108 मुफ्त एम्बुलेंस हड़ताल की चेतावनी पर BJP का हमला, कर्नाटक सरकार पर प्रशासनिक विफलता का आरोप
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक विधानसभा में विपक्ष के नेता और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेता आर. अशोक ने बुधवार, 14 अक्टूबर 2026 को राज्य सरकार पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि 108 मुफ्त एम्बुलेंस सेवा के कर्मचारियों को अपनी जायज माँगों के लिए हड़ताल की चेतावनी देने पर मजबूर होना पड़ा, जो सत्तारूढ़ सरकार की खुली प्रशासनिक विफलता का प्रमाण है। एम्बुलेंस चालकों ने चेतावनी दी है कि वे आज रात 10 बजे से ड्यूटी पर नहीं आएँगे, जिससे बेंगलुरु सहित पूरे कर्नाटक में आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाएँ बाधित होने का गंभीर खतरा उत्पन्न हो गया है।
हड़ताल की पृष्ठभूमि और मुख्य माँगें
108 आरोग्य कवच एम्बुलेंस सेवा चिकित्सा आपात स्थितियों और सड़क दुर्घटनाओं के लिए राज्यभर में उपलब्ध एक टोल-फ्री सेवा है, जो कॉल से लेकर अस्पताल तक पूरी तरह निःशुल्क है। इसका संचालन कर्नाटक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के अधीन होता है। कर्मचारियों की लंबित माँगों में वेतन संशोधन, समान वेतन, समय पर वेतन भुगतान और ड्यूटी के दौरान दुर्घटना में मृत्यु या स्थायी विकलांगता की स्थिति में ₹50 लाख मुआवजा शामिल हैं।
गौरतलब है कि 22 सितंबर 2026 को कर्मचारियों के साथ एक बैठक हुई थी जिसमें सरकार ने माँगें पूरी करने का आश्वासन दिया था — लेकिन तीन सप्ताह बाद भी कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
BJP नेता अशोक का सरकार पर सीधा हमला
अशोक ने अपने बयान में मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार से सवाल किया कि सरकार ने बैठक में आश्वासन देने के बावजूद आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े कर्मचारियों की समस्याएँ क्यों नहीं सुलझाईं। उन्होंने स्वास्थ्य मंत्री यू.टी. खादर पर भी निशाना साधते हुए कहा, 'क्या जीवन बचाने वाली सेवाएं देने वाले कर्मचारियों की समस्याओं पर ध्यान देना आपकी जिम्मेदारी नहीं है?'
अशोक ने यह भी आरोप लगाया कि राज्य की बिगड़ती वित्तीय स्थिति के चलते सरकार अब आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं को भी अनिश्चितता में धकेल रही है। यह ऐसे समय में आया है जब कर्नाटक सरकार कई सामाजिक गारंटी योजनाओं पर भारी खर्च को लेकर विपक्ष के निशाने पर है।
आम जनता पर संभावित असर
अशोक ने चेतावनी दी कि यदि 108 एम्बुलेंस सेवा बाधित होती है तो इसका सबसे बड़ा खामियाजा आम नागरिकों को — विशेषकर ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में रहने वाले लोगों को — उठाना पड़ेगा, जहाँ निजी एम्बुलेंस की उपलब्धता सीमित है। उन्होंने सरकार से अपील की कि मरीजों की जान खतरे में पड़ने से पहले स्थिति को तत्काल संभाला जाए।
यह सेवा प्रतिदिन हज़ारों आपातकालीन कॉल संभालती है और इसके ठप होने से गंभीर रोगियों, दुर्घटना पीड़ितों और प्रसव के मामलों में विलंब की आशंका है।
सरकार और कर्मचारियों के बीच वार्ता जारी
रिपोर्टों के अनुसार, सरकार और एम्बुलेंस कर्मचारियों के बीच बातचीत जारी है, लेकिन 14 अक्टूबर की शाम तक कोई ठोस समाधान नहीं निकल सका। सरकार की ओर से अब तक कोई आधिकारिक वक्तव्य नहीं आया है कि लंबित माँगों पर क्या कार्रवाई की जाएगी।
अशोक ने माँग की है कि सरकार कर्मचारियों की समस्याओं का तुरंत समाधान करे और नागरिकों की जान की रक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दे। आने वाले घंटे यह तय करेंगे कि कर्नाटक में यह आपातकालीन सेवा चालू रहती है या संकट और गहरा होता है।