ISI का टीटीएच षड्यंत्र: भारत को घेरने और पाकिस्तान को बचाने की नई रणनीति उजागर
सारांश
मुख्य बातें
खुफिया एजेंसियों के अनुसार तहरीक-ए-तालिबान हिंदुस्तान (टीटीएच) कोई स्वतंत्र आतंकी संगठन नहीं, बल्कि पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई द्वारा रचा गया एक सुनियोजित प्रोपेगेंडा तंत्र है। इसका मूल उद्देश्य भारत में एक 'घरेलू आतंकी संगठन' का भ्रम पैदा करना है, ताकि किसी भी हमले के बाद पाकिस्तान खुद को जिम्मेदारी से अलग कर सके। नई दिल्ली में सुरक्षा अधिकारियों ने 25 मई 2026 को इस पूरे षड्यंत्र की परतें सामने रखीं।
टीटीएच का असली एजेंडा
एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, टीटीएच के पीछे दोहरा मकसद काम कर रहा है। एक तरफ इसका इस्तेमाल भारत में प्रचार फैलाने के लिए हो रहा है, वहीं दूसरी तरफ इसे तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) से जोड़ने की कोशिश भी की जा रही है। अधिकारी का कहना है कि यह महज एक छोटा संगठन नहीं — इसके पीछे एक बड़ा भू-राजनीतिक एजेंडा है।
गौरतलब है कि टीटीपी ने पाकिस्तान की सुरक्षा एजेंसियों के लिए पहले से ही भारी मुश्किलें खड़ी कर रखी हैं। ऐसे में टीटीएच का अचानक सामने आना बेहद सोची-समझी चाल माना जा रहा है।
भारत-अफगानिस्तान को फँसाने की रणनीति
इंटेलिजेंस ब्यूरो के एक अधिकारी ने बताया कि पाकिस्तान पहले भी यह झूठा दावा करता रहा है कि अफगान तालिबान, टीटीपी को समर्थन देता है। इसी आधार पर उसने अफगानिस्तान के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय माहौल बनाने की कोशिश की थी। अब टीटीएच को टीटीपी से जोड़कर एक नई रणनीति तैयार की गई है — आईएसआई दुनिया को यह दिखाना चाहती है कि भारत और अफगानिस्तान मिलकर टीटीपी को पाकिस्तानी सुरक्षा बलों पर हमले के लिए समर्थन दे रहे हैं।
यह ऐसे समय में हो रहा है जब भारत और अफगान तालिबान के बीच संबंध सुधरे हैं और दोनों के बीच बातचीत सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रही है। दूसरी तरफ, अफगान तालिबान ने पाकिस्तान को अपने आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप से स्पष्ट रूप से मना कर दिया है, जिससे इस्लामाबाद की नाराजगी बढ़ी है।
शहजाद भट्टी: टीटीएच का चेहरा
अधिकारियों के अनुसार, टीटीएच का नेतृत्व शहजाद भट्टी कर रहा है, जिसे भारतीय मामलों में आईएसआई के प्रचार तंत्र का प्रमुख माना जाता है। भट्टी का नाम तब सामने आया जब दिल्ली पुलिस ने सोहेल नामक एक अपराधी को गिरफ्तार किया। पूछताछ में सोहेल ने बताया कि भट्टी ने उसे दिल्ली और फरीदाबाद की कई जगहों पर 'टीटीएच' लिखने का निर्देश दिया था। इसके साथ ही 'टीटीएच' के नीचे एक छोटा 'एस' लिखने को भी कहा गया था — ताकि यह संकेत मिल सके कि इसके पीछे शहजाद का हाथ है।
पुलिस को निशाना बनाने का मॉड्यूल
अधिकारियों के मुताबिक, भट्टी की महत्वाकांक्षा केवल प्रचार तक सीमित नहीं है। कथित तौर पर वह दिल्ली और आसपास के इलाकों में एक ऐसा नेटवर्क तैयार कर रहा है जिसका खास निशाना पुलिसकर्मी हो सकते हैं। यह एक विशेष मॉड्यूल बताया जा रहा है जिसका मकसद सुरक्षाबलों पर हमला करना है।
आईएसआई का दीर्घकालिक लक्ष्य
अधिकारियों का कहना है कि टीटीएच के जरिए आईएसआई लंबे समय से भारत में एक मजबूत घरेलू आतंकी ढाँचा खड़ा करने की कोशिश में है। इस रणनीति के तीन स्तंभ बताए जा रहे हैं: पहला — टीटीपी और टीटीएच को भारत व अफगानिस्तान से जोड़ना; दूसरा — यह झूठा माहौल बनाना कि भारत पाकिस्तान विरोधी आतंकी गतिविधियों को बढ़ावा दे रहा है; और तीसरा — भारतीय पुलिस को निशाना बनाकर देश में अस्थिरता फैलाना। सुरक्षा एजेंसियाँ इस पूरे नेटवर्क पर कड़ी नजर बनाए हुए हैं।