किरेन रिजिजू की बेलग्रेड में सर्बिया के विदेश मंत्री मार्को ड्यूरिक से मुलाकात, भारत-सर्बिया संबंध मजबूत करने पर जोर
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने 31 अगस्त 2026 को बेलग्रेड में सर्बिया के विदेश मंत्री मार्को ड्यूरिक से मुलाकात की और भारत-सर्बिया के दीर्घकालिक द्विपक्षीय संबंधों की समीक्षा करते हुए आपसी हित के क्षेत्रों में सहयोग को और गहरा करने पर विस्तृत चर्चा की। यह मुलाकात ऐसे समय में हुई जब रिजिजू गुटनिरपेक्ष आंदोलन (NAM) के पहले शिखर सम्मेलन की 65वीं वर्षगांठ पर आयोजित उच्च स्तरीय स्मारक बैठक में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे हैं।
बैठक का संदर्भ और मुख्य बातें
मुलाकात के बाद रिजिजू ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, 'बेलग्रेड में सर्बिया के विदेश मंत्री मार्को ड्यूरिक के साथ गर्मजोशी और सार्थक मुलाकात हुई। भारत और सर्बिया के बीच लंबे समय से चली आ रही मित्रता पर चर्चा की और द्विपक्षीय संबंधों व आपसी हित के क्षेत्रों में सहयोग को और गहरा करने पर विचारों का आदान-प्रदान किया।'
गौरतलब है कि भारत और सर्बिया के बीच संबंध गुटनिरपेक्ष आंदोलन के शुरुआती दौर से ही गहरे रहे हैं, जब सर्बिया यूगोस्लाविया के नाम से जाना जाता था। यह उच्च स्तरीय यात्रा उन ऐतिहासिक संबंधों को नई ऊर्जा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
NAM की 65वीं वर्षगांठ और भारत की भूमिका
31 अगस्त से 1 सितंबर तक आयोजित यह उच्च स्तरीय स्मारक बैठक 'गुटनिरपेक्षता की विरासत : आज की दुनिया के लिए सबक' थीम पर केंद्रित है। भारत NAM के संस्थापक सदस्यों में से एक रहा है और इस मंच पर उसकी सक्रिय भागीदारी वैश्विक कूटनीति में उसकी स्वतंत्र विदेश नीति की परंपरा को दर्शाती है। रिजिजू का इस बैठक में प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करना भारत की ओर से इस मंच को दिए जाने वाले महत्व को रेखांकित करता है।
महात्मा गांधी की प्रतिमा पर पुष्पांजलि और भारतीय समुदाय से संवाद
इससे पहले रविवार को रिजिजू ने बेलग्रेड में महात्मा गांधी की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की और वहाँ बसे भारतीय समुदाय के सदस्यों से मुलाकात की। उन्होंने द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाने में प्रवासी भारतीयों के योगदान की सराहना की।
इस दौरान एक प्रवासी महिला से उनकी विशेष मुलाकात हुई, जिन्होंने 1966-67 में एक भारत-यूगोस्लाविया कार्यक्रम के तहत पहली बार यूगोस्लाविया (वर्तमान सर्बिया) की यात्रा की थी और तब से वहीं बस गईं। उन्होंने कहा, 'मैं पहली बार एक प्रोग्राम के तहत आई थी। यह 1966-67 की बात है... यह भारत और यूगोस्लाविया के बीच था, इसने मुझे यहाँ पहुँचाया और मैं यहीं बस गई।' यह वाकया उस युग के भारत-यूगोस्लाविया सांस्कृतिक आदान-प्रदान की जीवंत मिसाल है।
भारतीय संस्कृति और खान-पान की पहचान
रिजिजू ने भारतीय समुदाय के सदस्यों से उनकी सांस्कृतिक गतिविधियों के बारे में भी बातचीत की। उन्होंने बेलग्रेड क्षेत्र में भारतीय भोजन की बढ़ती लोकप्रियता का उल्लेख किया, जो सांस्कृतिक संपर्क का एक सहज पहलू है। बैठक के अंत में उन्होंने भारतीय समुदाय के बच्चों से भी संवाद किया।
आगे की दिशा
इस यात्रा के दौरान हुई द्विपक्षीय बैठक और NAM मंच पर भारत की सक्रिय भागीदारी यह संकेत देती है कि नई दिल्ली पूर्वी यूरोप के साथ अपने कूटनीतिक संबंधों को नई गति देने में रुचि रखती है। आने वाले समय में दोनों देशों के बीच सहयोग के ठोस क्षेत्रों की पहचान और उन पर अमल की उम्मीद है।