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वीएचपी ने वाराणसी में मीट दुकानों के स्थानांतरण का समर्थन किया, श्रीराम मंदिर चढ़ावा विवाद को बताया राजनीति प्रेरित

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वीएचपी ने वाराणसी में मीट दुकानों के स्थानांतरण का समर्थन किया, श्रीराम मंदिर चढ़ावा विवाद को बताया राजनीति प्रेरित

सारांश

वीएचपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता श्रीराज नायर ने एक ही दिन में तीन अलग-अलग विवादों पर संगठन का रुख स्पष्ट किया — वाराणसी में मीट दुकानों का स्थानांतरण, अयोध्या मंदिर चढ़ावे पर सपा के आरोप, और जयपुर में अतिक्रमण हटाओ अभियान। तीनों मामलों में उनका स्वर एक ही रहा: धार्मिक गरिमा, कानूनी पारदर्शिता और जनहित सर्वोपरि।

मुख्य बातें

वीएचपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता श्रीराज नायर ने वाराणसी में मीट दुकानों को शहर के बाहर स्थानांतरित करने की नगर प्रशासन की योजना का समर्थन किया।
काशी विश्वनाथ धाम की धार्मिक-सांस्कृतिक गरिमा को स्थानांतरण निर्णय का आधार बताया गया।
अखिलेश यादव के श्रीराम मंदिर चढ़ावा विवाद के आरोपों को नायर ने 'बेबुनियाद और राजनीति प्रेरित' करार दिया; श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की नियमित ऑडिट का हवाला दिया।
साजिद यूसुफ शाह के 'कश्मीरी पहचान' भेदभाव के आरोप पर महाराष्ट्र सरकार से निष्पक्ष जांच की माँग की।
वीएचपी ने जयपुर में राजस्थान सरकार के अवैध कब्जा हटाओ अभियान को जनहित में आवश्यक कार्रवाई बताया।

विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) के राष्ट्रीय प्रवक्ता श्रीराज नायर ने 8 जून 2026 को वाराणसी में मीट की दुकानों को शहर के बाहर निर्धारित स्थानों पर स्थानांतरित करने की नगर प्रशासन की योजना का खुलकर समर्थन किया। उन्होंने कहा कि काशी विश्वनाथ धाम करोड़ों हिंदुओं की आस्था का केंद्र है और धार्मिक-सांस्कृतिक गरिमा को ध्यान में रखते हुए लिया गया यह निर्णय स्वागत योग्य है।

वाराणसी मीट दुकान स्थानांतरण पर वीएचपी का रुख

नायर ने स्पष्ट किया कि यदि नगर निगम ने मीट की बिक्री के लिए शहर के बाहर आधुनिक और व्यवस्थित स्थान निर्धारित किए हैं, तो इससे धार्मिक भावनाओं का सम्मान होगा और व्यापारिक गतिविधियाँ भी बाधित नहीं होंगी। उनके अनुसार यह निर्णय किसी समुदाय विशेष के विरुद्ध नहीं, बल्कि शहर की समग्र पहचान को सुरक्षित रखने की दिशा में है।

श्रीराम मंदिर चढ़ावा विवाद: आरोपों को बताया निराधार

अयोध्या स्थित श्रीराम मंदिर में चढ़ावे के धन के कथित गायब होने को लेकर समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव द्वारा लगाए गए आरोपों को नायर ने पूरी तरह खारिज किया। उन्होंने कहा कि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सभी वित्तीय लेन-देन की नियमित ऑडिट होती है और निर्धारित नियमों के तहत सभी लेखा-जोखा दर्ज किया जाता है। नायर के अनुसार, यदि कोई वित्तीय अनियमितता होती तो वह अब तक सामने आ चुकी होती।

उन्होंने समाजवादी पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश में सपा शासनकाल के दौरान कानून-व्यवस्था की स्थिति पर कई सवाल उठे थे, जिसे आलोचक प्रायः 'गुंडाराज' के रूप में संदर्भित करते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि अखिलेश यादव बिना ठोस प्रमाण के आरोपारोपण की राजनीति करते हैं।

कश्मीरी पहचान विवाद पर जांच की माँग

जम्मू-कश्मीर भारतीय जनता पार्टी (BJP) के पदाधिकारी साजिद यूसुफ शाह ने आरोप लगाया कि उनकी 'कश्मीरी पहचान' के कारण महाराष्ट्र में उन्हें ठहरने की जगह नहीं दी गई। इस पर नायर ने कहा कि महाराष्ट्र सरकार को इस मामले की निष्पक्ष जांच करानी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि देशभर में कश्मीरी शॉल और इम्पोरियम के कारोबार में बड़ी संख्या में कश्मीरी मुसलमान शामिल हैं, इसलिए बिना जांच के किसी निष्कर्ष पर पहुँचना उचित नहीं होगा। नायर ने स्पष्ट किया कि जम्मू-कश्मीर और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (POK) भारत के अभिन्न अंग हैं।

जयपुर अतिक्रमण हटाओ अभियान का समर्थन

नायर ने जयपुर में अवैध कब्जों के खिलाफ चल रही राजस्थान सरकार की कार्रवाई का भी समर्थन किया। उन्होंने कहा कि नागरिक सुरक्षा, यातायात व्यवस्था और बुनियादी ढाँचे के विकास के लिए ऐसे कदम आवश्यक हैं। उन्होंने उल्लेख किया कि कई अरब देशों में भी सड़क चौड़ीकरण और शहरी विकास के लिए धार्मिक ढाँचों तक को स्थानांतरित किया गया है। वीएचपी का मानना है कि अवैध निर्माणों पर दीर्घकाल तक की गई चुप्पी तुष्टिकरण की राजनीति का परिणाम थी।

आगे क्या

वीएचपी के इन बयानों के बाद वाराणसी मीट दुकान स्थानांतरण और अयोध्या मंदिर चढ़ावा विवाद पर राजनीतिक बहस तेज होने की संभावना है। यह ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश में धार्मिक स्थलों के आसपास व्यावसायिक गतिविधियों को लेकर नीतिगत विमर्श जारी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि एक सुनियोजित राजनीतिक संदेश है — वाराणसी, अयोध्या, जयपुर और कश्मीर, चारों मुद्दों पर एक ही दिन में स्थिति स्पष्ट करना संगठन की 'हिंदू हित' की व्यापक कथा को मजबूत करता है। श्रीराम मंदिर चढ़ावा विवाद पर नायर का जवाब तथ्यात्मक है, लेकिन ट्रस्ट की ऑडिट रिपोर्टें सार्वजनिक रूप से सुलभ हैं या नहीं, यह प्रश्न अनुत्तरित रहता है। वाराणसी मीट दुकान प्रकरण में 'व्यापारिक गतिविधियाँ जारी रहेंगी' का आश्वासन सुनने में संतुलित लगता है, परंतु स्थानांतरित दुकानदारों की आजीविका और पुनर्वास की ठोस योजना पर कोई स्पष्टता नहीं दी गई।
RashtraPress
25 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

वाराणसी में मीट की दुकानों का स्थानांतरण क्यों हो रहा है?
वाराणसी नगर प्रशासन काशी विश्वनाथ धाम की धार्मिक और सांस्कृतिक गरिमा को ध्यान में रखते हुए मीट की दुकानों को शहर के बाहर निर्धारित स्थानों पर स्थानांतरित करने की योजना पर काम कर रहा है। वीएचपी ने इस निर्णय का समर्थन किया है।
श्रीराम मंदिर चढ़ावे में गड़बड़ी के आरोप क्या हैं?
समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने अयोध्या स्थित श्रीराम मंदिर में चढ़ावे के धन के कथित गायब होने का आरोप लगाया है। वीएचपी ने इन आरोपों को पूरी तरह बेबुनियाद और राजनीति प्रेरित बताते हुए खारिज किया है।
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के वित्तीय प्रबंधन की निगरानी कैसे होती है?
वीएचपी प्रवक्ता श्रीराज नायर के अनुसार ट्रस्ट के सभी वित्तीय लेन-देन की नियमित ऑडिट होती है और सभी लेखा-जोखा निर्धारित नियमों के तहत दर्ज किया जाता है। हालाँकि इन ऑडिट रिपोर्टों की सार्वजनिक उपलब्धता पर स्वतंत्र पुष्टि नहीं की गई है।
साजिद यूसुफ शाह विवाद क्या है?
जम्मू-कश्मीर BJP पदाधिकारी साजिद यूसुफ शाह ने आरोप लगाया कि महाराष्ट्र में उनकी 'कश्मीरी पहचान' के कारण उन्हें ठहरने की जगह देने से इनकार किया गया। वीएचपी ने इस मामले की निष्पक्ष जांच की माँग की है और बिना जांच के किसी निष्कर्ष पर पहुँचने से मना किया है।
जयपुर अतिक्रमण हटाओ अभियान पर वीएचपी का क्या कहना है?
वीएचपी ने राजस्थान सरकार के जयपुर में अवैध कब्जे हटाने के अभियान को जनहित में आवश्यक कार्रवाई बताया है। संगठन का कहना है कि दीर्घकाल तक अवैध निर्माणों पर कार्रवाई न होना तुष्टिकरण की राजनीति का परिणाम था।
राष्ट्र प्रेस
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