108 एम्बुलेंस हड़ताल: कर्नाटक BJP नेता आर. अशोक ने सरकार को चेताया, तत्काल समाधान की माँग
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक विधानसभा में विपक्ष के नेता और वरिष्ठ भारतीय जनता पार्टी (BJP) नेता आर. अशोक ने मंगलवार, 22 सितंबर 2026 को राज्य की कांग्रेस सरकार पर तीखा हमला बोला। यह हमला '108 आरोग्य कवच' मुफ्त एम्बुलेंस सेवा के कर्मचारियों द्वारा सामूहिक इस्तीफे की चेतावनी के मद्देनज़र किया गया, जिसने पूरे राज्य में आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं के ठप होने की आशंका खड़ी कर दी है। अशोक ने सरकार पर लापरवाही और प्रशासनिक विफलता का आरोप लगाते हुए तत्काल कार्रवाई की माँग की।
कर्मचारियों की माँगें और अल्टीमेटम
कर्नाटक 108 आरोग्य कवच एम्बुलेंस कर्मचारी संघ ने 22 सितंबर 2026 को 15 दिन की समय-सीमा निर्धारित करते हुए चेतावनी दी है कि यदि वेतन संशोधन और ड्यूटी शेड्यूल में बदलाव की माँगें पूरी नहीं हुईं, तो मंगलवार रात से ही सेवा अनिश्चितकाल के लिए बाधित कर दी जाएगी और बड़े पैमाने पर इस्तीफे दिए जाएंगे।
कर्मचारियों का आरोप है कि उनकी रुकी हुई सैलरी में संशोधन सहित अन्य सेवा-संबंधी माँगों पर अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है, जबकि बैठकों का सिलसिला बदस्तूर जारी है।
आर. अशोक की सरकार पर कड़ी आलोचना
अशोक ने कहा, 'क्या लोगों की जान की कोई कीमत नहीं है?' उन्होंने मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार को सीधे संबोधित करते हुए पूछा कि क्या उन्हें उन एम्बुलेंस कर्मचारियों की मुश्किलें नहीं दिखतीं, जो दिन-रात, बारिश और तूफान की परवाह किए बिना आपात स्थितियों में लोगों की जान बचाने के लिए दौड़ते हैं।
उन्होंने स्वास्थ्य मंत्री यू.टी. खादर पर भी निशाना साधा और आरोप लगाया कि कर्मचारियों की समस्याओं को हल किए बिना बार-बार बैठकें आयोजित कर केवल समय बर्बाद किया जा रहा है। अशोक ने पूछा, 'समस्या हल करने के नाम पर एक के बाद एक बैठकें और बहाने बनाने के बजाय, कर्मचारियों को न्याय कब मिलेगा?'
जीवीके कॉन्ट्रैक्ट विवाद की पृष्ठभूमि
अशोक ने आरोप लगाया कि सरकार और जीवीके के बीच चल रहा कॉन्ट्रैक्ट विवाद इस संकट की जड़ में है और यह विवाद जनता द्वारा उपयोग की जाने वाली एक अत्यावश्यक आपातकालीन सेवा को सीधे प्रभावित कर रहा है। उन्होंने इसे 'गरीब लोगों की जान से खिलवाड़' करार देते हुए सरकार से इसे तत्काल बंद करने की माँग की।
गौरतलब है कि 108 एम्बुलेंस सेवा कर्नाटक के ग्रामीण और शहरी दोनों इलाकों में लाखों लोगों के लिए जीवन रेखा मानी जाती है, और इसके बाधित होने से दुर्घटना, प्रसव और अन्य आपातकालीन मामलों में गंभीर संकट उत्पन्न हो सकता है।
BJP की चेतावनी और आगे की राह
अशोक ने सरकार को स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि 108 एम्बुलेंस कर्मचारियों की 'जायज माँगों' को तुरंत पूरा नहीं किया गया और सेवा में रुकावट आई, तो कर्नाटक की जनता में इस 'असंवेदनशील सरकार' के प्रति रोष और गहरा होगा।
यह ऐसे समय में आया है जब कर्नाटक की कांग्रेस सरकार पहले से ही कई प्रशासनिक मोर्चों पर विपक्षी दबाव झेल रही है। अब सवाल यह है कि राज्य सरकार इस बढ़ते संकट को टालने के लिए अगले कुछ घंटों और दिनों में क्या कदम उठाती है।