18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में PM मोदी और मिस्र के राष्ट्रपति सिसी की द्विपक्षीय बैठक
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 13 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में आयोजित 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की बैठकों से इतर मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल सिसी के साथ द्विपक्षीय वार्ता की। यह बैठक भारत मिस्र संबंधों के लिए एक महत्वपूर्ण पड़ाव है, जो 18 अगस्त 1947 को राजदूत स्तर पर राजनयिक संबंधों की स्थापना से आरंभ हुए थे।
मुख्य घटनाक्रम
रविवार की शुरुआत राष्ट्रपति अल सिसी और प्रधानमंत्री मोदी ने ब्रिक्स सदस्य देशों, सहयोगी राष्ट्रों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रमुखों के साथ एक 'फैमिली फोटो' से हुई। इसके बाद भारत मंडपम में शिखर सम्मेलन के दूसरे दिन पहुँचने पर प्रधानमंत्री मोदी ने ब्रिक्स विस्तार के बाद शामिल हुए नए सदस्य देशों के नेताओं का स्वागत किया।
राष्ट्रपति अल सिसी 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए शुक्रवार को नई दिल्ली पहुँचे थे। शनिवार शाम भारत मंडपम में प्रधानमंत्री मोदी द्वारा आयोजित राजकीय भोज में वे और कई अन्य राष्ट्राध्यक्षों ने भाग लिया।
नई दिल्ली घोषणापत्र
शनिवार को 11 ब्रिक्स सदस्य देशों के नेताओं ने सर्वसम्मति से 'नई दिल्ली घोषणापत्र' अपनाया। इस घोषणापत्र में भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता की सराहना करते हुए कहा गया कि भारत ने अंतरराष्ट्रीय सहयोग और एकजुटता को मजबूत करने के लिए "नई गति" प्रदान की है।
घोषणापत्र में आपसी सम्मान, संप्रभु समानता, एकजुटता, लोकतंत्र, खुलेपन, समावेशिता, सहयोग और आम सहमति की ब्रिक्स भावना के प्रति सभी सदस्य देशों की प्रतिबद्धता दोहराई गई। इस बार भारत की अध्यक्षता की थीम "लचीलेपन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता के लिए निर्माण" रही, जो प्रधानमंत्री मोदी के जन केंद्रित दृष्टिकोण को दर्शाती है।
ब्रिक्स में मिस्र की भूमिका
गौरतलब है कि जनवरी 2024 में मिस्र, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात के साथ ब्रिक्स का पूर्ण सदस्य बना था। यह विस्तार ब्रिक्स समूह के वैश्विक प्रभाव को बढ़ाने की दिशा में एक निर्णायक कदम था।
वर्तमान में ब्रिक्स में ब्राजील, चीन, मिस्र, इथियोपिया, भारत, इंडोनेशिया, ईरान, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका और संयुक्त अरब अमीरात — कुल 11 सदस्य देश शामिल हैं। इसके अतिरिक्त बेलारूस, क्यूबा, बोलीविया, कजाकिस्तान, मलेशिया, नाइजीरिया, थाईलैंड, युगांडा, उज्बेकिस्तान और वियतनाम सहयोगी देश हैं।
भारत मिस्र संबंधों का संदर्भ
यह ऐसे समय में आया है जब भारत और मिस्र के बीच राजनयिक और आर्थिक संबंध तेज़ी से प्रगाढ़ हो रहे हैं। दोनों देशों के बीच संबंधों की नींव लगभग आठ दशक पुरानी है — 18 अगस्त 1947 को, भारत की स्वतंत्रता के मात्र तीन दिन बाद, राजदूत स्तर पर राजनयिक संबंध स्थापित हुए थे।
ब्रिक्स जैसे बहुपक्षीय मंच पर दोनों नेताओं की यह द्विपक्षीय बैठक संकेत देती है कि भविष्य में व्यापार, ऊर्जा और क्षेत्रीय सुरक्षा पर सहयोग और गहरा हो सकता है।
आगे की राह
18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का समापन भारत की अध्यक्षता में अपनाए गए नई दिल्ली घोषणापत्र के साथ हुआ, जो वैश्विक दक्षिण की आवाज़ को बहुपक्षीय मंचों पर और प्रभावी बनाने की प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है। प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति अल सिसी के बीच हुई द्विपक्षीय वार्ता के नतीजे आने वाले महीनों में दोनों देशों के संबंधों को नई दिशा दे सकते हैं।