क्या बलूचिस्तान एक बड़ी जेल और बड़ी मौत की कोठरी में बदल गया है?

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क्या बलूचिस्तान एक बड़ी जेल और बड़ी मौत की कोठरी में बदल गया है?

सारांश

मानवाधिकार संगठन बलूच यकजेहती कमेटी ने 2025 में बलूचिस्तान में मानवाधिकारों की स्थिति को लेकर गंभीर चिंताएं जताई हैं। 1200 से अधिक लोग लापता और 200 से अधिक एक्स्ट्रा ज्यूडिशियल हत्याएं हुईं। जानिए इस गंभीर स्थिति के बारे में और जानकारी।

Key Takeaways

  • 2025 में 1200+ लोग जबरन गायब हुए।
  • 200+ एक्स्ट्रा ज्यूडिशियल हत्याएं हुईं।
  • लापता लोगों में 75 नाबालिग और 18 महिलाएं शामिल हैं।
  • केच जिले में सबसे अधिक मामले सामने आए।
  • सरकारी कार्रवाई से प्रदर्शनकारियों को नुकसान हुआ।

क्वेटा, 26 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। मानवाधिकार संगठन बलूच यकजेहती कमेटी (बीवाईसी) ने जानकारी दी है कि 2025 में 1,200 से अधिक व्यक्तियों को जबरन गायब किया गया और लगभग 200 अतिरिक्त न्यायेतर हत्याएं दर्ज की गईं। स्थानीय मीडिया ने सोमवार को यह रिपोर्ट जारी की। इससे पहले भी कई मानवाधिकार संगठनों ने बलूचिस्तान की स्थिति पर चिंता जताई है।

बलूचिस्तान पोस्ट के अनुसार, बीवाईसी के प्रतिनिधियों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि 2025 में जबरन गायब होने और अतिरिक्त न्यायेतर हत्या के मामलों की संख्या केवल कुछ आंकड़े हैं। फिर भी, ये आंकड़े यह दर्शाते हैं कि बलूचिस्तान में मानवाधिकार की स्थिति तेजी से deteriorate हो रही है।

रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में 1,223 मामले जबरन गायब होने के दर्ज किए गए। इनमें से 348 लोगों को छोड़ दिया गया है, जबकि 832 अब भी लापता हैं। लापता लोगों में 75 नाबालिग और 18 महिलाएं शामिल हैं।

सबसे अधिक मामले केच जिले में 339 दर्ज किए गए। बीवाईसी ने आरोप लगाया है कि 2025 में 188 अतिरिक्त न्यायेतर हत्या के मामले प्रकाश में आए, जबकि 75 व्यक्तियों को राज्य की लंबे समय से चल रही किल एंड डंप नीति के अंतर्गत मार दिया गया। इसमें मकरान डिवीजन और अवारन जिले सबसे अधिक प्रभावित रहे।

रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है कि 2025 में बलूचिस्तान में कई मिलिट्री ऑपरेशन हुए, जिसमें खुजदार के जेहरी में किए गए हवाई हमलों में 200 लोगों की मौत की बात कही गई।

द बलूचिस्तान पोस्ट ने बीवाईसी के हवाले से यह भी बताया कि 2025 में लोगों के जबरन गायब करने के खिलाफ 122 से ज्यादा शांतिपूर्ण प्रदर्शन हुए। मानवाधिकार संगठन ने आरोप लगाया कि कानून लागू करने वाले व्यक्तियों ने कम से कम 39 प्रदर्शनकारियों को बलात तितर-बितर कर दिया, जबकि 400 से अधिक प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार किया गया और कई अन्य घायल हुए।

इसने यह भी कहा कि बलूचिस्तान में कानूनी प्रणाली का उपयोग मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और नागरिक समाज के खिलाफ एक हथियार के रूप में किया जा रहा है। केंद्रीय आयोजक महंरंग बलूच समेत बीवाईसी के पांच नेताओं को जेल में रखा गया है, जबकि अन्य कार्यकर्ताओं को परेशान किया जा रहा है।

पिछले सप्ताह, एक प्रमुख मानवाधिकार संगठन ने प्रांत में आम नागरिकों के खिलाफ बढ़ती हिंसा के बीच बलूचिस्तान में पाकिस्तानी सेना द्वारा एक नाबालिग को कथित तौर पर जबरन गायब करने की निंदा की।

पांक बलूच नेशनल मूवमेंट के मानवाधिकार विभाग ने बताया कि 13 जनवरी की रात को पाकिस्तानी सेना की एक बड़ी टुकड़ी ने प्रांत के केच जिले के बुलेदा तहसील में लाल जान के घर पर छापा मारा और उनके नाबालिग बेटे, तालिब हुसैन को जबरन हिरासत में ले लिया।

Point of View

यह स्पष्ट है कि बलूचिस्तान में मानवाधिकारों का उल्लंघन एक गंभीर मुद्दा है। सभी को यह जानने की आवश्यकता है कि इस क्षेत्र में मानवाधिकारों की स्थिति चिंताजनक है, और हमें इसके समाधान के लिए कदम उठाने की आवश्यकता है।
NationPress
07/02/2026

Frequently Asked Questions

बलूचिस्तान में मानवाधिकारों की स्थिति क्या है?
बलूचिस्तान में मानवाधिकारों की स्थिति बहुत गंभीर है, जहां 2025 में 1200 से अधिक लोग जबरन गायब हुए और 200 से ज्यादा एक्स्ट्रा ज्यूडिशियल हत्याएं हुईं।
बीवाईसी क्या है?
बीवाईसी का अर्थ है बलूच यकजेहती कमेटी, जो मानवाधिकारों के उल्लंघन के खिलाफ कार्यरत है।
क्या बलूचिस्तान में प्रदर्शन हो रहे हैं?
हां, 2025 में बलूचिस्तान में जबरन गायब होने के खिलाफ 122 से अधिक शांतिपूर्ण प्रदर्शन हुए हैं।
क्या सरकारी कार्रवाई से प्रदर्शनकारियों को नुकसान हुआ है?
जी हां, कई प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार किया गया और कई अन्य घायल हुए हैं।
इस मुद्दे का समाधान कैसे किया जा सकता है?
इस मुद्दे का समाधान अंतर्राष्ट्रीय दबाव और मानवाधिकार संगठनों की सक्रियता से किया जा सकता है।
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