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काशी विश्वनाथ क्षेत्र में मांस-मछली बिक्री पर रोक: संतों ने किया स्वागत, अयोध्या में भी पाबंदी की उठी माँग

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काशी विश्वनाथ क्षेत्र में मांस-मछली बिक्री पर रोक: संतों ने किया स्वागत, अयोध्या में भी पाबंदी की उठी माँग

सारांश

वाराणसी नगर निगम के काशी विश्वनाथ क्षेत्र में मांस-मछली बिक्री पर रोक के फैसले को संत समाज ने सराहा है — लेकिन माँग यहीं नहीं रुकी। संतों ने प्रतिबंध का दायरा पूरे वाराणसी और अयोध्या तक बढ़ाने का आग्रह किया है, जो इस मुद्दे को स्थानीय से राज्यव्यापी बहस में बदल रहा है।

मुख्य बातें

वाराणसी नगर निगम ने काशी विश्वनाथ मंदिर के 2 किलोमीटर के दायरे में मांस-मछली की बिक्री पर रोक लगाई।
सीताराम दास महाराज , आचार्य संदीप तिवारी और वरुण दास महाराज सहित कई संतों ने इस फैसले का स्वागत किया।
देवेशाचार्य महाराज ने माँग की कि प्रतिबंध संकटमोचन , दुर्गाकुंड और काल भैरव क्षेत्रों तक भी बढ़ाया जाए।
संतों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री से अयोध्या में भी मांस-शराब पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का आग्रह किया।
अब तक उत्तर प्रदेश सरकार या अयोध्या प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

वाराणसी नगर निगम द्वारा काशी विश्वनाथ मंदिर के 2 किलोमीटर के दायरे में मांस-मछली की बिक्री पर प्रतिबंध लगाने के फैसले का संत समाज ने व्यापक स्वागत किया है। इस निर्णय के बाद धार्मिक नगरी अयोध्या में भी इसी प्रकार की पाबंदियाँ लागू करने की माँग तेज़ हो गई है। 7 जून को सामने आई इन प्रतिक्रियाओं में कई प्रमुख संतों ने न केवल इस कदम की सराहना की, बल्कि प्रतिबंध के दायरे को और विस्तृत करने का आग्रह भी किया।

संतों की प्रतिक्रिया

सीताराम दास महाराज ने इस फैसले को 'अत्यंत सराहनीय' बताते हुए कहा, 'वाराणसी नगर निगम द्वारा लिया गया यह फैसला अत्यंत सराहनीय है। मैं दिल से उनका आभार व्यक्त करता हूँ कि उन्होंने काशी विश्वनाथ की पावनता, पौराणिकता, शुद्धता और सुचिता को बनाए रखने के लिए यह कदम उठाया है।' उन्होंने यह भी कहा कि संपूर्ण हिंदू समाज और साधु-संत इस फैसले के समर्थन में खड़े हैं।

आचार्य संदीप तिवारी ने इस निर्णय को धार्मिक और ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा, 'काशी केवल बाबा विश्वनाथ तक सीमित नहीं है — यह भगवान बुद्ध से भी जुड़ी हुई है, जिन्होंने दया, सत्य और अहिंसा का संदेश दिया था।' उन्होंने यह भी जोड़ा कि ऐसे फैसले समाज को जीवों और मानवता के प्रति नई सोच प्रदान करते हैं।

आर्य संत वरुण दास महाराज ने काशी की महिमा को रेखांकित करते हुए कहा कि काशी पंचकोशी क्षेत्र के भीतर इस प्रकार की गतिविधियाँ पहले से ही नहीं होनी चाहिए थीं। उन्होंने बताया कि संत समाज लंबे समय से यह माँग उठाता रहा है।

दायरा बढ़ाने की माँग

महंत डॉ. देवेशाचार्य महाराज ने इस कदम की प्रशंसा करते हुए कहा कि केवल 2 किलोमीटर की सीमा पर्याप्त नहीं है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और वाराणसी नगर निगम से आग्रह किया कि संकटमोचन, दुर्गाकुंड, काल भैरव और अन्य प्रमुख धार्मिक स्थलों को भी इस प्रतिबंध के दायरे में शामिल किया जाए। उनका तर्क है कि श्रद्धालु और पर्यटक केवल मंदिर परिसर तक सीमित नहीं रहते, बल्कि दूर-दराज के क्षेत्रों में भी ठहरते हैं।

महंत देवेशाचार्य ने आगे कहा, 'मैं उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री से पुनः आग्रह करता हूँ कि अयोध्या में भी मांस और शराब की बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाए।'

अयोध्या में उठी माँग

काशी में लगे इस प्रतिबंध के बाद धार्मिक नगरी अयोध्या में भी इसी प्रकार की पाबंदियों की माँग ज़ोर पकड़ रही है। गौरतलब है कि अयोध्या में राम मंदिर के उद्घाटन के बाद से वहाँ श्रद्धालुओं की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, और संत समाज का मानना है कि इस नगरी की धार्मिक पवित्रता बनाए रखना आवश्यक है।

आगे क्या

अभी तक उत्तर प्रदेश सरकार या अयोध्या नगर निगम की ओर से इस माँग पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। वाराणसी में लागू प्रतिबंध के क्रियान्वयन की निगरानी और उसके व्यापक असर के आधार पर यह तय हो सकता है कि अन्य धार्मिक नगरियों में भी ऐसे कदम उठाए जाएँगे या नहीं।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो इस निर्णय की दीर्घकालिक व्यवहार्यता पर सवाल खड़े करती है। प्रतिबंध का दायरा बढ़ाने की माँग राज्य के धार्मिक शहरों में एक व्यापक नीतिगत बदलाव की ओर संकेत करती है, लेकिन यह संवैधानिक व्यापार-स्वतंत्रता और धर्मनिरपेक्षता के सवालों को भी जन्म देती है जिन पर मुख्यधारा की कवरेज अक्सर मौन रहती है।
RashtraPress
23 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

वाराणसी नगर निगम ने काशी विश्वनाथ क्षेत्र में मांस-मछली बिक्री पर क्यों रोक लगाई?
वाराणसी नगर निगम ने काशी विश्वनाथ मंदिर के 2 किलोमीटर के दायरे में मांस-मछली की बिक्री पर प्रतिबंध लगाया है, ताकि इस धार्मिक क्षेत्र की पवित्रता और सुचिता बनाए रखी जा सके। यह निर्णय संत समाज की लंबे समय से चली आ रही माँग के अनुरूप है।
किन संतों ने इस फैसले का स्वागत किया है?
सीताराम दास महाराज, आचार्य संदीप तिवारी, आर्य संत वरुण दास महाराज और महंत डॉ. देवेशाचार्य महाराज ने इस फैसले का स्वागत किया है। इन सभी ने वाराणसी नगर निगम और सरकार को धन्यवाद दिया है।
क्या यह प्रतिबंध पूरे वाराणसी में लागू होगा?
अभी यह प्रतिबंध केवल काशी विश्वनाथ मंदिर के 2 किलोमीटर के दायरे में लागू है। महंत डॉ. देवेशाचार्य महाराज सहित कई संतों ने माँग की है कि इसे संकटमोचन, दुर्गाकुंड, काल भैरव सहित पूरे वाराणसी नगर निगम क्षेत्र में लागू किया जाए।
अयोध्या में मांस-शराब बैन की माँग क्यों उठ रही है?
काशी में लगे प्रतिबंध से उत्साहित संत समाज ने अयोध्या में भी मांस और शराब की बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की माँग की है। महंत देवेशाचार्य ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री से इस दिशा में कदम उठाने का आग्रह किया है।
उत्तर प्रदेश सरकार ने अयोध्या में प्रतिबंध की माँग पर क्या कहा है?
अभी तक उत्तर प्रदेश सरकार या अयोध्या नगर निगम की ओर से इस माँग पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। संतों की माँग के बाद प्रशासनिक स्तर पर क्या कदम उठाए जाएँगे, यह स्पष्ट नहीं है।
राष्ट्र प्रेस
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