भारत-बांग्लादेश संबंध: उच्चायुक्त दिनेश त्रिवेदी ने PM तारिक रहमान से की पहली मुलाकात, BRICS निमंत्रण भी दिया
सारांश
मुख्य बातें
भारत के उच्चायुक्त दिनेश त्रिवेदी ने सोमवार, 10 अगस्त 2026 को बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान से पहली बार औपचारिक मुलाकात की। ढाका में हुई इस बैठक में द्विपक्षीय संबंधों को नई दिशा देने और आपसी हितों से जुड़े अहम मुद्दों पर विचार-विमर्श किया गया।
मुलाकात में क्या हुआ
उच्चायुक्त त्रिवेदी ने प्रधानमंत्री तारिक रहमान को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से शुभकामनाएं पहुँचाईं। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत, बांग्लादेश की सरकार और वहाँ की जनता के साथ 'सकारात्मक, रचनात्मक और भविष्योन्मुखी' साझेदारी चाहता है। दोनों पक्षों ने आपसी हित के विभिन्न विषयों पर विचारों का आदान-प्रदान किया और द्विपक्षीय सहयोग को और प्रगाढ़ बनाने के संभावित रास्तों पर चर्चा की।
पीपल-सेंट्रिक अप्रोच पर जोर
बातचीत में 'लोग-केंद्रित दृष्टिकोण' (पीपल-सेंट्रिक अप्रोच) को विशेष महत्व दिया गया। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि दोनों देशों के बीच सहयोग का ठोस लाभ आम नागरिकों तक सीधे पहुँचे, न कि केवल नीतिगत दस्तावेज़ों तक सीमित रहे।
BRICS शिखर सम्मेलन का निमंत्रण
भारत ने प्रधानमंत्री तारिक रहमान को 12-13 सितंबर को नई दिल्ली में आयोजित होने वाले 18वें BRICS शिखर सम्मेलन में भाग लेने का निमंत्रण दिया है। यह निमंत्रण उन्हें बिम्सटेक (बे ऑफ बंगाल इनिशिएटिव फॉर मल्टी-सेक्टोरल टेक्निकल एंड इकोनॉमिक कोऑपरेशन) के वर्तमान अध्यक्ष के रूप में दिया गया है। उल्लेखनीय है कि बिम्सटेक बंगाल की खाड़ी से जुड़े सात देशों का एक क्षेत्रीय मंच है — दक्षिण एशिया से बांग्लादेश, भूटान, भारत, नेपाल और श्रीलंका, तथा दक्षिण-पूर्व एशिया से म्यांमार और थाईलैंड।
निमंत्रण की पृष्ठभूमि
विदेश मंत्रालय (MEA) के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने नई दिल्ली में नियमित प्रेस ब्रीफिंग में बताया था कि फरवरी 2026 में प्रधानमंत्री पद संभालते ही तारिक रहमान को भारत आने का औपचारिक निमंत्रण भेज दिया गया था। यह तथ्य इस बात का संकेत है कि भारत ने बांग्लादेश की नई सरकार के साथ शीघ्र संवाद स्थापित करने को प्राथमिकता दी।
आगे क्या
BRICS शिखर सम्मेलन में तारिक रहमान की संभावित उपस्थिति दोनों देशों के बीच उच्च-स्तरीय कूटनीतिक संपर्क का पहला बड़ा अवसर होगी। यह बैठक दक्षिण एशिया में भारत की 'नेबरहुड फर्स्ट' नीति की दिशा को भी परखने का मौका देगी।