भारत के UPI ने वैश्विक रिकॉर्ड तोड़ा, हर महीने 20 अरब से अधिक ट्रांजैक्शन — BCG रिपोर्ट
सारांश
मुख्य बातें
भारत का यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) अब प्रति माह 20 अरब से अधिक ट्रांजैक्शन प्रोसेस करते हुए रियल-टाइम डिजिटल भुगतान के क्षेत्र में एक नया वैश्विक बेंचमार्क स्थापित कर चुका है। बोस्टन कंसल्टिंग ग्रुप (BCG) ने 24 सितंबर 2026 को जारी अपनी रिपोर्ट में कहा है कि UPI इस बात का उत्कृष्ट प्रमाण है कि डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (Digital Public Infrastructure) किस प्रकार वित्तीय समावेशन और बड़े पैमाने पर विस्तार — दोनों को एक साथ साध सकती है।
वैश्विक भुगतान उद्योग की दिशा
BCG की रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक भुगतान उद्योग का राजस्व वर्ष 2030 तक $2.6 ट्रिलियन तक पहुँचने का अनुमान है। हालाँकि आने वाले वर्षों में वृद्धि दर घटकर लगभग 5 प्रतिशत प्रतिवर्ष रहने का पूर्वानुमान है, जबकि पिछले पाँच वर्षों में यह 7 प्रतिशत रही थी। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि वर्तमान में 137 देशों में चौबीसों घंटे इंस्टेंट पेमेंट सिस्टम उपलब्ध हैं, जो वैश्विक भुगतान व्यवस्था को पहले से कहीं अधिक विविध और व्यापक बना रहे हैं।
UPI की सफलता का विश्लेषण
BCG के प्रबंध निदेशक और भागीदार विवेक मंधाता ने कहा कि भारत का रियल-टाइम पेमेंट इकोसिस्टम डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर की सबसे बड़ी सफलताओं में से एक है। उन्होंने कहा, 'भारत ने वित्तीय समावेशन और बड़े पैमाने पर उपयोग के बीच संतुलन स्थापित किया है, जो दुनिया के अनेक देशों के लिए अध्ययन का विषय बन सकता है।' यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर रियल-टाइम पेमेंट अपनाने की होड़ तेज़ हो रही है और भारत स्पष्ट रूप से अग्रणी भूमिका में दिख रहा है।
मंधाता के अनुसार, UPI के माध्यम से करोड़ों भारतीयों को डिजिटल भुगतान व्यवस्था से जोड़ा गया है और इसके बावजूद लेनदेन की वृद्धि दर मज़बूत बनी हुई है। गौरतलब है कि यह वृद्धि केवल शहरी उपयोगकर्ताओं तक सीमित नहीं रही, बल्कि ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में भी UPI की पैठ उल्लेखनीय रही है।
क्रेडिट और फिनटेक के नए अवसर
रिपोर्ट में रेखांकित किया गया है कि क्रेडिट कार्ड उपयोग, विशेष रूप से ऑनलाइन भुगतान में, तेज़ी से बढ़ रहा है। इससे बैंकों, फिनटेक कंपनियों और भुगतान सेवा प्रदाताओं के लिए मूल्य-वर्धित सेवाएँ विकसित करने के नए अवसर उत्पन्न हो रहे हैं। यह प्रवृत्ति भारतीय वित्तीय क्षेत्र में एक नई प्रतिस्पर्धात्मक लहर को जन्म दे रही है।
AI और एजेंटिक कॉमर्स की ओर अगला कदम
BCG की रिपोर्ट के अनुसार, भारत के डिजिटल भुगतान बाज़ार का अगला चरण आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और एजेंटिक कॉमर्स की दिशा में होगा। AI-आधारित सिस्टम भुगतान अनुभव को अधिक सहज, सुरक्षित और स्वचालित बना सकते हैं, साथ ही ट्रेड फाइनेंस और भुगतान संचालन जैसी पारंपरिक कागज़ी प्रक्रियाओं को स्वचालित करने में मदद कर सकते हैं।
रिपोर्ट में एक महत्त्वपूर्ण निष्कर्ष यह है कि सर्वेक्षण में शामिल 73 प्रतिशत बड़े व्यापारियों ने संकेत दिया कि यदि उन्हें एजेंट-आधारित लेनदेन की बेहतर सुविधा मिले, तो वे अपने भुगतान सेवा प्रदाता बदलने पर विचार कर सकते हैं। यह आँकड़ा स्पष्ट करता है कि एजेंटिक कॉमर्स भुगतान उद्योग में एक निर्णायक प्रतिस्पर्धी कारक बनता जा रहा है। आने वाले वर्षों में वह कंपनी बाज़ार में आगे रहेगी जो AI और स्वचालन को सबसे तेज़ी से अपनी भुगतान प्रणाली में एकीकृत कर पाएगी।