डिजिटल भुगतान की आंधी में भी नकदी अडिग: RBI डिप्टी गवर्नर ने बताया, चलन में 176 अरब नोट
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के डिप्टी गवर्नर शिरीष चंद्र मुर्मु ने 13 अगस्त 2026 को जकार्ता में बैंक इंडोनेशिया द्वारा आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम में स्पष्ट किया कि पिछले एक दशक में डिजिटल भुगतान में जबरदस्त उछाल के बावजूद भारत में चलन में नकदी की मात्रा घटी नहीं, बल्कि वह दोहरे अंकों की दर से बढ़ती रही है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों, कम आय वर्ग, बुजुर्ग आबादी और छोटे कारोबारों में नकदी की निर्भरता आज भी बनी हुई है।
मुख्य घटनाक्रम
मुर्मु ने जकार्ता में अपने संबोधन में कहा, "डिजिटल भुगतान के बढ़ते चलन के कारण व्यक्तिगत लेनदेन में नकदी की हिस्सेदारी घटने के बावजूद, चलन में मुद्रा दोहरे अंकों की दर से बढ़ रही है।" उन्होंने स्वीकार किया कि इस विरोधाभासी स्थिति के कारण भविष्य की माँग का अनुमान लगाना जटिल हो गया है, जिससे उत्पादन और वितरण क्षमता की योजना बनाना और कठिन हो जाता है।
वर्तमान में भारत में 176 अरब बैंक नोट चलन में हैं। तुलनात्मक रूप से, पिछले वर्ष के अंत में लगभग 56 अरब अमेरिकी डॉलर के नोट और 30 अरब यूरो के बैंक नोट वैश्विक स्तर पर चलन में थे।
उत्पादन और वितरण का पैमाना
डिप्टी गवर्नर ने बताया कि RBI पिछले कुछ वर्षों में छह मूल्यवर्गों में प्रतिवर्ष 28 से 30 अरब बैंक नोट का उत्पादन करता है और लगभग 21 अरब नोट हर साल चलन से हटाए जाते हैं। मुर्मु ने यह भी रेखांकित किया कि भारत में कम मूल्यवर्ग के नोटों की अधिक हिस्सेदारी होने के कारण समान मूल्य के लेनदेन में अधिक नोट हाथ बदलते हैं, जिससे लॉजिस्टिक्स का बोझ और बढ़ता है।
नकदी पर भरोसा बनाए रखना क्यों ज़रूरी
मुर्मु ने ज़ोर देकर कहा, "भारतीय अर्थव्यवस्था में नकदी भुगतान का एक महत्वपूर्ण माध्यम बनी हुई है और साफ-सुथरे नोटों, सुरक्षित लॉजिस्टिक्स और ऐसे मुद्रा तंत्र के ज़रिए नकदी में लोगों का भरोसा बनाए रखना, जिस पर वे निर्भर कर सकें, मौद्रिक संप्रभुता को बनाए रखने के लिए भी महत्वपूर्ण है।" उन्होंने कहा कि यह लक्ष्य सभी देशों के केंद्रीय बैंक साझा करते हैं, चाहे उनकी अर्थव्यवस्थाएँ नकदी और डिजिटल भुगतान के किसी भी अनुपात में चल रही हों।
टिकाऊपन और पर्यावरण पर ध्यान
मुद्रा की दीर्घायु सुनिश्चित करने के लिए RBI बैंक नोटों की उम्र बढ़ाने के विकल्पों पर विचार कर रहा है। इनमें नोट के आधार पर सतही कोटिंग और कम मूल्यवर्ग के लिए पॉलिमर नोट शामिल हैं। इसके अलावा, नकदी चक्र के कार्बन फुटप्रिंट को कम करने की दिशा में भी काम जारी है। मुर्मु ने बताया कि इसके तहत वितरण नेटवर्क को अधिक दक्ष बनाना और बैंक नोटों के ब्रिकेट्स के निपटान में वैल्यू चेन को आगे बढ़ाना शामिल है।
आगे की राह
यह ऐसे समय में आया है जब भारत में UPI लेनदेन रिकॉर्ड ऊँचाई पर हैं, फिर भी नकदी की माँग का बना रहना नीति-निर्माताओं के लिए एक दीर्घकालिक चुनौती बनी हुई है। RBI की यह स्वीकारोक्ति बताती है कि डिजिटल और नकद — दोनों अर्थव्यवस्थाएँ समानांतर चल रही हैं और निकट भविष्य में नकदी का स्थान सुरक्षित है।