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लश्कर के महिला विंग 'तैय्यबात' का तेज़ विस्तार: एआई प्रशिक्षण और भर्ती नेटवर्क से सुरक्षा एजेंसियाँ सतर्क

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लश्कर के महिला विंग 'तैय्यबात' का तेज़ विस्तार: एआई प्रशिक्षण और भर्ती नेटवर्क से सुरक्षा एजेंसियाँ सतर्क

सारांश

लश्कर-ए-तैयबा का महिला विंग 'तैय्यबात' सिर्फ एक भर्ती उपकरण नहीं — यह एआई-सक्षम प्रचार मशीन बन चुका है। 80% स्वैच्छिक भर्ती और तकनीकी प्रशिक्षण का यह संयोजन ऑपरेशन सिंदूर के बाद कमज़ोर पड़े लश्कर को नई ताकत दे रहा है — और भारतीय सुरक्षा तंत्र के लिए एक अभूतपूर्व चुनौती खड़ी कर रहा है।

मुख्य बातें

लश्कर-ए-तैयबा का महिला विंग 'तैय्यबात' वर्ष 2025 में स्थापित हुआ और 2026 की शुरुआत तक तेज़ी से विस्तारित हो गया।
अब तक लगभग 80 प्रतिशत भर्ती स्वैच्छिक रही है — जिसे खुफिया एजेंसियाँ अत्यंत खतरनाक संकेत मान रही हैं।
महिला सदस्यों को एआई प्रशिक्षण दिया जा रहा है, जो अब प्रचार और भर्ती अभियानों में उपयोग हो रहा है।
ऑपरेशन सिंदूर में 100 से अधिक आतंकवादी मारे गए, जिनमें लश्कर कमांडर अबू अकाशा और अबू जिंदल शामिल थे; 9 आतंकी ठिकाने नष्ट हुए।
जैश-ए-मोहम्मद का महिला विंग 'जमात-उल-मोमिनात' अक्टूबर 2025 में सादिया अजहर के नेतृत्व में शुरू हुआ, लेकिन गतिविधियाँ अभी सीमित हैं।
IB अधिकारियों के अनुसार, आने वाले समय में तैय्यबात लश्कर के मूल संगठन से भी अधिक खतरनाक साबित हो सकता है।

आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (LeT) का महिला विंग 'तैय्यबात' तेज़ी से विस्तार कर रहा है और भारतीय सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक नई गंभीर चुनौती बनकर उभरा है। भारतीय खुफिया एजेंसियों के अनुसार, वर्ष 2025 में स्थापित इस विंग ने 2026 की शुरुआत तक बड़ी संख्या में महिलाओं की भर्ती की, जिनमें से कथित तौर पर लगभग 80 प्रतिशत ने स्वेच्छा से संगठन की सदस्यता ली। अधिकारियों के अनुसार यह प्रवृत्ति अत्यंत चिंताजनक है।

तैय्यबात का उदय और संरचना

अधिकारियों के अनुसार, तैय्यबात की स्थापना के शुरुआती दौर में लश्कर-ए-तैयबा के नेतृत्व ने ऑपरेशन सिंदूर में मारे गए आतंकवादियों की तस्वीरों का उपयोग भर्ती प्रचार में किया। इससे महिलाओं में सहानुभूति जगाई गई और धीरे-धीरे यह एक स्व-चालित भर्ती श्रृंखला बन गई। फिलहाल महिला सदस्यों को आत्मघाती हमलों या प्रत्यक्ष आतंकी कार्रवाइयों के लिए प्रशिक्षित नहीं किया जा रहा है।

एक अधिकारी ने बताया कि इन महिलाओं की भूमिका मुख्यतः कट्टरपंथी विचारधारा के प्रसार, भर्ती अभियान, प्रचार-प्रसार और अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) प्रशिक्षण तक फैल गई है। संगठन के लगभग हर विभाग में इनकी सक्रिय उपस्थिति दर्ज की गई है।

एआई प्रशिक्षण: नया और खतरनाक आयाम

भारतीय एजेंसियों के अनुसार, हाल ही में लश्कर-ए-तैयबा ने भविष्य की प्रचार गतिविधियों और आतंकी अभियानों में एआई के महत्व पर विशेष बल दिया। इसके बाद बड़ी संख्या में महिला सदस्यों को एआई का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। अब ये प्रशिक्षित महिलाएँ स्वयं नए सदस्यों को एआई के उपयोग का प्रशिक्षण दे रही हैं — जिससे एक समानांतर तकनीकी नेटवर्क तैयार हो रहा है।

एक खुफिया ब्यूरो (IB) अधिकारी ने कहा कि आने वाले समय में 'तैय्यबात' अपने मूल संगठन लश्कर-ए-तैयबा से भी अधिक खतरनाक साबित हो सकता है।

ऑपरेशन सिंदूर के बाद लश्कर की स्थिति

पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में भारतीय सशस्त्र बलों द्वारा चलाए गए ऑपरेशन सिंदूर में लश्कर-ए-तैयबा को भारी क्षति हुई थी। इस कार्रवाई में 100 से अधिक आतंकवादी मारे गए, जिनमें लश्कर के दो शीर्ष कमांडर — खालिद उर्फ अबू अकाशा और मुदस्सर खडियान उर्फ अबू जिंदल — भी शामिल थे। इसके अलावा, लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद और हिजबुल मुजाहिदीन के नौ आतंकी ठिकाने नष्ट किए गए।

इस नुकसान के बाद लश्कर की भर्ती रफ्तार धीमी पड़ी और नेतृत्व की प्रभावशीलता पर सवाल उठने लगे। ऐसे में तैय्यबात संगठन के लिए युवाओं की भर्ती का प्रमुख माध्यम बनकर उभरा है।

जैश के महिला विंग से तुलना

जैश-ए-मोहम्मद का महिला विंग 'जमात-उल-मोमिनात (JUM)' अक्टूबर 2025 में मसूद अजहर की बहन सादिया अजहर के नेतृत्व में शुरू किया गया था। अधिकारियों के अनुसार, इसकी गतिविधियाँ अभी तैय्यबात की तुलना में काफी सीमित हैं।

अधिकारियों का मानना है कि इसका एक प्रमुख कारण यह है कि लश्कर प्रमुख हाफिज सईद संगठनात्मक रूप से अपेक्षाकृत अधिक सक्रिय और दृश्यमान है, जबकि ऑपरेशन सिंदूर के बाद जैश प्रमुख मसूद अजहर लगभग सार्वजनिक गतिविधियों से दूर है। अधिकारियों के अनुसार, उनकी तबीयत खराब है और ऑपरेशन सिंदूर में अपने परिवार के कई सदस्यों की मृत्यु के बाद वे अब तक पूरी तरह नहीं उबर पाए हैं।

आगे क्या होगा

भारतीय सुरक्षा एजेंसियों के लिए सबसे बड़ी चिंता यह है कि तैय्यबात की महिला सदस्य बड़ी संख्या में युवाओं को लश्कर-ए-तैयबा से जोड़ने में प्रभावी साबित हो रही हैं। एआई-सक्षम प्रचार नेटवर्क और स्वैच्छिक भर्ती का यह संयोजन पारंपरिक आतंकवाद-रोधी रणनीतियों के लिए एक नई परीक्षा है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस खतरे से निपटने के लिए तकनीकी निगरानी और डी-रेडिकलाइज़ेशन कार्यक्रमों को समानांतर रूप से मज़बूत करना होगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इस रिक्तता को भरने के लिए महिला विंग का उभरना यह दर्शाता है कि संगठन अनुकूलन में सक्षम है। भारतीय सुरक्षा रणनीति अभी तक मुख्यतः ऑपरेशनल नेटवर्क को निशाना बनाती रही है — वैचारिक कट्टरपंथीकरण और डिजिटल प्रचार का मुकाबला करने के लिए समान रूप से मज़बूत काउंटर-नैरेटिव तंत्र की ज़रूरत है, जिस पर अभी पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया है।
RashtraPress
21 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

लश्कर-ए-तैयबा का महिला विंग 'तैय्यबात' क्या है?
'तैय्यबात' आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा का महिला विंग है, जिसकी स्थापना वर्ष 2025 में हुई थी। 2026 की शुरुआत तक इसने तेज़ी से विस्तार किया और कट्टरपंथ के प्रसार, भर्ती अभियान, प्रचार और एआई प्रशिक्षण में सक्रिय भूमिका निभा रहा है।
तैय्यबात में 80% स्वैच्छिक भर्ती क्यों चिंताजनक है?
खुफिया एजेंसियों के अनुसार, स्वैच्छिक भर्ती यह दर्शाती है कि महिलाओं में संगठन की विचारधारा के प्रति गहरी आस्था पैदा की जा चुकी है। यह पारंपरिक जबरदस्ती-आधारित भर्ती से कहीं अधिक टिकाऊ और खतरनाक मॉडल है, जिसे तोड़ना कठिन होता है।
तैय्यबात एआई का उपयोग किस तरह कर रहा है?
भारतीय एजेंसियों के अनुसार, लश्कर-ए-तैयबा ने प्रचार और आतंकी गतिविधियों के लिए एआई के महत्व पर ज़ोर दिया, जिसके बाद बड़ी संख्या में महिला सदस्यों को एआई प्रशिक्षण दिया गया। अब ये महिलाएँ नए सदस्यों को भी प्रशिक्षित कर रही हैं, जिससे एक स्व-विस्तारित तकनीकी नेटवर्क तैयार हो रहा है।
ऑपरेशन सिंदूर में लश्कर-ए-तैयबा को क्या नुकसान हुआ?
पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में चलाए गए ऑपरेशन सिंदूर में 100 से अधिक आतंकवादी मारे गए, जिनमें लश्कर के शीर्ष कमांडर खालिद उर्फ अबू अकाशा और मुदस्सर खडियान उर्फ अबू जिंदल शामिल थे। लश्कर, जैश-ए-मोहम्मद और हिजबुल मुजाहिदीन के नौ आतंकी ठिकाने भी नष्ट किए गए।
जैश-ए-मोहम्मद के महिला विंग की स्थिति तैय्यबात से कैसे अलग है?
जैश-ए-मोहम्मद का महिला विंग 'जमात-उल-मोमिनात' अक्टूबर 2025 में मसूद अजहर की बहन सादिया अजहर के नेतृत्व में शुरू हुआ, लेकिन इसकी गतिविधियाँ अभी तैय्यबात की तुलना में काफी सीमित हैं। अधिकारियों के अनुसार, इसका एक कारण यह है कि ऑपरेशन सिंदूर के बाद मसूद अजहर सार्वजनिक गतिविधियों से दूर हैं और उनकी तबीयत खराब बताई जा रही है।
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