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क्या पाकिस्तानी महिला मोर्चा ने गायब हुए बलूचों की सुरक्षित वापसी के लिए आवाज उठाई?

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क्या पाकिस्तानी महिला मोर्चा ने गायब हुए बलूचों की सुरक्षित वापसी के लिए आवाज उठाई?

सारांश

इस्लामाबाद से एक शक्तिशाली आवाज उठी है, जिसमें बलूचिस्तान की महिलाओं की मांगों का समर्थन किया गया है। यह महिला मंच बलूचों की जबरन गायब होने के मामलों का विरोध कर रहा है और उनकी सुरक्षित वापसी की मांग कर रहा है। जानिए इस मुद्दे का महत्व क्या है।

मुख्य बातें

महिला मंच ने बलूचों की सुरक्षित वापसी की मांग की है।
जबरन गायब लोगों के मामलों में न्याय की आवश्यकता है।
बलूचिस्तान में महिलाओं के अधिकार ों की सुरक्षा महत्वपूर्ण है।
सामूहिक सजा की नीति की निंदा की गई है।
मानवाधिकार संगठनों का समर्थन जरूरी है।

इस्लामाबाद, 31 दिसंबर (राष्ट्र प्रेस)। पाकिस्तान में स्थित एक महिला मंच ने बलूचिस्तान की महिलाओं की उचित मांगों का समर्थन करते हुए उनके हक में आवाज उठाई है। इस महिला संगठन ने जबरन गायब किए गए बलूचों की सुरक्षित वापसी की मांग की है।

मंगलवार को जारी एक बयान में ख्वातीन महाज-ए-अमल (वीमेन एक्शन फोरम - डब्ल्यूएएफ) ने सभी बलूच नागरिकों (विशेषकर महिलाओं सहित) की सम्मानजनक और सुरक्षित वापसी की मांग उठाई, जिन्हें पाकिस्तान के अधिकारियों ने 'मनमाने ढंग' से गिरफ्तार कर रखा है। बयान में कहा गया है कि इन्हें या तो "बिना ट्रायल" के जेल में डाला जा रहा है या फिर "गलत, गैर-पारदर्शी ट्रायल" प्रक्रिया से काम लिया जा रहा है।

विमेंस फोरम के बयान में कहा गया, "डब्ल्यूएएफ बलूच एक्टिविस्ट्स का सम्मान करता है और उनसे हमदर्दी रखता है, जिन्होंने क्वेटा से कराची और लाहौर होते हुए इस्लामाबाद तक लंबा मार्च किया। क्वेटा और इस्लामाबाद में युवा और बुजुर्ग महिलाओं, बच्चों, और पुरुषों के बड़े समूह ने महीनों तक शांतिपूर्ण, अहिंसक धरने दिए। इन लोगों ने कड़ाके की ठंड, गर्मी, मानसून की बारिश और सरकारी हिंसा के बीच भी अपने विश्वास को डिगने नहीं दिया बल्कि भरपूर हिम्मत दिखाई। डब्ल्यूएएफ उन संगठन के कार्यकर्ताओं का व्यावहारिक और नैतिक दोनों तरह से पूरा साथ देता रहेगा।"

फोरम, जो पाकिस्तान में महिलाओं के अधिकारों के लिए जानी जाती है, ने राज्य की ओर से लागू "सामूहिक सजा" की नीति की कड़ी निंदा की, जिसमें गायब किए गए लोगों के परिवारों को निशाना बनाया जा रहा है।

जबरन गायब किए गए लोगों पर काम करने वाली अन्य मानवाधिकार संगठनों, जिनमें वॉयस फॉर बलूच मिसिंग पर्सन्स, बलूच यकजेहती कमेटी (बीवाईसी), डिफेंस ऑफ ह्यूमन राइट्स (डीएचआरओ), ह्यूमन राइट्स कमीशन ऑफ पाकिस्तान और अन्य संस्थाएं शामिल हैं, की मांग दोहराई। मांग की गई कि जबरन गायब किए गए सभी लोगों को तुरंत अदालत के सामने पेश किया जाए, उन्हें उचित मुकदमा और न्याय मिले, और पाकिस्तान की संसद को रिपोर्ट करने वाली एक स्वायत्त राज्य आयोग का गठन किया जाए।

अपना संकल्प दोहराते हुए, फोरम ने कहा कि वह पाकिस्तान के दमन का विरोध कर रही बहादुर बलूच महिला कार्यकर्ताओं की मांगों के समर्थन में अपनी आवाज उठाता रहेगा।

फोरम ने जबरन गायब किए गए लोगों के सभी पीड़ितों को उनके प्रियजनों के पास वापस भेजने तक बलूच महिलाओं और पुरुषों के साथ खड़े रहने का प्रण दोहराया।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो न केवल बलूच नागरिकों के लिए, बल्कि पूरे देश के लिए चिंता का विषय है। हमें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि सभी नागरिकों को उनके अधिकारों का सम्मान मिले।
RashtraPress
15 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या बलूचों की वापसी की मांग में कोई प्रगति हुई है?
अभी तक कोई ठोस प्रगति नहीं हुई है, लेकिन महिला मंच और मानवाधिकार संगठन लगातार इस मुद्दे को उठाते रहे हैं।
क्या पाकिस्तान सरकार इस मुद्दे पर कुछ कर रही है?
सरकार ने अभी तक इस मामले में कोई स्पष्ट कदम नहीं उठाया है, जिससे मानवाधिकार संगठनों में चिंता बढ़ रही है।
राष्ट्र प्रेस
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