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झारखंड: 2,000 एंबुलेंस कर्मियों का जुलाई से बकाया मानदेय, 21 अक्टूबर से हड़ताल की चेतावनी; BJP ने मंत्री से माँगा इस्तीफा

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झारखंड: 2,000 एंबुलेंस कर्मियों का जुलाई से बकाया मानदेय, 21 अक्टूबर से हड़ताल की चेतावनी; BJP ने मंत्री से माँगा इस्तीफा

सारांश

झारखंड में जुलाई 2026 से बकाया मानदेय के चलते 2,000 एंबुलेंस कर्मी और 10 चिकित्सा संगठन एक साथ हड़ताल की दहलीज़ पर खड़े हैं। BJP ने स्वास्थ्य मंत्री पर 'रील बनाने' का तंज कसते हुए इस्तीफे की माँग की — और 21 अक्टूबर की डेडलाइन नज़दीक है।

मुख्य बातें

108 एंबुलेंस सेवा के करीब 2,000 कर्मचारियों को जुलाई 2026 से मानदेय नहीं मिला; राज्य में करीब 500 एंबुलेंस प्रभावित।
कर्मचारियों ने 21 अक्टूबर 2026 से अनिश्चितकालीन हड़ताल की चेतावनी दी है।
माँगों में बकाया मानदेय के अलावा ईपीएफ, ईएसआईसी, ओवरटाइम, ग्रेच्युटी और बर्खास्त कर्मचारियों की बहाली शामिल।
झारखंड के 10 चिकित्सा संगठनों ने संयुक्त आंदोलन शुरू किया; 22 अक्टूबर से कार्य बहिष्कार की चेतावनी।
डॉक्टरों की माँगों में मेडिकल प्रोटेक्शन एक्ट, DACP और नियमित नियुक्तियाँ प्रमुख।
BJP प्रवक्ता रमाकांत महतो ने स्वास्थ्य मंत्री डॉ.
इरफान अंसारी से नैतिकता के आधार पर इस्तीफे की माँग की।

झारखंड में 108 एंबुलेंस सेवा के करीब 2,000 कर्मचारियों को जुलाई 2026 से मानदेय नहीं मिला है और 10 चिकित्सा संगठनों ने संयुक्त आंदोलन की राह पकड़ी है — इस दोहरे संकट को लेकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने राँची में राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला है। पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता रमाकांत महतो ने स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी पर स्वास्थ्य व्यवस्था की अनदेखी का आरोप लगाते हुए उनसे नैतिकता के आधार पर इस्तीफे की माँग की है।

एंबुलेंस कर्मियों का संकट

भाजपा प्रवक्ता महतो के अनुसार, 108 एंबुलेंस सेवा से जुड़े करीब 2,000 चालक और इमरजेंसी मेडिकल टेक्नीशियन कई महीनों से बकाया मानदेय सहित अनेक माँगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। कर्मचारियों का आरोप है कि उन्हें जुलाई 2026 से भुगतान नहीं किया गया। राज्य में करीब 500 एंबुलेंस के संचालन से जुड़ा यह विवाद गंभीर आपातकालीन स्वास्थ्य जोखिम पैदा करता है।

कर्मचारियों ने माँगें पूरी नहीं होने पर 21 अक्टूबर 2026 से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने की चेतावनी दी है। बकाया मानदेय के अलावा उनकी माँगों में ईपीएफ, ईएसआईसी, ओवरटाइम, ग्रेच्युटी, न्यूनतम मजदूरी और बर्खास्त कर्मचारियों की बहाली भी शामिल हैं।

10 चिकित्सा संगठनों का संयुक्त मोर्चा

महतो ने बताया कि राज्य के 10 चिकित्सा संगठनों ने मिलकर आंदोलन का एलान किया है। डॉक्टर मेडिकल प्रोटेक्शन एक्ट लागू करने, कार्यस्थल पर सुरक्षा, डायनेमिक एश्योर्ड करियर प्रोग्रेशन (DACP), नियमित नियुक्तियों और सेवा संबंधी समस्याओं के त्वरित समाधान की माँग कर रहे हैं।

चिकित्सकों की कार्ययोजना के तहत 20 अक्टूबर तक काला बिल्ला लगाकर विरोध, 21 अक्टूबर को सांकेतिक आंदोलन, और माँगें न मानने पर 22 अक्टूबर से कार्य बहिष्कार की चेतावनी दी गई है। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब झारखंड के ग्रामीण जिलों में पहले से ही डॉक्टरों की भारी कमी बताई जाती है।

BJP की माँग और सरकार पर आरोप

भाजपा प्रवक्ता रमाकांत महतो ने सवाल उठाया कि जब कर्मचारियों को कई महीनों से मानदेय नहीं मिलने की शिकायत है, तो स्वास्थ्य विभाग ने अब तक क्या ठोस कदम उठाए। उन्होंने सरकार से बकाया भुगतान सुनिश्चित करने और संबंधित एजेंसी की जवाबदेही तय करने की माँग की।

महतो ने स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी पर तंज कसते हुए कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं में लगातार सामने आ रही समस्याओं की जिम्मेदारी लेते हुए उन्हें नैतिकता के आधार पर पद से इस्तीफा दे देना चाहिए।

आम मरीजों पर संभावित असर

एंबुलेंस कर्मचारियों और डॉक्टरों के एक साथ हड़ताल पर जाने की स्थिति में झारखंड की आपातकालीन स्वास्थ्य व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हो सकती है। महतो ने कहा कि 108 एंबुलेंस सेवा आपातकालीन स्वास्थ्य देखभाल का अहम स्तंभ है और इसके बाधित होने से मरीजों को गंभीर परेशानी झेलनी पड़ सकती है।

भाजपा ने माँग की है कि अस्पतालों में पर्याप्त चिकित्सक, नर्स, ज़रूरी दवाएँ और जाँच सुविधाएँ सुनिश्चित की जाएँ, साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में भी बेहतर स्वास्थ्य सेवाएँ मुहैया कराई जाएँ।

क्या होगा आगे

21 अक्टूबर की समय-सीमा नज़दीक है। यदि राज्य सरकार एंबुलेंस कर्मियों का बकाया जारी नहीं करती और चिकित्सकों की माँगों पर कोई ठोस आश्वासन नहीं देती, तो झारखंड के कई ज़िलों में एक साथ स्वास्थ्य सेवाएँ ठप हो सकती हैं। भाजपा ने स्वास्थ्य मंत्री से एंबुलेंस कर्मियों और चिकित्सकों की माँगों पर स्पष्ट रुख और समयबद्ध कार्ययोजना सामने रखने को कहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि महीनों से चले आ रहे इस बकाये का समाधान सरकार ने अब तक क्यों नहीं किया — और 21 अक्टूबर की डेडलाइन चूकने की कीमत मरीज़ों को चुकानी होगी।
RashtraPress
16 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

झारखंड में 108 एंबुलेंस कर्मचारी हड़ताल पर क्यों जाने की चेतावनी दे रहे हैं?
करीब 2,000 एंबुलेंस चालकों और इमरजेंसी मेडिकल टेक्नीशियनों को जुलाई 2026 से मानदेय नहीं मिला है। बकाया मानदेय के साथ-साथ ईपीएफ, ईएसआईसी, ओवरटाइम, ग्रेच्युटी और न्यूनतम मजदूरी जैसी माँगें भी लंबित हैं। माँगें पूरी न होने पर कर्मचारियों ने 21 अक्टूबर 2026 से अनिश्चितकालीन हड़ताल का ऐलान किया है।
झारखंड में 10 चिकित्सा संगठनों के डॉक्टर क्या माँग रहे हैं?
10 चिकित्सा संगठनों के डॉक्टर मेडिकल प्रोटेक्शन एक्ट लागू करने, कार्यस्थल पर सुरक्षा, डायनेमिक एश्योर्ड करियर प्रोग्रेशन (DACP), नियमित नियुक्तियों और सेवा संबंधी समस्याओं के समाधान की माँग कर रहे हैं। माँगें न मानने पर 22 अक्टूबर 2026 से कार्य बहिष्कार की चेतावनी दी गई है।
BJP ने झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी से इस्तीफा क्यों माँगा?
BJP के प्रदेश प्रवक्ता रमाकांत महतो ने आरोप लगाया कि स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी स्वास्थ्य व्यवस्था की अनदेखी कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि एंबुलेंस कर्मियों और डॉक्टरों की लंबित माँगों के बावजूद विभाग ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया, इसलिए मंत्री को नैतिकता के आधार पर पद छोड़ना चाहिए।
यदि एंबुलेंस कर्मचारी हड़ताल पर जाते हैं तो झारखंड पर क्या असर पड़ेगा?
राज्य में चल रही करीब 500 एंबुलेंस के बाधित होने से आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाएँ गंभीर रूप से प्रभावित हो सकती हैं। ग्रामीण और दूरदराज़ के क्षेत्रों में जहाँ 108 एंबुलेंस एकमात्र त्वरित सेवा है, मरीजों को सबसे ज़्यादा खतरा होगा।
झारखंड सरकार को कब तक समाधान करना होगा?
एंबुलेंस कर्मचारियों ने 21 अक्टूबर 2026 और डॉक्टरों ने 22 अक्टूबर 2026 को अपनी-अपनी कार्रवाई की समय-सीमा तय की है। BJP ने माँग की है कि सरकार इससे पहले बकाया भुगतान सुनिश्चित करे और एक ठोस समयबद्ध कार्ययोजना सार्वजनिक करे।
राष्ट्र प्रेस
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