16 अक्टूबर 2026
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झारखंड में 108 एंबुलेंस कर्मचारियों की 40 घंटे की हड़ताल, 21 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन आंदोलन की चेतावनी

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झारखंड में 108 एंबुलेंस कर्मचारियों की 40 घंटे की हड़ताल, 21 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन आंदोलन की चेतावनी

सारांश

झारखंड में 108 एंबुलेंस चालक और EMT जुलाई 2026 से बकाया वेतन और नौकरी सुरक्षा की माँग को लेकर 40 घंटे की हड़ताल पर हैं। स्वास्थ्य मंत्री की बैठक के बाद भी कार्रवाई न होने से नाराज संघ ने 21 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन आंदोलन की चेतावनी दी है।

मुख्य बातें

झारखंड में 108 एंबुलेंस के चालकों और EMT ने 16 अक्टूबर 2026 की रात आठ बजे से 40 घंटे की सांकेतिक हड़ताल शुरू की।
कर्मचारियों का जुलाई 2026 से वेतन बकाया है; EPF, ESI और न्यूनतम वेतन जैसी वैधानिक सुविधाओं की माँग भी है।
स्वास्थ्य मंत्री डॉ.
इरफान अंसारी की अध्यक्षता में 16 सितंबर 2026 को हुई बैठक में 15-20 दिन में समाधान का आश्वासन दिया गया था, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई।
संघ की माँग है कि सेवा का संचालन सिविल सर्जन के माध्यम से हो और वेतन सीधे NHM दे।
माँगें नहीं मानी गईं तो 21 अक्टूबर 2026 से राज्यव्यापी अनिश्चितकालीन हड़ताल की चेतावनी।

झारखंड में 108 आपातकालीन एंबुलेंस सेवा के चालकों और इमरजेंसी मेडिकल टेक्नीशियनों (EMT) ने गुरुवार, 16 अक्टूबर 2026 की रात आठ बजे से 40 घंटे की सांकेतिक कार्यबंदी शुरू कर दी है, जो शनिवार, 17 अक्टूबर की सुबह आठ बजे तक जारी रहेगी। जुलाई 2026 से बकाया वेतन, बर्खास्त कर्मचारियों की बहाली और वैधानिक सुविधाओं की माँग इस आंदोलन की मुख्य वजह है। कर्मचारी संघ ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि 21 अक्टूबर तक ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो राज्यव्यापी अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू की जाएगी।

मुख्य घटनाक्रम

झारखंड प्रदेश एंबुलेंस कर्मचारी संघ के अनुसार, एंबुलेंस चालक और EMT जुलाई 2026 से वेतन नहीं पा रहे हैं। इस देरी के कारण कर्मचारियों को गंभीर आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है। हड़ताल के दौरान कर्मचारी रांची के नामकुम स्थित राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) कार्यालय के सामने धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं।

इससे पहले अक्टूबर के पहले पखवाड़े में कर्मचारियों ने काला बिल्ला लगाकर काम करने, कैंडल मार्च और जिला मुख्यालयों में भिक्षाटन जैसे प्रतीकात्मक प्रदर्शन किए थे — यह आंदोलन के उस क्रमिक विस्तार का हिस्सा है जो अब अपने तीव्र चरण में पहुँच गया है।

कर्मचारियों की प्रमुख माँगें

संघ ने कई माँगें सामने रखी हैं। इनमें जुलाई 2026 से बकाया वेतन का तत्काल भुगतान, बर्खास्त या सेवा से हटाए गए कर्मियों की बहाली, श्रम विभाग द्वारा निर्धारित न्यूनतम वेतन, EPF और ESI जैसी वैधानिक सुविधाएँ, ओवरटाइम भुगतान और नौकरी की सुरक्षा शामिल हैं।

संघ की एक अहम माँग यह भी है कि 108 एंबुलेंस सेवा का संचालन निजी एजेंसियों के बजाय जिला स्तर पर सिविल सर्जन के माध्यम से किया जाए और वेतन सीधे राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन द्वारा दिया जाए। साथ ही, कर्मचारियों की सेवा अवधि 60 वर्ष तक सुनिश्चित करने की माँग है, ताकि सेवा प्रदाता एजेंसी बदलने पर नौकरी खतरे में न पड़े।

सरकार की प्रतिक्रिया

संघ के अनुसार, इन मुद्दों पर 16 सितंबर 2026 को स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी की अध्यक्षता में एक बैठक हुई थी। उस बैठक में कर्मचारियों की समस्याओं के समाधान के लिए 15 से 20 दिनों का समय दिया गया था। संघ का कहना है कि वह समयसीमा बीत जाने के बाद भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई, जिससे कर्मचारियों में असंतोष और गहरा हो गया।

आम जनता पर असर

यह हड़ताल ऐसे समय में आई है जब 108 एंबुलेंस सेवा झारखंड के ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में आपातकालीन चिकित्सा सहायता की रीढ़ मानी जाती है। कार्यबंदी के दौरान गंभीर रोगियों और प्रसव संबंधी आपात स्थितियों में देरी का खतरा बना रहता है। गौरतलब है कि राज्य के कई जिलों में सरकारी परिवहन के विकल्प सीमित हैं।

क्या होगा आगे

संघ ने स्पष्ट किया है कि 21 अक्टूबर 2026 से राज्यव्यापी अनिश्चितकालीन हड़ताल की घोषणा की जा सकती है, यदि सरकार और NHM की ओर से ठोस आश्वासन नहीं मिला। यह झारखंड की सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं के लिए एक निर्णायक क्षण साबित हो सकता है — और राज्य सरकार पर समयबद्ध समाधान की जिम्मेदारी अब और अधिक बढ़ गई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो ग्रामीण झारखंड में आपातकालीन चिकित्सा सेवाएँ गंभीर रूप से प्रभावित होंगी — और इसकी सबसे बड़ी कीमत वे मरीज़ चुकाएँगे जिनके पास कोई विकल्प नहीं है।
RashtraPress
16 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

झारखंड में 108 एंबुलेंस हड़ताल क्यों हो रही है?
झारखंड प्रदेश एंबुलेंस कर्मचारी संघ के अनुसार, कर्मचारियों का जुलाई 2026 से वेतन बकाया है और उन्हें EPF, ESI जैसी वैधानिक सुविधाएँ नहीं मिल रहीं। बर्खास्त कर्मचारियों की बहाली और नौकरी सुरक्षा भी माँगों में शामिल है।
108 एंबुलेंस हड़ताल कब तक चलेगी?
यह 40 घंटे की सांकेतिक कार्यबंदी 16 अक्टूबर 2026 की रात आठ बजे से शुरू होकर 17 अक्टूबर की सुबह आठ बजे तक जारी रहेगी। यदि माँगें नहीं मानी गईं तो 21 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल की चेतावनी दी गई है।
झारखंड सरकार ने एंबुलेंस कर्मचारियों के मुद्दे पर क्या किया?
स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी की अध्यक्षता में 16 सितंबर 2026 को एक बैठक हुई थी, जिसमें 15 से 20 दिनों में समाधान का आश्वासन दिया गया था। संघ का कहना है कि वह समयसीमा बीत जाने के बाद भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
एंबुलेंस संघ की प्रमुख संरचनात्मक माँगें क्या हैं?
संघ चाहता है कि 108 एंबुलेंस सेवा का संचालन निजी एजेंसियों के बजाय जिला स्तर पर सिविल सर्जन के माध्यम से हो और वेतन सीधे NHM दे। इसके अलावा कर्मचारियों की सेवा अवधि 60 वर्ष तक सुनिश्चित करने की माँग है।
इस हड़ताल का आम जनता पर क्या असर पड़ेगा?
108 एंबुलेंस सेवा झारखंड के ग्रामीण और दूरदराज इलाकों में आपातकालीन चिकित्सा सहायता का प्रमुख साधन है। हड़ताल के दौरान गंभीर रोगियों और प्रसव जैसी आपात स्थितियों में देरी का खतरा बढ़ जाता है, खासकर जहाँ परिवहन के वैकल्पिक साधन सीमित हैं।
राष्ट्र प्रेस
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