वाराणसी में मांस-मछली की दुकानें शहर के बाहर होंगी शिफ्ट, नगर निगम का सर्वसम्मत फैसला
सारांश
मुख्य बातें
वाराणसी नगर निगम ने 7 जून 2026 को एक ऐतिहासिक प्रस्ताव पारित करते हुए शहर के भीतर संचालित सभी मांस-मछली की दुकानों को 6 महीने के भीतर शहर से बाहर स्थानांतरित करने का निर्णय लिया। नगर निगम सदन ने यह प्रस्ताव एकमत से पारित किया और मेयर अशोक कुमार तिवारी ने स्पष्ट किया कि काशी की सांस्कृतिक एवं धार्मिक पहचान को बनाए रखना इस फैसले का मुख्य उद्देश्य है।
मुख्य घटनाक्रम
नगर निगम सदन की बैठक में पारित प्रस्ताव के तहत शहर के अंदर चल रही सभी मांस, मछली और चिकन की दुकानें बंद की जाएंगी और उन्हें शहर से बाहर 5 निर्धारित स्थानों पर स्थानांतरित किया जाएगा। इन स्थानों में रामनगर, डुमरी, शिवपुर और चितईपुर शामिल हैं। नगर निगम ने कहा है कि नई जगहों पर बिजली, पानी, साफ-सफाई और कचरा प्रबंधन की समुचित व्यवस्था की जाएगी।
मेयर अशोक कुमार तिवारी ने बताया कि यह प्रस्ताव पहले ही कार्यकारी समिति द्वारा पारित किया जा चुका था और अब नगर निगम सदन ने भी इसे मंजूरी दे दी है। उन्होंने कहा कि शहर को 5 हिस्सों में बाँटकर पुनर्स्थापन की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
दुकानदारों की स्थिति
मेयर तिवारी ने स्वीकार किया कि शहर के भीतर संचालित सभी मांस-मछली की दुकानें अनधिकृत हैं और किसी के पास भी वैध लाइसेंस नहीं है। उन्होंने कहा, 'हम उन्हें हटा नहीं रहे हैं या बंद नहीं कर रहे हैं। हम उन्हें शहर के बाहर तय जगहों पर लगाएंगे और उन्हें एक जगह पर लाएंगे।' नगर निगम ने आश्वासन दिया कि सभी मौजूदा दुकानदारों को नई जगहों पर वैध दुकानें आवंटित की जाएंगी।
यह ऐसे समय में आया है जब काशी में पर्यटन तेज़ी से बढ़ रहा है। मेयर के अनुसार, प्रतिदिन 1.5 से 2 लाख पर्यटक वाराणसी आते हैं और खुले में मांस-मछली की बिक्री से शहर की सांस्कृतिक छवि प्रभावित होती है।
सरकार की मंशा और तर्क
मेयर तिवारी ने कहा, 'काशी एक धार्मिक और सांस्कृतिक शहर है। लाखों लोग यहाँ घूमने आते हैं। वे यहाँ मीट और मछली की दुकानें देखने नहीं आते।' उनका कहना है कि यह फैसला केवल शहर की सफाई के लिए नहीं, बल्कि काशी की प्राचीन पहचान को संरक्षित करने के लिए भी है।
गौरतलब है कि वाराणसी देश के सबसे प्राचीन और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध शहरों में से एक है, जहाँ देश-विदेश से हर महीने लाखों श्रद्धालु और पर्यटक आते हैं। नगर निगम का तर्क है कि शहर की स्वच्छता और छवि सुधार के लिए यह कदम आवश्यक था।
आम जनता और दुकानदारों पर असर
इस निर्णय से शहर के भीतर मांस-मछली व्यापार से जुड़े दुकानदारों को नई जगहों पर स्थानांतरित होना होगा। नगर निगम ने वादा किया है कि नई दुकानें पूरी तरह सुविधायुक्त होंगी और कचरा प्रबंधन की पर्याप्त व्यवस्था रहेगी। हालाँकि, आलोचकों का कहना है कि शहर से बाहर जाने पर दुकानदारों की आमदनी और ग्राहक आधार पर असर पड़ सकता है।
क्या होगा आगे
नगर निगम प्रशासन के अनुसार, दुकानदारों को नए स्थानों पर दुकान आवंटित करने की प्रक्रिया शीघ्र शुरू की जाएगी। 6 महीने की समय-सीमा में पूरे पुनर्स्थापन का काम पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। यह देखना होगा कि क्रियान्वयन के दौरान दुकानदारों के हितों की रक्षा किस हद तक हो पाती है।