अखिलेश यादव अपनी पत्नी के सम्मान को लेकर खड़े नहीं हो सके, देश की महिलाओं पर क्या प्रभाव पड़ेगा: ओपी राजभर
सारांश
Key Takeaways
- अखिलेश यादव पर ओपी राजभर का आरोप, पत्नी के सम्मान को लेकर खड़े न होने का।
- महिला आरक्षण पर सपा का विरोध।
- मौला की टिप्पणी पर अखिलेश की चुप्पी।
- राजभर का कहना, धोखा देने की आदत है सपा की।
- महिलाओं के अधिकारों की सुरक्षा पर गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता।
लखनऊ, 19 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री ओपी राजभर ने समाजवादी पार्टी (सपा) के प्रमुख अखिलेश यादव पर कटाक्ष किया। उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति अपनी पत्नी के सम्मान के लिए खड़ा नहीं हो सकता, वह देश की महिलाओं के बारे में क्या सोच सकता है।
लखनऊ में राष्ट्र प्रेस के साथ बातचीत करते हुए मंत्री ओपी राजभर ने महिला आरक्षण के मुद्दे पर और मुस्लिम तुष्टीकरण पर सपा को घेरा।
उन्होंने सपा प्रमुख अखिलेश यादव की प्रेस वार्ता पर टिप्पणी करते हुए कहा कि चाय वाले को पीटने वाले कौन हैं? यह मुस्लिम समाज के लोग हैं। अखिलेश यादव ने यह स्पष्ट नहीं किया कि उस चाय वाले को किसने पीटा। इतना मुस्लिम प्रेम है कि नाम तक नहीं ले पाए और बदनाम भाजपा को कर रहे हैं। भाजपा वाले उन्हें बदनाम कर रहे हैं। अब पीटने वाला मुसलमान है, उनकी पार्टी के लोग हैं।
उन्होंने कहा कि किसी की मदद करना अच्छी बात है, लेकिन उस मुद्दे को लेकर भाजपा और एनडीए को बदनाम करना, यह समाजवादी पार्टी का स्वभाव है।
राजभर ने कहा कि अखिलेश यादव महिला आरक्षण की बात कर रहे हैं, तो पूरा देश देख रहा है कि आधी आबादी महिलाएं हैं। अखिलेश यादव संविधान लेकर घूमते हैं, लेकिन उन्हें पता नहीं है कि संविधान में बाबा साहेब डॉ. अंबेडकर ने बराबरी का अधिकार दिया है। आधी आबादी महिलाओं की है। देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने देश की आधी आबादी को राजनीति में आरक्षण देने के लिए बिल लाने का प्रयास किया। समाजवादी पार्टी ने उस बिल का विरोध किया।
उन्होंने यह भी पूछा कि जब मौलाना ने अखिलेश यादव की पत्नी पर टिप्पणी की, तब उनकी जुबान क्यों नहीं खुली। महिलाओं के सम्मान में उनकी कितनी रुचि है? जब वह अपनी पत्नी पर मौलाना द्वारा की गई आपत्तिजनक टिप्पणी पर कोई जवाब नहीं दे सके, तो देश की महिलाओं के विषय में उनकी सोच क्या होगी?
उन्होंने कहा कि इनका काम केवल धोखा देना, दूसरों को बदनाम करना और अपने काम को दूसरों के सिर थोपना है।