18 जुलाई 2026
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कांवड़ यात्रा में भोजन पारदर्शिता पर महामंडलेश्वर करौली शंकर महादेव की माँग, उल्लंघनकर्ताओं पर कठोर कार्रवाई हो

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कांवड़ यात्रा में भोजन पारदर्शिता पर महामंडलेश्वर करौली शंकर महादेव की माँग, उल्लंघनकर्ताओं पर कठोर कार्रवाई हो

सारांश

नया उदासीन अखाड़े के महामंडलेश्वर करौली शंकर महादेव ने हरिद्वार से साफ संदेश दिया — कांवड़ यात्रा में भोजन की पारदर्शिता से समझौता नहीं चलेगा। नियम तोड़ने वाले प्रतिष्ठानों पर कठोर कार्रवाई हो और असामाजिक तत्वों को तत्काल दंड मिले, ताकि श्रद्धालुओं की आस्था और सुरक्षा दोनों सुनिश्चित रहें।

मुख्य बातें

महामंडलेश्वर करौली शंकर महादेव ने 18 जुलाई को हरिद्वार में कांवड़ यात्रा के दौरान भोजन पारदर्शिता सुनिश्चित करने की माँग की।
उन्होंने भोजनालयों पर पहचान-बोर्ड लगाने की सरकारी व्यवस्था को सराहनीय बताया और इसके सख्त क्रियान्वयन की अपील की।
नियमों का उल्लंघन करने वाले प्रतिष्ठानों के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई और सख्त दंड की माँग की गई।
श्रद्धालुओं से भी अपील — भोजन ग्रहण करने से पहले स्वयं जाँच-परख करें , सजगता ही सबसे बड़ा बचाव है।
नशे में हंगामा करने वाले असामाजिक तत्वों पर तत्काल कार्रवाई की माँग; प्रशासन सुरक्षा समीक्षा बैठकें कर रहा है।

नया उदासीन अखाड़े के महामंडलेश्वर करौली शंकर महादेव ने 18 जुलाई को हरिद्वार में कहा कि कांवड़ यात्रा के दौरान भोजन व्यवस्था में पूर्ण पारदर्शिता सुनिश्चित की जानी चाहिए और नियमों का उल्लंघन करने वाले प्रतिष्ठानों के विरुद्ध तत्काल कठोर कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने श्रद्धालुओं की धार्मिक आस्था की रक्षा के लिए सरकार द्वारा उठाए गए कदमों को सराहनीय बताते हुए उनके सख्त क्रियान्वयन की अपील की।

भोजन पारदर्शिता की माँग

महामंडलेश्वर करौली शंकर महादेव ने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को यह जानने का अधिकार है कि वह क्या खा रहा है और किस प्रकार का भोजन उसे परोसा जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि किसी प्रतिष्ठान पर बाहर एक प्रकार की पहचान प्रदर्शित की जाए और भीतर अलग प्रकार का भोजन तैयार किया जाए, तो इससे श्रद्धालुओं की धार्मिक आस्था और विश्वास को ठेस पहुँच सकती है।

उन्होंने उत्तर प्रदेश सहित विभिन्न राज्य सरकारों द्वारा भोजनालयों और दुकानों पर पहचान संबंधी बोर्ड लगाए जाने की व्यवस्था को उचित ठहराया, ताकि श्रद्धालु अपनी धार्मिक मान्यताओं के अनुरूप भोजन का चुनाव कर सकें। उनके अनुसार ऐसे बोर्ड निरंतर प्रदर्शित रहने चाहिए और सरकार को इस व्यवस्था का कड़ाई से पालन कराना चाहिए।

उल्लंघनकर्ताओं पर सख्त दंड की अपील

महामंडलेश्वर ने माँग की कि यदि कोई व्यक्ति या प्रतिष्ठान इन नियमों का उल्लंघन करता है, तो उसके विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए और सख्त दंड दिया जाए। उन्होंने कहा कि यह केवल धार्मिक भावनाओं का प्रश्न नहीं, बल्कि उपभोक्ता के सूचना के अधिकार का भी विषय है।

गौरतलब है कि कांवड़ यात्रा प्रतिवर्ष उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और अन्य राज्यों में लाखों शिव भक्तों को एकत्र करती है, और इस दौरान खान-पान की व्यवस्था एक संवेदनशील विषय बनी रहती है।

श्रद्धालुओं से सजगता की अपील

करौली शंकर महादेव ने यह भी कहा कि केवल सरकार की जिम्मेदारी पर्याप्त नहीं है — श्रद्धालुओं को भी स्वयं जागरूक रहना होगा। उन्होंने लोगों से अपील की कि भोजन ग्रहण करने से पहले पूरी जानकारी लें, देखें, समझें और उसके बाद ही निर्णय करें।

उन्होंने कहा, 'सजगता ही ऐसी परिस्थितियों से बचने का सबसे प्रभावी उपाय है।' किसी पर दोषारोपण करने के बजाय प्रत्येक व्यक्ति को अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए, जिससे अनावश्यक विवादों और भ्रम की स्थिति से बचा जा सके।

विघटनकारी तत्वों पर कार्रवाई की माँग

महामंडलेश्वर ने कांवड़ यात्रा के दौरान असामाजिक तत्वों पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि बड़े धार्मिक आयोजनों में कुछ लोग नशे या अन्य कारणों से श्रद्धालुओं के बीच अशांति फैलाने की कोशिश करते हैं।

उन्होंने माँग की कि जो भी व्यक्ति नशे की हालत में हंगामा करे या मेले का वातावरण बिगाड़ने का प्रयास करे, उसके विरुद्ध तत्काल और कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए। उन्होंने बताया कि प्रशासन ऐसे मामलों में सतर्क है और सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा के लिए लगातार बैठकें हो रही हैं।

आगे की राह

महामंडलेश्वर करौली शंकर महादेव की यह अपील ऐसे समय में आई है जब कांवड़ यात्रा 2025 अपने चरम पर है और प्रशासन सुरक्षा तथा व्यवस्था को लेकर हाई अलर्ट पर है। उनकी माँगें — भोजन पारदर्शिता, उल्लंघनकर्ताओं पर दंड और असामाजिक तत्वों पर सख्ती — यात्रा को शांतिपूर्ण और सुव्यवस्थित बनाए रखने की दिशा में नीति-निर्माताओं के लिए एक स्पष्ट संदेश है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो पिछले कुछ वर्षों में कांवड़ यात्रा मार्गों पर बार-बार उभरता रहा है। ध्यान देने योग्य है कि धार्मिक नेताओं की ऐसी माँगें अक्सर नीतिगत बदलावों को गति देती हैं, लेकिन क्रियान्वयन की खाई बनी रहती है। असली प्रश्न यह है कि क्या प्रशासन बोर्ड लगवाने से आगे बढ़कर उल्लंघनों की निगरानी और दंड का पारदर्शी तंत्र स्थापित कर पाएगा — अन्यथा यह व्यवस्था केवल कागज़ी रहेगी और धार्मिक आस्था की आड़ में सांप्रदायिक तनाव की आशंका बनी रहेगी।
RashtraPress
18 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

महामंडलेश्वर करौली शंकर महादेव ने कांवड़ यात्रा में भोजन पारदर्शिता पर क्या कहा?
नया उदासीन अखाड़े के महामंडलेश्वर करौली शंकर महादेव ने 18 जुलाई को हरिद्वार में कहा कि कांवड़ यात्रा के दौरान भोजनालयों पर पहचान-बोर्ड लगाना अनिवार्य होना चाहिए और नियम तोड़ने वालों पर कठोर कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए। उनके अनुसार प्रत्येक श्रद्धालु को यह जानने का अधिकार है कि उसे किस प्रकार का भोजन परोसा जा रहा है।
कांवड़ यात्रा में भोजन-बोर्ड की व्यवस्था क्यों ज़रूरी मानी जा रही है?
महामंडलेश्वर के अनुसार यदि किसी प्रतिष्ठान पर बाहर एक प्रकार की पहचान दिखाई जाए और भीतर अलग प्रकार का भोजन तैयार किया जाए, तो श्रद्धालुओं की धार्मिक आस्था को ठेस पहुँच सकती है। इसीलिए उत्तर प्रदेश सहित कई राज्यों ने भोजनालयों पर पहचान-बोर्ड लगाने की व्यवस्था लागू की है।
कांवड़ यात्रा में असामाजिक तत्वों पर क्या कार्रवाई की माँग की गई है?
महामंडलेश्वर करौली शंकर महादेव ने माँग की है कि नशे में हंगामा करने या मेले का वातावरण बिगाड़ने की कोशिश करने वाले व्यक्तियों के विरुद्ध तत्काल और कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि प्रशासन पहले से सतर्क है और सुरक्षा समीक्षा बैठकें जारी हैं।
श्रद्धालुओं को कांवड़ यात्रा के दौरान भोजन को लेकर क्या सावधानी बरतनी चाहिए?
महामंडलेश्वर ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि भोजन ग्रहण करने से पहले पूरी जानकारी लें, देखें और समझें। उनके अनुसार व्यक्तिगत सजगता ही अनावश्यक विवादों और भ्रम से बचने का सबसे प्रभावी उपाय है।
कांवड़ यात्रा 2025 में प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था कैसी है?
महामंडलेश्वर करौली शंकर महादेव के अनुसार प्रशासन कांवड़ यात्रा के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सतर्क है और लगातार बैठकें कर स्थिति की समीक्षा कर रहा है। उन्होंने प्रशासन से आग्रह किया कि विघटनकारी तत्वों के विरुद्ध कार्रवाई में कोई ढिलाई न बरती जाए।
राष्ट्र प्रेस
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