झारखंड विधानसभा में रसोई गैस और कॉमर्शियल सिलेंडरों की किल्लत पर मंत्री की चिंता

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झारखंड विधानसभा में रसोई गैस और कॉमर्शियल सिलेंडरों की किल्लत पर मंत्री की चिंता

सारांश

झारखंड विधानसभा में रसोई गैस और कॉमर्शियल सिलेंडरों की आपूर्ति में गंभीर कमी का मुद्दा उठाया गया। मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने उपभोक्ताओं की चिंताओं को साझा करते हुए स्थिति को चिंताजनक बताया। जानिए इस संकट का क्या असर हो रहा है।

Key Takeaways

  • गैस की किल्लत का मुद्दा विधानसभा में उठाया गया।
  • उपभोक्ताओं को गैस की आपूर्ति में लंबा इंतजार करना पड़ रहा है।
  • राज्य में कॉमर्शियल गैस की आपूर्ति में भारी कमी आई है।
  • यह संकट औद्योगिक गतिविधियों और जीएसटी राजस्व पर प्रभाव डाल सकता है।
  • राज्य और केंद्र सरकारों को मिलकर ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है।

रांची, १६ मार्च (राष्ट्र प्रेस)। झारखंड विधानसभा के बजट सत्र के १५वें दिन राज्य में रसोई गैस और कॉमर्शियल सिलेंडरों की गंभीर किल्लत का मुद्दा सदन में प्रमुखता से उठाया गया। संसदीय कार्यमंत्री राधाकृष्ण किशोर ने बताया कि घरेलू और व्यावसायिक गैस सिलेंडरों की आपूर्ति व्यवस्था में आई बाधाओं के कारण आम उपभोक्ताओं को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

मंत्री ने कहा कि जो आपूर्ति पहले बुकिंग के ४८ घंटों के भीतर सुनिश्चित होती थी, वह अब शहरी क्षेत्रों में ५ से २५ दिन और ग्रामीण क्षेत्रों में लगभग ४५ दिनों के लंबे इंतजार में बदल गई है। यह स्थिति उपभोक्ताओं के लिए चिंताजनक बन गई है। सदन में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, तेल कंपनियों के पास रिफिलिंग के लिए सिलेंडरों का बड़ा भंडार जमा है।

वर्तमान में आईओएल, हिंदुस्तान पेट्रोलियम और भारत पेट्रोलियम के पास लगभग ३,२७,६३० सिलेंडर रिफिलिंग के लिए लंबित हैं, जिससे वितरण श्रृंखला पर भारी दबाव बना हुआ है। इस आपूर्ति में बाधा का सबसे बुरा असर ग्रामीण क्षेत्रों के उपभोक्ताओं पर पड़ रहा है, जिन्हें समय पर गैस न मिलने के कारण पुराने ईंधन साधनों पर निर्भर होना पड़ रहा है।

मंत्री ने कॉमर्शियल गैस सिलेंडरों की आपूर्ति में कमी पर भी चिंता जताई। उन्होंने बताया कि राज्य में व्यावसायिक गैस की आपूर्ति ८० प्रतिशत से घटकर केवल २० प्रतिशत रह गई है। झारखंड में कॉमर्शियल गैस की मासिक आवश्यकता लगभग २,२७३ मीट्रिक टन है, जबकि वर्तमान में केवल ४५४ मीट्रिक टन गैस ही उपलब्ध हो रही है। इस प्रकार राज्य १,११८ मीट्रिक टन गैस की कमी का सामना कर रहा है।

इस संकट का सीधा असर होटल, रेस्तरां और छोटे औद्योगिक प्रतिष्ठानों पर पड़ रहा है, जिससे न केवल औद्योगिक गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं, बल्कि राज्य के जीएसटी राजस्व को भी खतरा है। संसदीय कार्य मंत्री ने वैश्विक बाजार में तेल और गैस की बढ़ती कीमतों को इस संकट का एक प्रमुख कारण बताया और कहा कि राज्य सरकार इस दिशा में गंभीर है, लेकिन केंद्र सरकार को भी इस राष्ट्रीय संकट के समाधान के लिए ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है।

Point of View

बल्कि इससे राज्य की औद्योगिक गतिविधियों और आर्थिक स्थिति पर भी गहरा प्रभाव पड़ सकता है।
NationPress
20/03/2026

Frequently Asked Questions

झारखंड में गैस की किल्लत का मुख्य कारण क्या है?
गैस की किल्लत का मुख्य कारण आपूर्ति व्यवस्था में आई बाधाएं और वैश्विक बाजार में तेल की बढ़ती कीमतें हैं।
कॉमर्शियल गैस की आपूर्ति में कमी कितनी है?
राज्य में कॉमर्शियल गैस की आपूर्ति 80 प्रतिशत से घटकर केवल 20 प्रतिशत रह गई है।
यह संकट किन उपभोक्ताओं को प्रभावित कर रहा है?
यह संकट विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों के उपभोक्ताओं और छोटे औद्योगिक प्रतिष्ठानों को प्रभावित कर रहा है।
राज्य सरकार इस समस्या का समाधान कैसे करेगी?
राज्य सरकार इस दिशा में गंभीर है और केंद्र सरकार से ठोस कदम उठाने की अपील कर रही है।
क्या इस संकट का असर जीएसटी राजस्व पर पड़ेगा?
हाँ, इस संकट का असर औद्योगिक गतिविधियों पर पड़ने से राज्य के जीएसटी राजस्व को भी नुकसान पहुंच सकता है।
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