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क्या मिजोरम में नई रेल लाइन के उद्घाटन के बाद सैरांग रेलवे स्टेशन से 22,500 से अधिक आईएलपी जारी हुए?

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क्या मिजोरम में नई रेल लाइन के उद्घाटन के बाद सैरांग रेलवे स्टेशन से 22,500 से अधिक आईएलपी जारी हुए?

सारांश

मिजोरम में नई रेल लाइन के उद्घाटन ने सैरांग रेलवे स्टेशन से 22,500 से अधिक इनर लाइन परमिट (आईएलपी) जारी करने का मार्ग प्रशस्त किया है। जानिए इस महत्वपूर्ण घटना का क्या अर्थ है पर्यटकों के लिए।

मुख्य बातें

22,500 से अधिक आईएलपी जारी किए गए हैं।
मिजोरम के लिए नई रेल लाइन महत्वपूर्ण है।
आईएलपी सुरक्षा और पहचान की रक्षा करता है।
आईएलपी प्रणाली 1873 से लागू है।
पर्यटक संख्या में वृद्धि हो रही है।

आइजोल, 9 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा नई बैराबी-सैरांग रेल लाइन का उद्घाटन किए जाने के बाद, मिजोरम सरकार के सैरांग रेलवे स्टेशन कार्यालय से अब तक 22,500 से अधिक इनर लाइन परमिट (आईएलपी) जारी किए जा चुके हैं। यह जानकारी शुक्रवार को अधिकारियों ने साझा की।

आईएलपी एक आधिकारिक यात्रा दस्तावेज है, जिसे भारतीय नागरिकों और गैर-स्थानीय व्यक्तियों को पूर्वोत्तर के संरक्षित क्षेत्रों, जिनमें मिजोरम भी शामिल है, में प्रवेश के लिए प्रदान किया जाता है।

मिजोरम गृह विभाग के एक अधिकारी के अनुसार, 13 सितंबर 2025 से 8 जनवरी 2026 के बीच, सैरांग रेलवे स्टेशन के आधिकारिक काउंटर से पर्यटकों, पेशेवरों, व्यापारियों, प्रवासी श्रमिकों एवं अन्य आगंतुकों को 22,500 से अधिक आईएलपी जारी किए गए हैं।

प्रधानमंत्री द्वारा 13 सितंबर को 51.38 किलोमीटर लंबी बैराबी (दक्षिणी असम के निकट)–सैरांग (आइजोल के समीप) रेल खंड का उद्घाटन किया गया था, जिसके बाद गृह विभाग ने सैरांग रेलवे स्टेशन पर आईएलपी काउंटर की स्थापना की।

इसी दिन, प्रधानमंत्री ने आइजोल को नई दिल्ली से जोड़ने वाली राजधानी एक्सप्रेस को भी हरी झंडी दिखाई थी। इसके अतिरिक्त, आइजोल को कोलकाता और गुवाहाटी से जोड़ने वाली दो अन्य ट्रेनों का भी शुभारंभ किया गया था। अधिकारियों के अनुसार, प्रतिदिन औसतन लगभग 400 नए आईएलपी जारी किए जा रहे हैं, क्योंकि सैरांग रेलवे स्टेशन पर रोजाना आमतौर पर दो यात्री ट्रेनें पहुंचती हैं।

अधिकांश आगंतुक दिल्ली, पश्चिम बंगाल और दक्षिणी राज्यों से आ रहे हैं, जबकि सबसे बड़ी संख्या पड़ोसी असम और अन्य पूर्वोत्तर राज्यों से आने वालों की है।

हालांकि, अधिकारियों ने यह भी बताया कि सरकारी रेलवे पुलिस (जीआरपी) और आईएलपी काउंटर पर कर्मचारियों की कमी के कारण कानून-व्यवस्था बनाए रखने, आईएलपी जारी करने और परमिट सत्यापन में गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।

आईएलपी प्रणाली का उद्देश्य स्थानीय और आदिवासी लोगों की पहचान और अस्तित्व की सुरक्षा करना है। वर्तमान में यह व्यवस्था मिजोरम, अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड और मणिपुर में लागू है। कई संगठनों द्वारा मेघालय और त्रिपुरा में भी आईएलपी लागू करने की मांग की जा रही है।

आईएलपी व्यवस्था बंगाल ईस्टर्न फ्रंटियर रेगुलेशन, 1873 के तहत संचालित होती है, जिसे 1875 में ब्रिटिश सरकार ने अधिसूचित किया था। इसके तहत भारतीय नागरिकों को सीमित अवधि और विशेष उद्देश्य के लिए आईएलपी लागू राज्यों में प्रवेश की अनुमति दी जाती है।

मिजोरम की यात्रा के लिए आईएलपी आइजोल के लेंगपुई हवाई अड्डे के अलावा शिलांग, गुवाहाटी, सिलचर, कोलकाता और नई दिल्ली स्थित मिजोरम सरकार के काउंटरों से भी प्राप्त किए जा सकते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि क्षेत्रीय विकास और पर्यटन में भी वृद्धि करने की संभावनाएं प्रस्तुत की हैं। यह मिजोरम की सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित करने के लिए एक कदम है।
RashtraPress
21 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सैरांग रेलवे स्टेशन से आईएलपी कैसे प्राप्त करें?
आईएलपी सैरांग रेलवे स्टेशन के आधिकारिक काउंटर से प्राप्त किया जा सकता है।
कितने आईएलपी जारी किए गए हैं?
अब तक सैरांग रेलवे स्टेशन से 22,500 से अधिक आईएलपी जारी किए जा चुके हैं।
आईएलपी का उद्देश्य क्या है?
आईएलपी का उद्देश्य स्थानीय और आदिवासी लोगों की पहचान और अस्तित्व की सुरक्षा करना है।
आईएलपी प्रणाली कब से लागू है?
आईएलपी प्रणाली बंगाल ईस्टर्न फ्रंटियर रेगुलेशन , 1873 के तहत संचालित होती है।
राष्ट्र प्रेस
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