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वाराणसी में मीट दुकानें शहर से बाहर: मौलाना रजवी बोले — 450 व्यापारियों की रोज़ी-रोटी खतरे में

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वाराणसी में मीट दुकानें शहर से बाहर: मौलाना रजवी बोले — 450 व्यापारियों की रोज़ी-रोटी खतरे में

सारांश

वाराणसी प्रशासन का 450 मीट-मछली दुकानों को शहर से बाहर भेजने का फैसला अब सियासी और सामाजिक बहस का केंद्र बन गया है। मौलाना रजवी का कहना है — यह सिर्फ दुकानें हटाना नहीं, हज़ारों परिवारों की आजीविका छीनना है।

मुख्य बातें

वाराणसी के महापौर अशोक कुमार तिवारी की अध्यक्षता में 6 जून को हुई बैठक में मीट-मछली दुकानों को शहर से बाहर भेजने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई।
नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल के अनुसार पहले चरण में 5 स्थान — रामनगर, सूजाबाद, गणेशपुर, अवलेशपुर और शिवपुर — चुने गए हैं।
ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने कहा कि इससे 450 दुकानदारों और प्रति दुकान 2-4 मज़दूरों की रोज़ी-रोटी छिनेगी।
मौलाना ने जम्मू-कश्मीर भाजपा मीडिया प्रभारी साजिद यूसुफ शाह को औरंगाबाद के एक होटल में कथित तौर पर कमरा न दिए जाने की घटना पर भी चिंता जताई।
मौलाना ने सभी धर्मों के लोगों से आपसी भाईचारा और सम्मान बनाए रखने की अपील की।

ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने वाराणसी जिला प्रशासन के उस फैसले पर कड़ी आपत्ति जताई है, जिसमें शहर के भीतर चल रही मीट और मछली की दुकानों को बाहरी इलाकों में स्थानांतरित करने का प्रस्ताव पास किया गया है। उनका कहना है कि इस निर्णय से 450 दुकानदारों और उनसे जुड़े हज़ारों श्रमिकों की आजीविका सीधे प्रभावित होगी। बरेली से 8 जून को दिए गए अपने बयान में उन्होंने इसे आर्थिक रूप से अन्यायपूर्ण करार दिया।

मुख्य घटनाक्रम

6 जून को वाराणसी के महापौर अशोक कुमार तिवारी की अध्यक्षता में मैदागिन स्थित टाउनहॉल में एक बैठक आयोजित हुई, जिसमें मीट-मांस की दुकानों को शहर से बाहर भेजने के प्रस्ताव को औपचारिक मंजूरी दी गई। इसके बाद नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल ने बताया कि योजना के पहले चरण में 5 स्थानोंरामनगर, सूजाबाद, गणेशपुर, अवलेशपुर और शिवपुर — का चयन किया गया है, जो शहर की बाहरी सीमाओं के निकट हैं।

मौलाना रजवी की आपत्ति

मौलाना रजवी ने कहा, "वाराणसी प्रशासन ने लगभग 450 मीट और मछली व्यापारियों को अपना कारोबार शहर से बाहर ले जाने का आदेश दिया है। इससे 450 दुकानदारों के साथ-साथ हर दुकान पर काम करने वाले दो से चार श्रमिकों की रोज़ी-रोटी छिन जाएगी।" उन्होंने चेतावनी दी कि यह कदम इन परिवारों को गरीबी की ओर धकेल सकता है।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि कोई दुकान किसी धार्मिक स्थल के अत्यंत निकट है, तो उसे थोड़ा हटाना उचित हो सकता है — लेकिन समस्त दुकानदारों को एकमुश्त शहर से बाहर करना न्यायसंगत नहीं है।

औरंगाबाद होटल घटना पर प्रतिक्रिया

मौलाना रजवी ने जम्मू-कश्मीर भाजपा के मीडिया प्रभारी साजिद यूसुफ शाह के साथ महाराष्ट्र के औरंगाबाद में कथित तौर पर हुई एक घटना का भी उल्लेख किया। आरोप है कि एक होटल ने उन्हें कमरा देने से इसलिए इनकार कर दिया क्योंकि वे कश्मीरी मुस्लिम हैं।

इस पर मौलाना ने कहा, "यह कैसी नफरत है?" उन्होंने कहा कि भारत प्यार, सद्भाव और भाईचारे का देश है, जहाँ हिंदू और मुसलमान सदियों से मिल-जुलकर रहते आए हैं। उन्होंने सभी धर्मों के लोगों से आपसी सम्मान बनाए रखने की अपील की।

आम जनता पर असर

यदि यह स्थानांतरण योजना लागू होती है, तो न केवल दुकान मालिक बल्कि प्रत्येक दुकान पर कार्यरत 2 से 4 दैनिक मज़दूर भी प्रभावित होंगे। अनुमान के अनुसार, 450 दुकानों के हिसाब से यह संख्या 900 से 1,800 श्रमिकों तक पहुँच सकती है। गौरतलब है कि ये व्यापारी वर्षों से शहर के भीतर स्थापित हैं और उनकी आजीविका स्थानीय ग्राहक आधार पर निर्भर है।

क्या होगा आगे

नगर प्रशासन ने चरणबद्ध तरीके से स्थानांतरण की योजना बनाई है, जिसके तहत पहले चरण में पाँच बाहरी स्थानों पर दुकानें शिफ्ट की जाएंगी। हालाँकि, व्यापारियों और सामाजिक संगठनों की ओर से इस फैसले का विरोध जारी है। मौलाना रजवी ने संकेत दिया है कि वे इस मामले को उचित मंचों पर उठाते रहेंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो अक्सर धार्मिक संवेदनशीलता के नाम पर आता है। सवाल यह है कि क्या शहरी नियोजन की आड़ में चुनिंदा व्यापारों को निशाना बनाना संवैधानिक रूप से टिकाऊ है। मौलाना रजवी का यह बयान कि 'मंदिर के पास की दुकान हटाना उचित हो सकता है, लेकिन सबको बाहर करना नहीं' — दरअसल एक संतुलित रेखा खींचने की कोशिश है जो बहस को सांप्रदायिक से आर्थिक धरातल पर लाती है। साजिद यूसुफ शाह प्रकरण इस संदर्भ में और भी महत्वपूर्ण हो जाता है, क्योंकि वे स्वयं भाजपा से जुड़े हैं — जो यह दर्शाता है कि पूर्वाग्रह दलीय सीमाओं को नहीं पहचानता।
RashtraPress
27 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

वाराणसी में मीट की दुकानें शहर से बाहर क्यों भेजी जा रही हैं?
वाराणसी नगर निगम ने 6 जून को एक बैठक में मीट और मछली की दुकानों को शहर की बाहरी सीमाओं पर स्थानांतरित करने का प्रस्ताव पास किया। नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल के अनुसार पहले चरण में रामनगर, सूजाबाद, गणेशपुर, अवलेशपुर और शिवपुर में 5 स्थान चुने गए हैं।
इस फैसले से कितने लोगों की आजीविका प्रभावित होगी?
मौलाना शहाबुद्दीन रजवी के अनुसार लगभग 450 मीट और मछली व्यापारी सीधे प्रभावित होंगे। इसके अलावा प्रत्येक दुकान पर काम करने वाले 2 से 4 मज़दूर भी रोज़गार खो सकते हैं, जिससे कुल प्रभावित लोगों की संख्या हज़ारों में पहुँच सकती है।
मौलाना रजवी ने औरंगाबाद की किस घटना का ज़िक्र किया?
मौलाना रजवी ने बताया कि जम्मू-कश्मीर भाजपा के मीडिया प्रभारी साजिद यूसुफ शाह को महाराष्ट्र के औरंगाबाद में एक होटल ने कथित तौर पर कमरा देने से इनकार कर दिया। आरोप है कि यह इनकार उनके कश्मीरी मुस्लिम होने के कारण हुआ।
क्या मौलाना रजवी ने मीट दुकानों के स्थानांतरण का पूरी तरह विरोध किया?
नहीं, मौलाना ने कहा कि यदि कोई दुकान किसी मंदिर के अत्यंत निकट है तो उसे थोड़ा हटाना उचित हो सकता है। लेकिन उन्होंने सभी 450 दुकानदारों को एकमुश्त शहर से बाहर करने के फैसले को अन्यायपूर्ण और आर्थिक रूप से विनाशकारी बताया।
ऑल इंडिया मुस्लिम जमात कौन सी संस्था है?
ऑल इंडिया मुस्लिम जमात एक राष्ट्रीय मुस्लिम संगठन है, जिसके अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी हैं। यह संगठन मुस्लिम समुदाय से जुड़े सामाजिक, धार्मिक और आर्थिक मुद्दों पर सार्वजनिक रूप से अपनी राय रखता है।
राष्ट्र प्रेस
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