10 जुलाई 2026
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ISI का टीटीएच षड्यंत्र: भारत को घेरने और पाकिस्तान को बचाने की नई रणनीति उजागर

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ISI का टीटीएच षड्यंत्र: भारत को घेरने और पाकिस्तान को बचाने की नई रणनीति उजागर

सारांश

पाकिस्तान की आईएसआई ने टीटीएच को एक असली संगठन नहीं, बल्कि एक प्रोपेगेंडा हथियार के रूप में खड़ा किया है — ताकि भारत और अफगानिस्तान को टीटीपी से जोड़ा जा सके और हर हमले के बाद पाकिस्तान बेदाग बचता रहे। दिल्ली पुलिस की गिरफ्तारी ने इस पर्दे को उठाया है।

मुख्य बातें

खुफिया एजेंसियों के अनुसार तहरीक-ए-तालिबान हिंदुस्तान (टीटीएच) एक स्वतंत्र आतंकी संगठन नहीं, बल्कि आईएसआई का प्रोपेगेंडा तंत्र है।
टीटीएच का मकसद भारत में 'घरेलू आतंकी संगठन' का भ्रम पैदा कर पाकिस्तान को जिम्मेदारी से बचाना है।
दिल्ली पुलिस द्वारा गिरफ्तार सोहेल ने खुलासा किया कि शहजाद भट्टी ने दिल्ली और फरीदाबाद में 'टीटीएच' लिखवाया।
आईएसआई की योजना भारत और अफगानिस्तान को टीटीपी समर्थक दिखाने की है — खासकर जब दोनों के संबंध सुधरे हैं।
अधिकारियों के अनुसार भट्टी दिल्ली में पुलिसकर्मियों को निशाना बनाने वाला मॉड्यूल तैयार कर रहा है।

खुफिया एजेंसियों के अनुसार तहरीक-ए-तालिबान हिंदुस्तान (टीटीएच) कोई स्वतंत्र आतंकी संगठन नहीं, बल्कि पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई द्वारा रचा गया एक सुनियोजित प्रोपेगेंडा तंत्र है। इसका मूल उद्देश्य भारत में एक 'घरेलू आतंकी संगठन' का भ्रम पैदा करना है, ताकि किसी भी हमले के बाद पाकिस्तान खुद को जिम्मेदारी से अलग कर सके। नई दिल्ली में सुरक्षा अधिकारियों ने 25 मई 2026 को इस पूरे षड्यंत्र की परतें सामने रखीं।

टीटीएच का असली एजेंडा

एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, टीटीएच के पीछे दोहरा मकसद काम कर रहा है। एक तरफ इसका इस्तेमाल भारत में प्रचार फैलाने के लिए हो रहा है, वहीं दूसरी तरफ इसे तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) से जोड़ने की कोशिश भी की जा रही है। अधिकारी का कहना है कि यह महज एक छोटा संगठन नहीं — इसके पीछे एक बड़ा भू-राजनीतिक एजेंडा है।

गौरतलब है कि टीटीपी ने पाकिस्तान की सुरक्षा एजेंसियों के लिए पहले से ही भारी मुश्किलें खड़ी कर रखी हैं। ऐसे में टीटीएच का अचानक सामने आना बेहद सोची-समझी चाल माना जा रहा है।

भारत-अफगानिस्तान को फँसाने की रणनीति

इंटेलिजेंस ब्यूरो के एक अधिकारी ने बताया कि पाकिस्तान पहले भी यह झूठा दावा करता रहा है कि अफगान तालिबान, टीटीपी को समर्थन देता है। इसी आधार पर उसने अफगानिस्तान के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय माहौल बनाने की कोशिश की थी। अब टीटीएच को टीटीपी से जोड़कर एक नई रणनीति तैयार की गई है — आईएसआई दुनिया को यह दिखाना चाहती है कि भारत और अफगानिस्तान मिलकर टीटीपी को पाकिस्तानी सुरक्षा बलों पर हमले के लिए समर्थन दे रहे हैं।

यह ऐसे समय में हो रहा है जब भारत और अफगान तालिबान के बीच संबंध सुधरे हैं और दोनों के बीच बातचीत सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रही है। दूसरी तरफ, अफगान तालिबान ने पाकिस्तान को अपने आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप से स्पष्ट रूप से मना कर दिया है, जिससे इस्लामाबाद की नाराजगी बढ़ी है।

शहजाद भट्टी: टीटीएच का चेहरा

अधिकारियों के अनुसार, टीटीएच का नेतृत्व शहजाद भट्टी कर रहा है, जिसे भारतीय मामलों में आईएसआई के प्रचार तंत्र का प्रमुख माना जाता है। भट्टी का नाम तब सामने आया जब दिल्ली पुलिस ने सोहेल नामक एक अपराधी को गिरफ्तार किया। पूछताछ में सोहेल ने बताया कि भट्टी ने उसे दिल्ली और फरीदाबाद की कई जगहों पर 'टीटीएच' लिखने का निर्देश दिया था। इसके साथ ही 'टीटीएच' के नीचे एक छोटा 'एस' लिखने को भी कहा गया था — ताकि यह संकेत मिल सके कि इसके पीछे शहजाद का हाथ है।

पुलिस को निशाना बनाने का मॉड्यूल

अधिकारियों के मुताबिक, भट्टी की महत्वाकांक्षा केवल प्रचार तक सीमित नहीं है। कथित तौर पर वह दिल्ली और आसपास के इलाकों में एक ऐसा नेटवर्क तैयार कर रहा है जिसका खास निशाना पुलिसकर्मी हो सकते हैं। यह एक विशेष मॉड्यूल बताया जा रहा है जिसका मकसद सुरक्षाबलों पर हमला करना है।

आईएसआई का दीर्घकालिक लक्ष्य

अधिकारियों का कहना है कि टीटीएच के जरिए आईएसआई लंबे समय से भारत में एक मजबूत घरेलू आतंकी ढाँचा खड़ा करने की कोशिश में है। इस रणनीति के तीन स्तंभ बताए जा रहे हैं: पहला — टीटीपी और टीटीएच को भारत व अफगानिस्तान से जोड़ना; दूसरा — यह झूठा माहौल बनाना कि भारत पाकिस्तान विरोधी आतंकी गतिविधियों को बढ़ावा दे रहा है; और तीसरा — भारतीय पुलिस को निशाना बनाकर देश में अस्थिरता फैलाना। सुरक्षा एजेंसियाँ इस पूरे नेटवर्क पर कड़ी नजर बनाए हुए हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

या यह जानकारी केवल खुफिया फाइलों तक सीमित रहेगी। भारत-अफगानिस्तान संबंधों को कमजोर करने की यह कोशिश बताती है कि पाकिस्तान अपने घटते क्षेत्रीय प्रभाव से कितना बेचैन है।
RashtraPress
10 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

तहरीक-ए-तालिबान हिंदुस्तान (टीटीएच) क्या है?
खुफिया एजेंसियों के अनुसार टीटीएच कोई स्वतंत्र आतंकी संगठन नहीं, बल्कि आईएसआई द्वारा संचालित एक प्रोपेगेंडा तंत्र है। इसका मकसद भारत में घरेलू आतंकी संगठन का भ्रम पैदा करना है ताकि पाकिस्तान किसी भी हमले की जिम्मेदारी से बच सके।
शहजाद भट्टी कौन है और टीटीएच से उसका क्या संबंध है?
शहजाद भट्टी को अधिकारी भारतीय मामलों में आईएसआई के प्रचार तंत्र का प्रमुख मानते हैं। दिल्ली पुलिस द्वारा गिरफ्तार सोहेल नामक अपराधी ने बताया कि भट्टी ने उसे दिल्ली और फरीदाबाद में 'टीटीएच' लिखवाया था।
पाकिस्तान टीटीएच को टीटीपी से क्यों जोड़ना चाहता है?
अधिकारियों के अनुसार इसके पीछे दोहरा मकसद है — पहला, भारत और अफगानिस्तान को टीटीपी का समर्थक दिखाना; दूसरा, पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 'पीड़ित' के रूप में पेश करना। यह रणनीति खासतौर पर तब अपनाई गई है जब भारत-अफगानिस्तान संबंध सुधर रहे हैं।
टीटीएच से भारत की आंतरिक सुरक्षा को क्या खतरा है?
अधिकारियों के मुताबिक टीटीएच केवल प्रचार तक सीमित नहीं — कथित तौर पर दिल्ली और आसपास के इलाकों में पुलिसकर्मियों को निशाना बनाने वाला एक विशेष मॉड्यूल तैयार किया जा रहा है। सुरक्षा एजेंसियाँ इस नेटवर्क पर नजर बनाए हुए हैं।
अफगानिस्तान और भारत के बदलते संबंधों का इस षड्यंत्र से क्या संबंध है?
अफगान तालिबान ने पाकिस्तान को अपने मामलों में हस्तक्षेप से मना कर दिया है और भारत के साथ उसके संबंध सुधरे हैं। अधिकारियों के अनुसार इसी से नाराज पाकिस्तान ने टीटीएच के जरिए दोनों देशों को टीटीपी समर्थक दिखाने की झूठी कहानी गढ़ी है।
राष्ट्र प्रेस
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