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वाराणसी को शराब मुक्त करो, होटलों में मांस-मछली बंद करो — सपा ने डीएम को सौंपा ज्ञापन

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वाराणसी को शराब मुक्त करो, होटलों में मांस-मछली बंद करो — सपा ने डीएम को सौंपा ज्ञापन

सारांश

वाराणसी नगर निगम द्वारा मीट-मछली की दुकानें शहर से बाहर करने के फैसले के बाद सपा कार्यकर्ताओं ने दाँव और ऊँचा किया — शराब की दुकानें बंद करो, होटलों में नॉन-वेज बंद करो। काशी की 'पवित्रता' की राजनीति अब नए मोर्चे पर है।

मुख्य बातें

समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने 9 जून 2026 को वाराणसी डीएम कार्यालय में ज्ञापन सौंपा।
माँग: वाराणसी को पूरी तरह शराब मुक्त किया जाए और होटलों-रेस्टोरेंटों में मांस-मछली पर पूर्ण प्रतिबंध लगे।
वाराणसी नगर निगम पहले ही मीट-मछली की दुकानों को शहर की सीमा से बाहर शिफ्ट करने का निर्णय ले चुका है।
सपा कार्यकर्ता जीशान अंसारी और शुभम सेठ गोलू ने शराब ठेकों और नॉन-वेज रेस्टोरेंटों को भी सील करने की माँग की।
माँगें न मानने पर सड़क से सदन तक आंदोलन की चेतावनी दी गई।

समाजवादी पार्टी (सपा) के कार्यकर्ताओं ने 9 जून 2026 को वाराणसी के जिला अधिकारी (डीएम) कार्यालय में ज्ञापन सौंपकर माँग की कि पवित्र नगरी काशी को पूरी तरह शराब मुक्त किया जाए और शहर के होटलों व रेस्टोरेंटों में मांस-मछली की आपूर्ति पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाए। यह माँग वाराणसी नगर निगम के उस हालिया निर्णय के बाद उठी है, जिसमें मीट और मछली की दुकानों को शहर की सीमा से बाहर स्थानांतरित करने का आदेश दिया गया था।

मुख्य घटनाक्रम

सपा कार्यकर्ताओं ने डीएम कार्यालय के बाहर हल्का प्रदर्शन भी किया। उनके हाथों में बैनर थे, जिन पर लिखा था — 'वाराणसी को शराब मुक्त करो, होटलों-रेस्टोरेंटों में मांस-मछली बंद करो।' कार्यकर्ताओं का तर्क था कि जब मीट-मछली की दुकानों को धर्म नगरी की गरिमा के नाम पर बाहर किया जा रहा है, तो शराब की खुली बिक्री और होटलों में मांसाहारी व्यंजनों की अनुमति देना इसी तर्क के विरुद्ध है।

कार्यकर्ताओं की माँगें

सपा कार्यकर्ता जीशान अंसारी ने स्पष्ट कहा कि यदि मीट-मछली की दुकानों को शहर से बाहर किया जा रहा है, तो शराब की दुकानों को भी काशी क्षेत्र से बाहर स्थानांतरित किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि जितने भी बार, शराब की दुकानें और वे रेस्टोरेंट जहाँ मीट-मछली परोसी जाती है — उन सभी को सील किया जाना चाहिए।

सपा कार्यकर्ता शुभम सेठ गोलू ने भी इस माँग का समर्थन करते हुए कहा कि नगर निगम के फैसले का स्वागत है, लेकिन शराब की दुकानें भी शहर के बाहर की जानी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि शराब पीकर लोग सार्वजनिक स्थानों पर हिंसा करते हैं, जिससे वाराणसी की पवित्रता को ठेस पहुँचती है।

नगर निगम के फैसले की पृष्ठभूमि

गौरतलब है कि वाराणसी नगर निगम ने हाल ही में शहर को साफ-सुथरा और पर्यटन-अनुकूल बनाने के उद्देश्य से मीट-मछली की दुकानों को शहर की सीमा से बाहर शिफ्ट करने का निर्णय लिया था। यह निर्णय काशी विश्वनाथ धाम, घाटों और प्रमुख मंदिरों के आसपास के परिवेश को सात्विक बनाए रखने की व्यापक मुहिम का हिस्सा बताया जा रहा है। सपा कार्यकर्ताओं ने इस फैसले का स्वागत करते हुए इसे और आगे बढ़ाने की माँग की है।

आंदोलन की चेतावनी

सपा कार्यकर्ताओं ने प्रशासन को चेतावनी दी कि यदि उनकी माँगें नहीं मानी गईं, तो पार्टी सड़क से लेकर सदन तक आंदोलन करेगी। यह ऐसे समय में है जब वाराणसी में धार्मिक पर्यटन को लेकर नीतिगत बहस तेज हो रही है और विभिन्न दल शहर की धार्मिक पहचान के सवाल पर अपनी स्थिति स्पष्ट कर रहे हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

काशी की 'सात्विकता' के एजेंडे पर सत्तारूढ़ दल से आगे निकलने की कोशिश कर रही है। लेकिन यह माँग व्यावहारिक जटिलताएँ खड़ी करती है — वाराणसी के होटल और पर्यटन उद्योग का एक बड़ा हिस्सा विदेशी और गैर-हिंदू पर्यटकों पर निर्भर है। शराब और मांसाहार पर पूर्ण प्रतिबंध से पर्यटन राजस्व पर क्या असर पड़ेगा, यह सवाल किसी भी दल ने नहीं उठाया। यह बहस 'पवित्रता' की राजनीति और आर्थिक व्यावहारिकता के बीच की खाई को उजागर करती है।
RashtraPress
25 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सपा ने वाराणसी में शराब और मांस-मछली पर प्रतिबंध की माँग क्यों की?
समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं का तर्क है कि वाराणसी नगर निगम ने मीट-मछली की दुकानें शहर से बाहर करने का जो निर्णय लिया है, उसी तर्क के आधार पर शराब की बिक्री और होटलों में मांसाहारी व्यंजनों पर भी प्रतिबंध लगना चाहिए। उनके अनुसार काशी विश्वनाथ, घाटों और मंदिरों की पवित्रता के लिए यह ज़रूरी है।
वाराणसी नगर निगम ने मीट-मछली की दुकानों के बारे में क्या फैसला किया है?
वाराणसी नगर निगम ने शहर को साफ-सुथरा और पर्यटन-अनुकूल बनाने के उद्देश्य से मीट और मछली की दुकानों को शहर की सीमा से बाहर स्थानांतरित करने का निर्णय लिया है। यही निर्णय सपा की नई माँगों का आधार बना है।
सपा के किन कार्यकर्ताओं ने यह माँग उठाई?
सपा कार्यकर्ता जीशान अंसारी और शुभम सेठ गोलू ने इस माँग का नेतृत्व किया। दोनों ने डीएम कार्यालय में ज्ञापन सौंपा और कार्यालय के बाहर प्रदर्शन में भाग लिया।
अगर माँगें नहीं मानी गईं तो सपा क्या करेगी?
सपा कार्यकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने उनकी माँगें नहीं मानीं तो पार्टी सड़क से लेकर सदन तक आंदोलन करेगी। फिलहाल डीएम कार्यालय की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
क्या वाराणसी में शराब और मांसाहार पर प्रतिबंध कानूनी रूप से संभव है?
उत्तर प्रदेश में शराब की बिक्री राज्य आबकारी नीति के तहत लाइसेंसशुदा है और इस पर प्रतिबंध के लिए राज्य सरकार के स्तर पर नीतिगत निर्णय आवश्यक होगा। होटलों में मांसाहार पर प्रतिबंध भी कानूनी और व्यावसायिक जटिलताएँ उत्पन्न करेगा। सपा की माँग फिलहाल प्रशासनिक ज्ञापन के स्तर पर है।
राष्ट्र प्रेस
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