21 जुलाई 2026
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कांवड़ यात्रा मार्ग पर मांस-मदिरा दुकानें बंद करने की मांग, अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद ने सरकार से कठोर कदम उठाने की अपील की

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कांवड़ यात्रा मार्ग पर मांस-मदिरा दुकानें बंद करने की मांग, अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद ने सरकार से कठोर कदम उठाने की अपील की

सारांश

अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद ने कांवड़ यात्रा मार्ग से मांस-मदिरा की दुकानें हटाने की माँग सरकार के सामने रखी है। परिषद का तर्क है कि इन दुकानों से श्रद्धालुओं की धार्मिक भावनाएँ आहत होती हैं और विवाद की आशंका बढ़ती है। मुद्दा अब प्रशासनिक बैठकों और मुख्यमंत्री तक पहुँचाया जाएगा।

मुख्य बातें

अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद (एबीएपी) ने 21 जुलाई को हरिद्वार से कांवड़ यात्रा मार्ग पर मांस-मदिरा दुकानें बंद करने की सरकार से माँग की।
परिषद के महामंडलेश्वर करौली शंकर महादेव ने कहा कि इन दुकानों से श्रद्धालुओं की धार्मिक भावनाएँ आहत होती हैं और अव्यवस्था की संभावना बढ़ती है।
एबीएपी ने मुख्यमंत्री और प्रशासन से कठोर कदम उठाने की औपचारिक अपील करने की घोषणा की है।
यह मुद्दा प्रशासन के साथ होने वाली बैठकों में भी उठाया जाएगा।
परिषद का तर्क है कि यात्रा के दौरान मांस-मदिरा पर रोक से दंगे और विवाद की आशंका काफी हद तक कम होगी।

अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद (एबीएपी) ने 21 जुलाई को हरिद्वार से सरकार से माँग की है कि कांवड़ यात्रा मार्ग पर स्थित मांस और शराब की दुकानों को यात्रा की अवधि में तत्काल बंद या हटाया जाए। परिषद का कहना है कि इन प्रतिष्ठानों की मौजूदगी श्रद्धालुओं की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाती है और विवाद की संभावनाएँ बढ़ाती है।

मुख्य माँग और कारण

एबीएपी के महामंडलेश्वर और मीडिया समन्वयक करौली शंकर महादेव ने कहा, 'अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद की ओर से हम माँग करेंगे, संतों की ओर से माँग करेंगे कि रास्ते में पड़ने वाली मांस-मदिरा की दुकानों को हटाया जाना चाहिए। पूरी कांवड़ यात्रा के दौरान इन्हें वहाँ से हटाया जाना चाहिए।'

उन्होंने आगे कहा, 'कांवड़िये अपनी धार्मिक यात्रा में लगे होते हैं। कभी-कभी उनके साथ आए लोग, क्षेत्रीय लोग या राह चलते लोग जब नशे का सेवन करते हैं, तो वहाँ विवाद और अव्यवस्था की संभावनाएँ बढ़ जाती हैं।'

सात्विक यात्रा पर नकारात्मक प्रभाव का तर्क

करौली शंकर महादेव ने यह भी कहा कि जब श्रद्धालु सात्विक विचारधारा के साथ अपने घरों से हरिद्वार के लिए कांवड़ लेकर निकलते हैं, तो मार्ग में मांस-मदिरा की दुकानें देखने से मन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। उनके अनुसार, 'शराब और मांस-मदिरा जैसी चीजें कई बार अनावश्यक तनाव और विवाद की स्थिति पैदा करती हैं।'

प्रशासन और सरकार से अपील

परिषद ने स्पष्ट किया कि यह मुद्दा प्रशासन के साथ होने वाली बैठकों में भी उठाया जाएगा। करौली शंकर महादेव ने बताया कि अखाड़ा परिषद की ओर से मुख्यमंत्री और प्रशासन से इस मामले में आवश्यक कदम उठाने की औपचारिक अपील की जाएगी।

उन्होंने कहा, 'इस पर कठोर कदम उठाए जाएँ, ताकि कांवड़ यात्रा सुगमता से संपन्न हो और किसी प्रकार का उपद्रव, दंगा, बवाल या फसाद न हो।'

आगे क्या होगा

गौरतलब है कि कांवड़ यात्रा मार्ग पर दुकानों को लेकर यह विवाद नया नहीं है — पिछले कुछ वर्षों में उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड दोनों में इस तरह की माँगें उठती रही हैं। इस बार एबीएपी के औपचारिक हस्तक्षेप के बाद यह देखना होगा कि उत्तराखंड सरकार और स्थानीय प्रशासन क्या रुख अपनाते हैं। यदि दुकानें बंद करने का आदेश आता है, तो यह व्यापारियों की आजीविका से जुड़े सवाल भी खड़े कर सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

या व्यापारियों और संवैधानिक अधिकारों का संतुलन भी ध्यान में रखेगा। उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में पिछले वर्षों में ऐसे आदेश विवादास्पद रहे हैं और न्यायिक चुनौतियों का सामना कर चुके हैं। बिना पारदर्शी नीति-ढाँचे के, हर साल यही चक्र दोहराता रहेगा।
RashtraPress
21 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद ने कांवड़ यात्रा मार्ग पर क्या माँग की है?
एबीएपी ने सरकार से माँग की है कि कांवड़ यात्रा की पूरी अवधि के दौरान यात्रा मार्ग पर स्थित मांस और शराब की दुकानों को तत्काल बंद या हटाया जाए। परिषद का कहना है कि इन दुकानों की मौजूदगी से श्रद्धालुओं की धार्मिक भावनाएँ आहत होती हैं और विवाद की संभावना बढ़ती है।
एबीएपी के अनुसार मांस-मदिरा दुकानों से कांवड़ यात्रा पर क्या असर पड़ता है?
परिषद के महामंडलेश्वर करौली शंकर महादेव के अनुसार, यात्रा मार्ग पर नशे के सेवन से विवाद और अव्यवस्था की संभावनाएँ बढ़ती हैं। इसके अलावा, सात्विक विचारधारा से यात्रा पर निकले श्रद्धालुओं के मन पर इन दुकानों को देखकर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
क्या यह माँग सरकार तक पहुँचाई जाएगी?
हाँ, एबीएपी ने कहा है कि यह मुद्दा प्रशासन के साथ होने वाली बैठकों में उठाया जाएगा और मुख्यमंत्री से भी आवश्यक कदम उठाने की औपचारिक अपील की जाएगी।
कांवड़ यात्रा मार्ग पर दुकानें बंद करने का विवाद नया है या पुराना?
यह विवाद नया नहीं है। उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में पिछले कई वर्षों से कांवड़ यात्रा के दौरान मांस-मदिरा की दुकानों को लेकर माँगें और आदेश सामने आते रहे हैं। इस बार एबीएपी के औपचारिक हस्तक्षेप ने इस मुद्दे को फिर से चर्चा में ला दिया है।
यह माँग कहाँ से और कब उठाई गई?
यह माँग 21 जुलाई को हरिद्वार , उत्तराखंड से अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के महामंडलेश्वर करौली शंकर महादेव ने उठाई।
राष्ट्र प्रेस
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