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भारत के भुगतान क्षेत्र में 2021 से ₹48,000 करोड़ से अधिक निवेश, UPI बना विकास का इंजन

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भारत के भुगतान क्षेत्र में 2021 से ₹48,000 करोड़ से अधिक निवेश, UPI बना विकास का इंजन

सारांश

2021 से भारत के भुगतान क्षेत्र में 5.8 अरब डॉलर का निवेश और 371 फंडिंग राउंड — UPI ने न सिर्फ घरेलू डिजिटल भुगतान को बदला, बल्कि एक दर्जन से अधिक देशों में अपनी पहुँच बनाई। सीमा-पार लेनदेन एक साल में 20 गुना उछले।

मुख्य बातें

भारत के भुगतान क्षेत्र में जनवरी 2021 से अब तक 371 इक्विटी फंडिंग राउंड के ज़रिए करीब 5.8 अरब डॉलर का निवेश हुआ।
कुल फंडिंग का 53% (लगभग 3.1 अरब डॉलर) उपभोक्ता-केंद्रित भुगतान प्लेटफॉर्म को मिला।
कारोबारी भुगतान कंपनियों को 38% और इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनियों को 9% (करीब 52.6 करोड़ डॉलर) फंडिंग मिली।
2021 से अब तक क्षेत्र में 8 IPO और 25 अधिग्रहण हुए हैं।
सीमा-पार UPI लेनदेन वित्त वर्ष 2024 के ~37,000 से बढ़कर वित्त वर्ष 2025 में 7.5 लाख से अधिक हो गए — 20 गुना से अधिक वृद्धि।
UPI अब एक दर्जन से अधिक देशों में संचालित है; NPCI International इसके वैश्विक विस्तार का नेतृत्व कर रही है।

भारत के डिजिटल भुगतान क्षेत्र ने जनवरी 2021 से अब तक 371 घोषित इक्विटी फंडिंग राउंड के माध्यम से करीब 5.8 अरब डॉलर (लगभग ₹48,000 करोड़) का निवेश आकर्षित किया है। मार्केट इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म ट्रैकसन की ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार, यह निवेश प्रवाह यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) के उस परिवर्तनकारी प्रभाव का प्रमाण है, जिसने भारत को डिजिटल भुगतान में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में निर्णायक भूमिका निभाई है। यह रिपोर्ट 13 अगस्त 2026 को जारी की गई।

निवेश का वितरण: कहाँ गया सबसे अधिक पैसा

रिपोर्ट के अनुसार, कुल फंडिंग का सबसे बड़ा हिस्सा — करीब 53 प्रतिशत यानी लगभग 3.1 अरब डॉलर — उपभोक्ता-केंद्रित भुगतान प्लेटफॉर्म को मिला। इनमें वे ऐप शामिल हैं जो सीधे आम उपयोगकर्ताओं को डिजिटल लेनदेन की सुविधा देते हैं।

कारोबारी भुगतान कंपनियों को कुल फंडिंग का करीब 38 प्रतिशत हिस्सा मिला, जो व्यापारियों और उद्यमों के लिए भुगतान समाधान उपलब्ध कराती हैं। वहीं, भुगतान इंफ्रास्ट्रक्चर और API-आधारित सेवाओं से जुड़ी कंपनियों को शेष 9 प्रतिशत यानी लगभग 52.6 करोड़ डॉलर प्राप्त हुए।

फंडिंग का उतार-चढ़ाव: 2021 का शिखर और उसके बाद की मंदी

रिपोर्ट में बताया गया है कि 2021 में वैश्विक तकनीकी निवेश में तेजी के दौर के बीच इस क्षेत्र में फंडिंग गतिविधियाँ अपने चरम पर पहुँच गई थीं। इसके बाद 2022 से 2024 के बीच व्यापक फंडिंग मंदी के कारण निवेश की रफ्तार धीमी हुई — एक वैश्विक रुझान जो भारतीय फिनटेक क्षेत्र को भी प्रभावित कर गया।

गौरतलब है कि इस अवधि में क्षेत्र में एकीकरण की प्रक्रिया भी शुरू हुई। रिपोर्ट के अनुसार, 2021 से अब तक आठ आईपीओ (IPO) और 25 अधिग्रहण हो चुके हैं, जो दर्शाता है कि कुछ अच्छी तरह से फंडिंग प्राप्त कंपनियों के इर्द-गिर्द बाज़ार का समेकन तेज़ हो रहा है।

UPI का वैश्विक विस्तार: 20 गुना उछाल

रिपोर्ट में UPI के बढ़ते अंतरराष्ट्रीय प्रसार को एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में रेखांकित किया गया है। सीमा-पार UPI लेनदेन वित्त वर्ष 2024 में करीब 37,000 से 20 गुना से अधिक बढ़कर वित्त वर्ष 2025 में 7.5 लाख से अधिक हो गए।

यह ऐसे समय में आया है जब एनपीसीआई इंटरनेशनल (NPCI International) ने कई मॉडलों के ज़रिए UPI का वैश्विक विस्तार किया है — जिनमें मौजूदा भुगतान प्रणालियों को जोड़ना, साझेदार देशों के लिए भुगतान नेटवर्क तैयार करना और तकनीकी मानकों को साझा करना शामिल है। अब यह भुगतान नेटवर्क एक दर्जन से अधिक देशों में संचालित हो रहा है।

क्षेत्र की परिपक्वता और भविष्य की दिशा

ट्रैकसन की रिपोर्ट में यह भी रेखांकित किया गया है कि भारत का भुगतान क्षेत्र अब परिपक्वता के एक नए चरण में प्रवेश कर रहा है। कंपनियाँ अब केवल विस्तार पर नहीं, बल्कि निकासी के अवसर पैदा करने और पूंजी को पुनर्निवेशित करने पर भी ध्यान केंद्रित कर रही हैं।

सार्वजनिक डिजिटल बुनियादी ढाँचे — विशेषकर UPI — ने एक मज़बूत निजी क्षेत्र के इकोसिस्टम को पोषित किया है, जिसमें उपभोक्ता भुगतान ऐप, कारोबारी भुगतान प्लेटफॉर्म और फिनटेक इंफ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध कराने वाली कंपनियाँ शामिल हैं। आने वाले वर्षों में UPI के वैश्विक विस्तार और घरेलू बाज़ार में समेकन की प्रवृत्ति इस क्षेत्र की दिशा तय करेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कहानी इसके वितरण में है — 53% फंडिंग उपभोक्ता ऐप में गई, जबकि इंफ्रास्ट्रक्चर को मात्र 9% मिला, जो दीर्घकालिक नींव की कमज़ोरी की ओर इशारा करता है। UPI की सफलता निर्विवाद है, लेकिन 2022-24 की फंडिंग मंदी और बाज़ार समेकन यह भी बताते हैं कि 'हाइप साइकिल' का दौर बीत चुका है और अब केवल मज़बूत व्यावसायिक मॉडल वाली कंपनियाँ ही टिकेंगी। सीमा-पार लेनदेन में 20 गुना वृद्धि उत्साहजनक है, पर यह अभी भी कुल घरेलू UPI वॉल्यूम के सामने नगण्य है — वैश्विक महत्वाकांक्षा को वास्तविक पैमाने तक पहुँचने में अभी लंबा रास्ता तय करना है।
RashtraPress
13 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत के भुगतान क्षेत्र में 2021 से कितना निवेश हुआ है?
ट्रैकसन की रिपोर्ट के अनुसार, जनवरी 2021 से अब तक 371 घोषित इक्विटी फंडिंग राउंड के ज़रिए करीब 5.8 अरब डॉलर का निवेश हुआ है। इस दौरान 8 IPO और 25 अधिग्रहण भी हुए हैं।
UPI के कारण भारत के भुगतान क्षेत्र में क्या बदलाव आया?
UPI ने सार्वजनिक डिजिटल बुनियादी ढाँचे के रूप में एक मज़बूत निजी इकोसिस्टम को जन्म दिया, जिसमें उपभोक्ता ऐप, कारोबारी प्लेटफॉर्म और फिनटेक इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनियाँ शामिल हैं। सीमा-पार UPI लेनदेन वित्त वर्ष 2024 के ~37,000 से बढ़कर वित्त वर्ष 2025 में 7.5 लाख से अधिक हो गए।
भारत के भुगतान क्षेत्र में सबसे अधिक फंडिंग किसे मिली?
उपभोक्ता-केंद्रित भुगतान प्लेटफॉर्म को सबसे अधिक — कुल फंडिंग का करीब 53% यानी लगभग 3.1 अरब डॉलर — मिला। कारोबारी भुगतान कंपनियों को 38% और इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनियों को 9% फंडिंग प्राप्त हुई।
UPI अब कितने देशों में उपलब्ध है?
रिपोर्ट के अनुसार, UPI अब एक दर्जन से अधिक देशों में संचालित हो रहा है। NPCI International ने मौजूदा भुगतान प्रणालियों को जोड़ने, साझेदार देशों के लिए नेटवर्क तैयार करने और तकनीकी मानक साझा करने जैसे कई मॉडलों के ज़रिए यह विस्तार किया है।
भारत के भुगतान क्षेत्र में फंडिंग 2021 के बाद क्यों धीमी हुई?
रिपोर्ट के अनुसार, 2021 में वैश्विक तकनीकी निवेश के उफान पर फंडिंग चरम पर थी। इसके बाद 2022 से 2024 के बीच वैश्विक फंडिंग मंदी के कारण निवेश की रफ्तार धीमी हुई, जो भारतीय फिनटेक क्षेत्र तक भी पहुँची।
राष्ट्र प्रेस
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