हरिद्वार में अर्धकुंभ 2027 से पहले मीट पर प्रतिबंध को संतों का समर्थन, धार्मिक स्थलों पर भी मांग
सारांश
Key Takeaways
- अर्धकुंभ 2027 के लिए हरिद्वार में तैयारियाँ तेज़ हैं।
- राज्य सरकार ने मीट की दुकानों पर प्रतिबंध लगाया है।
- संत समाज ने इस निर्णय का समर्थन किया है।
- पूरे देश के धार्मिक स्थलों पर भी प्रतिबंध लागू करने की मांग उठाई गई है।
हरिद्वार, 3 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। आगामी अर्धकुंभ 2027 के लिए हरिद्वार में गतिविधियाँ तेज़ हो गई हैं। इस संदर्भ में, धार्मिक वातावरण को शुद्ध बनाए रखने पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इसी के तहत, राज्य सरकार ने मीट की दुकानों पर प्रतिबंध लगाने का निर्णय लिया है, जिस पर संत समाज की प्रतिक्रिया भी सामने आई है। अयोध्या के संतों ने इस निर्णय का समर्थन करते हुए इसे देशभर के धार्मिक स्थलों पर लागू करने की मांग की है।
अयोध्या के संत सुमित दास जी महाराज ने राष्ट्र प्रेस से वार्ता करते हुए कहा, "संत समाज इस प्रकार के नियमों की मांग हमेशा करता आया है। अयोध्या में 14 कोसी परिक्रमा क्षेत्र के अंतर्गत पहले से ही मीट और शराब की दुकानों को अनुमति नहीं दी जाती। धार्मिक स्थलों का वातावरण पूरी तरह से पवित्र और शांत होना चाहिए, ताकि श्रद्धालु बिना किसी बाधा के पूजा-पाठ कर सकें।"
संत सुमित दास जी का मानना है कि सिर्फ हरिद्वार ही नहीं, बल्कि देश के सभी प्रमुख तीर्थ स्थलों और पवित्र नदियों के किनारे इस प्रकार के प्रतिबंध लागू होने चाहिए।
संत आचार्य हरीश दास जी महाराज ने भी हरिद्वार में मीट की बिक्री पर लगे प्रतिबंध का स्वागत किया और इसे पूरे देश के धार्मिक स्थलों पर लागू करने की अपील की। उन्होंने कहा, "हम सरकार के इस निर्णय का स्वागत करते हैं, लेकिन यह केवल हरिद्वार तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि देश के सभी प्रमुख तीर्थ स्थलों पर भी इस तरह की गतिविधियों पर रोक लगनी चाहिए।"
आर्य संत वरुण दास जी महाराज ने भी इस कदम की सराहना की। उन्होंने कहा, "हरिद्वार को गंगा नगरी के रूप में जाना जाता है और यहां की पवित्रता बनाए रखना बहुत आवश्यक है। यदि इस प्रकार की अपवित्रता फैलाने वाली गतिविधियों को रोका जाए, तो यह समाज में सकारात्मक संदेश भेजता है और लोगों की धार्मिक भावना को मजबूत करता है।"
अयोध्या धाम के महंत सीताराम दास ने भी इस निर्णय का समर्थन करते हुए कहा, "हरिद्वार को मोक्षदायिनी माना जाता है। यहां लोग आत्मा की शांति और मोक्ष की प्राप्ति के लिए आते हैं। ऐसे में यहां शराब और मीट की दुकानों का होना उचित नहीं है।"