झारखंड विधानसभा में मंत्री इरफान अंसारी का रिक्शा प्रदर्शन, महंगाई पर गरमाया सदन
सारांश
Key Takeaways
- रिक्शा प्रदर्शन के माध्यम से मुद्दे को उजागर किया गया।
- महंगाई और गैस की किल्लत ने लोगों को प्रभावित किया है।
- सदन में हंगामा और नारेबाजी हुई।
- राजनीतिक दलों के बीच तनातनी बढ़ी है।
- नेता प्रतिपक्ष ने आरोपों को खारिज किया।
रांची, १३ मार्च (राष्ट्र प्रेस)। एलपीजी और पेट्रोलियम उत्पादों की किल्लत को लेकर शुक्रवार को झारखंड विधानसभा परिसर में सरकार के मंत्रियों ने रिक्शा चलाकर विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान सदन के भीतर भी इस मुद्दे पर जोरदार हंगामा देखने को मिला।
राज्य के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी खुद रिक्शा चलाते हुए विधानसभा पहुंचे, जबकि रिक्शे पर कृषि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की सवार थीं। मंत्रियों का यह अंदाज न केवल सभी को चौंकाने वाला था, बल्कि सड़क से लेकर सदन तक सियासी माहौल को भी गरमा दिया।
विधानसभा के मुख्य द्वार पर रिक्शा रोककर मीडिया से बातचीत में स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी ने केंद्र सरकार पर तीखा आक्रमण किया। उन्होंने कहा कि केंद्र की गलत नीतियों और विफल विदेश नीति के कारण आज देश की स्थिति दयनीय हो चुकी है। महंगाई और बेरोजगारी ने आम आदमी की कमर तोड़ दी है, जिससे लोग बुनियादी जरूरतों के लिए भी कतारों में लगने को मजबूर हैं।
विरोध की यह आंच सदन की कार्यवाही शुरू होते ही वहां भी महसूस की गई। सत्ता पक्ष के विधायकों ने राज्य में एलपीजी सिलेंडर की बढ़ती कीमतों और किल्लत को लेकर शोर मचाना शुरू कर दिया। विधायक प्रदीप यादव ने हाथों में अखबार लहराते हुए आरोप लगाया कि गैस की कमी के कारण कई स्कूलों में 'मिड-डे मील' (मध्याह्न भोजन) प्रभावित हो रहा है और लोग सिलेंडर के लिए लंबी लाइनों में खड़े हैं। सत्ता पक्ष के विधायकों ने इस स्थिति के लिए सीधे तौर पर केंद्र सरकार को जिम्मेदार ठहराते हुए जोरदार नारेबाजी की।
वहीं, नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने सत्ता पक्ष के आरोपों को खारिज किया। उन्होंने कहा कि राज्य में गैस की कोई कमी नहीं है, यह पूरी तरह से प्रशासनिक व्यवस्था का सवाल है। मरांडी ने तंज कसते हुए कहा कि सरकार अपनी विफलताओं को छिपाने के लिए सदन में बेवजह हाय-तौबा मचा रही है।
उन्होंने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि दिल्ली में उनके नेता चर्चा से भागते हैं और यहां सदन की कार्यवाही बाधित कर रहे हैं। विधायक सरयू राय ने भी इस शोर-शराबे को अनावश्यक बताते हुए इसे प्रशासनिक मुद्दा करार दिया। सदन में लगातार बढ़ते हंगामे और दोनों पक्षों के बीच तीखी तनातनी को देखते हुए विधानसभा अध्यक्ष ने हस्तक्षेप किया और प्रश्न को यहीं छोड़कर कार्यवाही को आगे बढ़ाने का निर्देश दिया।