भारत के भुगतान क्षेत्र में 2021 से ₹48,000 करोड़ से अधिक निवेश, UPI बना विकास का इंजन
सारांश
मुख्य बातें
भारत के डिजिटल भुगतान क्षेत्र ने जनवरी 2021 से अब तक 371 घोषित इक्विटी फंडिंग राउंड के माध्यम से करीब 5.8 अरब डॉलर (लगभग ₹48,000 करोड़) का निवेश आकर्षित किया है। मार्केट इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म ट्रैकसन की ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार, यह निवेश प्रवाह यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) के उस परिवर्तनकारी प्रभाव का प्रमाण है, जिसने भारत को डिजिटल भुगतान में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में निर्णायक भूमिका निभाई है। यह रिपोर्ट 13 अगस्त 2026 को जारी की गई।
निवेश का वितरण: कहाँ गया सबसे अधिक पैसा
रिपोर्ट के अनुसार, कुल फंडिंग का सबसे बड़ा हिस्सा — करीब 53 प्रतिशत यानी लगभग 3.1 अरब डॉलर — उपभोक्ता-केंद्रित भुगतान प्लेटफॉर्म को मिला। इनमें वे ऐप शामिल हैं जो सीधे आम उपयोगकर्ताओं को डिजिटल लेनदेन की सुविधा देते हैं।
कारोबारी भुगतान कंपनियों को कुल फंडिंग का करीब 38 प्रतिशत हिस्सा मिला, जो व्यापारियों और उद्यमों के लिए भुगतान समाधान उपलब्ध कराती हैं। वहीं, भुगतान इंफ्रास्ट्रक्चर और API-आधारित सेवाओं से जुड़ी कंपनियों को शेष 9 प्रतिशत यानी लगभग 52.6 करोड़ डॉलर प्राप्त हुए।
फंडिंग का उतार-चढ़ाव: 2021 का शिखर और उसके बाद की मंदी
रिपोर्ट में बताया गया है कि 2021 में वैश्विक तकनीकी निवेश में तेजी के दौर के बीच इस क्षेत्र में फंडिंग गतिविधियाँ अपने चरम पर पहुँच गई थीं। इसके बाद 2022 से 2024 के बीच व्यापक फंडिंग मंदी के कारण निवेश की रफ्तार धीमी हुई — एक वैश्विक रुझान जो भारतीय फिनटेक क्षेत्र को भी प्रभावित कर गया।
गौरतलब है कि इस अवधि में क्षेत्र में एकीकरण की प्रक्रिया भी शुरू हुई। रिपोर्ट के अनुसार, 2021 से अब तक आठ आईपीओ (IPO) और 25 अधिग्रहण हो चुके हैं, जो दर्शाता है कि कुछ अच्छी तरह से फंडिंग प्राप्त कंपनियों के इर्द-गिर्द बाज़ार का समेकन तेज़ हो रहा है।
UPI का वैश्विक विस्तार: 20 गुना उछाल
रिपोर्ट में UPI के बढ़ते अंतरराष्ट्रीय प्रसार को एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में रेखांकित किया गया है। सीमा-पार UPI लेनदेन वित्त वर्ष 2024 में करीब 37,000 से 20 गुना से अधिक बढ़कर वित्त वर्ष 2025 में 7.5 लाख से अधिक हो गए।
यह ऐसे समय में आया है जब एनपीसीआई इंटरनेशनल (NPCI International) ने कई मॉडलों के ज़रिए UPI का वैश्विक विस्तार किया है — जिनमें मौजूदा भुगतान प्रणालियों को जोड़ना, साझेदार देशों के लिए भुगतान नेटवर्क तैयार करना और तकनीकी मानकों को साझा करना शामिल है। अब यह भुगतान नेटवर्क एक दर्जन से अधिक देशों में संचालित हो रहा है।
क्षेत्र की परिपक्वता और भविष्य की दिशा
ट्रैकसन की रिपोर्ट में यह भी रेखांकित किया गया है कि भारत का भुगतान क्षेत्र अब परिपक्वता के एक नए चरण में प्रवेश कर रहा है। कंपनियाँ अब केवल विस्तार पर नहीं, बल्कि निकासी के अवसर पैदा करने और पूंजी को पुनर्निवेशित करने पर भी ध्यान केंद्रित कर रही हैं।
सार्वजनिक डिजिटल बुनियादी ढाँचे — विशेषकर UPI — ने एक मज़बूत निजी क्षेत्र के इकोसिस्टम को पोषित किया है, जिसमें उपभोक्ता भुगतान ऐप, कारोबारी भुगतान प्लेटफॉर्म और फिनटेक इंफ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध कराने वाली कंपनियाँ शामिल हैं। आने वाले वर्षों में UPI के वैश्विक विस्तार और घरेलू बाज़ार में समेकन की प्रवृत्ति इस क्षेत्र की दिशा तय करेगी।