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क्या यूपीआई लेनदेन में 8 वित्त वर्षों में 114 प्रतिशत का उछाल देखा गया?

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क्या यूपीआई लेनदेन में 8 वित्त वर्षों में 114 प्रतिशत का उछाल देखा गया?

सारांश

यूपीआई लेनदेन में 114 प्रतिशत का उछाल, वित्त वर्ष 2024-25 तक 18,587 करोड़ का आंकड़ा पार कर गया। क्या ये आंकड़े भारत के डिजिटल भुगतान के भविष्य की ओर इशारा कर रहे हैं? जानें इस अद्भुत वृद्धि के पीछे के कारण और इसके प्रभाव।

मुख्य बातें

यूपीआई लेनदेन में 114 प्रतिशत की वृद्धि।
वित्त वर्ष 2024-25 में 18,587 करोड़ का आंकड़ा।
डिजिटल भुगतान में 41 प्रतिशत सीएजीआर की वृद्धि।
सरकार और आरबीआई के द्वारा उठाए गए सुधारात्मक कदम।
एमएसएमई के लिए विशेष ऋण योजनाएँ।

नई दिल्ली, 13 अगस्त (राष्ट्र प्रेस)। हाल ही में संसद में प्रस्तुत किए गए आंकड़ों के अनुसार, यूपीआई लेनदेन वित्त वर्ष 2017-18 में 114 प्रतिशत के सीएजीआर के साथ 92 करोड़ से बढ़कर वित्त वर्ष 2024-25 में 18,587 करोड़ तक पहुँच गए हैं। इस दौरान, लेनदेन का कुल मूल्य 1.10 लाख करोड़ रुपए से बढ़कर 261 लाख करोड़ रुपए हो गया है।

वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने लोकसभा में लिखित उत्तर में बताया कि जुलाई 2025 में यूपीआई ने एक और महत्वपूर्ण मील का पत्थर हासिल किया, जब पहली बार एक महीने में 1,946.79 करोड़ से अधिक लेनदेन दर्ज किए गए।

भारत में डिजिटल भुगतान लेनदेन की कुल मात्रा वित्त वर्ष 2017-18 में 2,071 करोड़ से बढ़कर वित्त वर्ष 2024-25 में 22,831 करोड़ हो गई है, जो 41 प्रतिशत सीएजीआर से बढ़ रही है।

राज्य मंत्री ने कहा कि इस अवधि के दौरान, लेनदेन का मूल्य 1,962 लाख करोड़ रुपए से बढ़कर 3,509 लाख करोड़ रुपए हो गया है।

उन्होंने यह भी कहा कि सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक ने पिछले कुछ वर्षों में ऋण अनुशासन, जिम्मेदारी से ऋण देने, बेहतर प्रशासन और टेक्नोलॉजी अपनाने संबंधी कई महत्वपूर्ण उपाय किए हैं।

उन्होंने उल्लेख किया, "सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में प्रशासनिक सुधारों के माध्यम से शीर्ष प्रबंधन का चयन, गैर-कार्यकारी अध्यक्षों की नियुक्ति, और प्रदर्शन-आधारित विस्तार जैसे सुधार किए जा रहे हैं।"

बेहतर पहुंच और सेवा उत्कृष्टता (ईएएसई) सुधारों ने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में शासन, विवेकपूर्ण ऋण, जोखिम प्रबंधन और डेटा-आधारित बैंकिंग में महत्वपूर्ण प्रगति को संभव बनाया है।

सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को ऋण प्रवाह में सुधार के लिए कई उपाय लागू किए गए हैं, जिनमें म्युचुअल क्रेडिट गारंटी स्कीम और इमरजेंसी क्रेडिट लाइन गारंटी स्कीम शामिल हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह स्पष्ट है कि यूपीआई का यह उछाल डिजिटल भुगतान के क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव को दर्शाता है। यह न केवल तकनीकी प्रगति का परिणाम है बल्कि भारत की आर्थिक स्थिरता और विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम भी है।
RashtraPress
8 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

यूपीआई लेनदेन में वृद्धि का मुख्य कारण क्या है?
यूपीआई लेनदेन में वृद्धि का मुख्य कारण सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा उठाए गए सुधारात्मक कदम हैं।
क्या यूपीआई का उपयोग बढ़ रहा है?
जी हां, यूपीआई का उपयोग पिछले वर्षों में तेजी से बढ़ रहा है और यह डिजिटल भुगतान का एक महत्वपूर्ण माध्यम बन गया है।
क्या यूपीआई लेनदेन सुरक्षित है?
जी हां, यूपीआई लेनदेन को सुरक्षित बनाने के लिए कई तकनीकी उपाय किए गए हैं।
एमएसएमई के लिए कौन से उपाय किए गए हैं?
एमएसएमई के लिए म्युचुअल क्रेडिट गारंटी स्कीम और इमरजेंसी क्रेडिट लाइन गारंटी स्कीम जैसे कई उपाय लागू किए गए हैं।
यूपीआई की भविष्य की संभावनाएँ क्या हैं?
यूपीआई की भविष्य में और वृद्धि की संभावनाएँ हैं, विशेषकर डिजिटल भुगतान में बढ़ती रुचि के कारण।
राष्ट्र प्रेस
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