14 अक्टूबर 2026
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झारखंड में डॉक्टरों का आंदोलन: मेडिकल प्रोटेक्शन एक्ट लागू करने समेत 7 मांगें, 22 अक्टूबर से कार्य बहिष्कार की चेतावनी

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झारखंड में डॉक्टरों का आंदोलन: मेडिकल प्रोटेक्शन एक्ट लागू करने समेत 7 मांगें, 22 अक्टूबर से कार्य बहिष्कार की चेतावनी

सारांश

झारखंड के डॉक्टर मेडिकल प्रोटेक्शन एक्ट लागू करने समेत सात मांगों को लेकर सड़क पर उतरे। रांची के RIMS और सदर अस्पताल में प्रदर्शन हुआ। सरकार ने जवाब न दिया तो 21 अक्टूबर को राज्यव्यापी प्रदर्शन और 22 अक्टूबर से पूर्ण कार्य बहिष्कार की चेतावनी दी गई है।

मुख्य बातें

IMA झारखंड के नेतृत्व में 14 अक्टूबर 2026 को रांची के RIMS और सदर अस्पताल में सैकड़ों डॉक्टरों ने काला बिल्ला लगाकर प्रदर्शन किया।
प्रमुख मांगों में झारखंड मेडिकल प्रोटेक्शन एक्ट का कड़ाई से क्रियान्वयन और DACP लागू करना शामिल है।
आयुष्मान भारत के तहत अस्पतालों का बकाया भुगतान, सिंगल-विंडो लाइसेंसिंग और महिला चिकित्सकों के लिए सुरक्षित कार्यस्थल की भी माँग।
आंदोलन के दौरान आपातकालीन सेवाएँ पूरी तरह जारी रखी गई हैं।
सरकार ने सकारात्मक पहल न की तो 21 अक्टूबर को राज्यव्यापी प्रदर्शन और 22 अक्टूबर 2026 से पूर्ण कार्य बहिष्कार की चेतावनी दी गई है।

इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) की झारखंड इकाई के बैनर तले राज्यभर के चिकित्सकों ने 14 अक्टूबर 2026 को झारखंड मेडिकल प्रोटेक्शन एक्ट को कड़ाई से लागू करने सहित सेवा शर्तों से जुड़ी सात प्रमुख मांगों को लेकर प्रदर्शन किया। सरकारी, निजी, जूनियर और वरिष्ठ — सैकड़ों डॉक्टरों ने रांची स्थित राजेंद्र इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (RIMS) और सदर अस्पताल में ड्यूटी के दौरान काला बिल्ला लगाकर विरोध दर्ज कराया। एक प्रतिनिधिमंडल ने निदेशक कार्यालय पहुँचकर मांगों से संबंधित ज्ञापन सौंपा।

मुख्य मांगें

IMA झारखंड के अनुसार, आंदोलन का केंद्रीय उद्देश्य राज्य में चिकित्सकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और स्वास्थ्य व्यवस्था को मज़बूत बनाना है। प्रदर्शनकारियों की मांगों में शामिल हैं — झारखंड मेडिकल प्रोटेक्शन एक्ट का कठोर क्रियान्वयन; क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट में व्यावहारिक संशोधन; केंद्र और बिहार की तर्ज पर मेडिकल, डेंटिस्ट और विशेषज्ञ डॉक्टरों के लिए डायनामिक एश्योर्ड करियर प्रोग्रेशन (DACP) लागू करना; आयुष्मान भारत योजना के तहत अस्पतालों का बकाया भुगतान; सिंगल-विंडो सिस्टम से लाइसेंस व पंजीकरण प्रक्रिया को सरल बनाना; जूनियर डॉक्टरों की नियुक्ति व सेवा शर्तों में सुधार; और महिला चिकित्सकों के लिए सुरक्षित कार्यस्थल की गारंटी।

आंदोलन की पृष्ठभूमि

यह प्रदर्शन ऐसे समय में आया है जब देशभर में डॉक्टरों पर हमलों की घटनाएँ चिंता का विषय बनी हुई हैं। गौरतलब है कि 2023 के बाद से अस्पतालों में हिंसा की बढ़ती घटनाओं के बीच कई राज्यों में मेडिकल प्रोटेक्शन कानूनों की माँग उठती रही है। झारखंड में यह कानून मौजूद है, लेकिन IMA के अनुसार इसे प्रभावी ढंग से लागू नहीं किया जा रहा। DACP की माँग भी नई नहीं है — केंद्र सरकार के अधीन डॉक्टरों को यह लाभ पहले से मिल रहा है, जबकि झारखंड के राज्य सरकारी चिकित्सक इससे वंचित हैं।

आपातकालीन सेवाएँ जारी

चिकित्सा संगठनों ने स्पष्ट किया है कि यह आंदोलन मरीजों या स्वास्थ्य सेवाओं के विरुद्ध नहीं है। आंदोलन के दौरान आपातकालीन और जीवनरक्षक चिकित्सा सेवाएँ पूरी तरह बहाल रखी गई हैं, ताकि मरीजों को कोई असुविधा न हो।

22 अक्टूबर से पूर्ण कार्य बहिष्कार की चेतावनी

IMA की ओर से जारी पत्र के अनुसार, यदि राज्य सरकार ने मांगों पर सकारात्मक पहल नहीं की, तो 21 अक्टूबर 2026 को राज्यव्यापी विरोध प्रदर्शन किया जाएगा। इसके बाद भी ठोस कदम न उठाए जाने की स्थिति में 22 अक्टूबर 2026 से राज्यभर के डॉक्टर पूर्ण कार्य बहिष्कार पर जाने के लिए बाध्य होंगे।

प्रदर्शन में शामिल प्रमुख चिकित्सक

बुधवार के प्रदर्शन में IMA झारखंड के सचिव डॉ. प्रदीप सिंह, IMA HBI के स्टेट कोऑर्डिनेटर डॉ. अभिषेक रामाधीन, डॉ. शंभू सिंह, झारखंड चिकित्सा सेवा संघ के प्रतिनिधि डॉ. अजीत व डॉ. स्टीफन, जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. विकास, डॉ. जयदीप और झारखंड स्वास्थ्य कर्मचारी महासंघ के अध्यक्ष मो. आदिल सहित बड़ी संख्या में डॉक्टर व स्वास्थ्यकर्मी मौजूद रहे।

यदि झारखंड सरकार 21 अक्टूबर तक कोई ठोस प्रतिक्रिया नहीं देती, तो राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं पर व्यापक असर पड़ने की आशंका है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन उनका क्रियान्वयन कागज़ों तक सिमट जाता है — मेडिकल प्रोटेक्शन एक्ट इसका सबसे ताज़ा उदाहरण है। DACP जैसी माँग दर्शाती है कि राज्य सरकार अपने ही डॉक्टरों को वे सुविधाएँ देने में पीछे है जो केंद्र और पड़ोसी राज्य बिहार पहले ही दे चुके हैं — यह प्रशासनिक इच्छाशक्ति का सवाल है, संसाधनों का नहीं। आयुष्मान भारत का बकाया भुगतान न होना बताता है कि सरकारी स्वास्थ्य योजनाएँ ज़मीन पर अस्पतालों के लिए आर्थिक बोझ बन रही हैं। यदि 22 अक्टूबर को पूर्ण कार्य बहिष्कार हुआ, तो झारखंड के ग्रामीण और अर्ध-शहरी मरीज़ — जो पहले से कमज़ोर स्वास्थ्य ढाँचे पर निर्भर हैं — सबसे अधिक प्रभावित होंगे।
RashtraPress
14 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

झारखंड में डॉक्टरों का आंदोलन क्यों हो रहा है?
IMA झारखंड के नेतृत्व में डॉक्टर मेडिकल प्रोटेक्शन एक्ट को कड़ाई से लागू करने, DACP लागू करने, आयुष्मान भारत का बकाया भुगतान सुनिश्चित करने और महिला चिकित्सकों के लिए सुरक्षित कार्यस्थल जैसी सात मांगों को लेकर आंदोलन पर हैं। इन मांगों पर सरकार की निष्क्रियता के विरोध में 14 अक्टूबर 2026 को रांची में प्रदर्शन किया गया।
झारखंड डॉक्टर हड़ताल कब से शुरू होगी?
IMA के अनुसार, 21 अक्टूबर 2026 को पहले राज्यव्यापी विरोध प्रदर्शन होगा। यदि सरकार ने ठोस कदम नहीं उठाए, तो 22 अक्टूबर 2026 से पूर्ण कार्य बहिष्कार शुरू हो जाएगा।
DACP (डायनामिक एश्योर्ड करियर प्रोग्रेशन) क्या है और डॉक्टर इसकी माँग क्यों कर रहे हैं?
DACP एक करियर उन्नति योजना है जो केंद्र सरकार और बिहार राज्य के अधीन मेडिकल, डेंटल और विशेषज्ञ डॉक्टरों को समयबद्ध पदोन्नति सुनिश्चित करती है। झारखंड के राज्य सरकारी डॉक्टर अभी तक इससे वंचित हैं, इसलिए वे इसे लागू करने की माँग कर रहे हैं।
क्या हड़ताल के दौरान मरीजों को इलाज मिलेगा?
14 अक्टूबर के प्रदर्शन के दौरान आपातकालीन और जीवनरक्षक सेवाएँ पूरी तरह जारी रखी गई हैं। हालाँकि 22 अक्टूबर से पूर्ण कार्य बहिष्कार की स्थिति में स्वास्थ्य सेवाओं पर व्यापक असर पड़ सकता है।
झारखंड मेडिकल प्रोटेक्शन एक्ट क्या है?
झारखंड मेडिकल प्रोटेक्शन एक्ट एक राज्य कानून है जो चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों को कार्यस्थल पर हिंसा से बचाने के लिए बना है। IMA के अनुसार, यह कानून मौजूद होने के बावजूद प्रभावी ढंग से लागू नहीं किया जा रहा, जिसके चलते डॉक्टर असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।
राष्ट्र प्रेस
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