा) के प्रवक्ता फखरुल हसन चांद ने कहा कि पश्चिम बंगाल में नियम बनाने की जिम्मेदारी वीएचपी की नहीं, बल्कि निर्वाचित सरकार की है। उनके अनुसार, संविधान के तहत नागरिकों की व्यक्तिगत स्वतंत्रता और धार्मिक भावना का सम्मान करना सरकार का दायित्व है, न कि किसी गैर-सरकारी संगठन का।

वीएचपी की ओर से समर्थन में आवाज़

विश्व हिंदू परिषद, इंद्रप्रस्थ प्रांत की अध्यक्ष उपासना अरोड़ा ने नई दिल्ली में इस कदम का पुरजोर स्वागत किया। उन्होंने कहा, 'मैं इसे बहुत सकारात्मक रूप से देखती हूं क्योंकि बचपन से ही मैंने देखा है कि दुर्गा पूजा के दौरान लोग आमतौर पर अपने घरों में मांस और शराब का सेवन बंद कर देते हैं। मैं तो इन दिनों अपने घर में प्याज भी नहीं आने देती। इसलिए, मुझे लगता है कि यह हमारी संस्कृति का हिस्सा है और विश्व हिंदू परिषद की जिम्मेदारी है कि वह हमारे मूल्यों को आगे बढ़ाए और लोगों तक पहुंचाए।'

व्यापक संदर्भ: धर्म, राजनीति और अधिकार

गौरतलब है कि यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब पश्चिम बंगाल में दुर्गा पूजा को लेकर धार्मिक और सांस्कृतिक संवेदनशीलता का माहौल पहले से ही बना रहता है। वीएचपी की गाइडलाइंस किसी कानूनी बाध्यता के तहत नहीं, बल्कि एक सांगठनिक अपील के रूप में जारी की गई हैं — यह भेद विपक्षी नेताओं की आलोचना के केंद्र में है। आलोचकों का कहना है कि ऐसे दिशानिर्देश सामाजिक दबाव का रूप ले सकते हैं, भले ही वे औपचारिक रूप से बाध्यकारी न हों।

आगे क्या

अब सभी की निगाहें इस बात पर हैं कि पश्चिम बंगाल सरकार इस मुद्दे पर क्या रुख अपनाती है। वीएचपी ने अभी तक पशु बलि संबंधी जदयू नेता के सवाल का कोई सार्वजनिक जवाब नहीं दिया है। दुर्गा पूजा के नज़दीक आते ही यह बहस और तीखी होने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

फिर भी इन पर राजनीतिक प्रतिक्रिया उतनी ही तीखी है जितनी किसी सरकारी आदेश पर होती। यह इस बात का संकेत है कि धार्मिक संगठनों का सामाजिक प्रभाव अब औपचारिक शक्ति की तरह ही विवाद का केंद्र बन रहा है। जदयू नेता का पशु बलि वाला सवाल दरअसल गाइडलाइंस के भीतर के अंतर्विरोध को उजागर करता है — जो यह पूछता है कि 'पवित्रता' की परिभाषा कहाँ खींची जाए। मुख्यधारा की कवरेज इस असली सवाल को अक्सर नज़रअंदाज़ कर देती है कि धार्मिक परंपराओं के नाम पर जारी दिशानिर्देश खुद उन्हीं परंपराओं के कुछ पहलुओं को क्यों नहीं छूते।
RashtraPress
29 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

वीएचपी की दुर्गा पूजा गाइडलाइंस में क्या कहा गया है?
विश्व हिंदू परिषद ने पश्चिम बंगाल में दुर्गा पूजा पंडालों के आसपास मांस और मछली की बिक्री पर रोक लगाने की अपील की है। ये गाइडलाइंस कानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं हैं, बल्कि एक सांगठनिक दिशानिर्देश के रूप में जारी की गई हैं।
जदयू नेता श्याम रजक ने पशु बलि पर क्या कहा?
जदयू नेता श्याम रजक ने मांस बिक्री पर रोक का समर्थन करते हुए वीएचपी से पूछा कि दुर्गा पूजा के दौरान पशु बलि के मांस का क्या होगा। उन्होंने वीएचपी से अपील की कि अगर वे मांस बिक्री नियंत्रित करना चाहते हैं, तो पहले धार्मिक समुदायों से पशु बलि की प्रथा खत्म करने की अपील करें।
कांग्रेस ने वीएचपी की गाइडलाइंस का विरोध क्यों किया?
कांग्रेस नेता उदित राज ने कहा कि वीएचपी निर्वाचित प्रतिनिधि नहीं है, इसलिए उसे लोगों के खान-पान पर सर्कुलर जारी करने का कोई अधिकार नहीं। उनके अनुसार, नागरिक क्या खाएँ यह उनका संवैधानिक अधिकार है।
समाजवादी पार्टी का इस विवाद पर क्या रुख है?
सपा प्रवक्ता फखरुल हसन चांद ने कहा कि पश्चिम बंगाल में नियम बनाना सरकार की जिम्मेदारी है, न कि किसी संगठन की। उन्होंने कहा कि सरकार को संविधान के अनुसार नागरिकों की स्वतंत्रता और धार्मिक भावना का सम्मान करना चाहिए।
क्या वीएचपी की गाइडलाइंस कानूनी रूप से लागू होंगी?
नहीं, वीएचपी की ये गाइडलाइंस किसी सरकारी आदेश या कानून पर आधारित नहीं हैं। ये एक गैर-सरकारी धार्मिक संगठन की अपील हैं, जिनका पालन करना या न करना नागरिकों की इच्छा पर निर्भर है।
राष्ट्र प्रेस
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