गैस की आपूर्ति में कोई कमी नहीं, घरेलू उपभोक्ताओं के लिए राहत: गैस डिस्ट्रीब्यूटर्स एसोसिएशन
सारांश
Key Takeaways
- घरेलू उपभोक्ताओं के लिए गैस की कमी नहीं है।
- वाणिज्यिक ग्राहकों के लिए गैस डिलीवरी बंद है।
- होटल और कैटरिंग व्यवसाय पर गंभीर प्रभाव।
- सरकार को शीघ्र समाधान करना चाहिए।
- गैस की कमी से कीमतें बढ़ने की संभावना।
हुबली, ११ मार्च (राष्ट्र प्रेस)। पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष का प्रभाव अब भारत में एलपीजी और गैस आपूर्ति पर भी दिखने लगा है। कर्नाटक के विभिन्न शहरों में गैस की आपूर्ति को लेकर चिंताएं बढ़ने लगी हैं। कर्नाटक के हुबली में गैस डिस्ट्रीब्यूटर्स एसोसिएशन के नेता सुरेशा ने राष्ट्र प्रेस को बताया कि घरेलू उपभोक्ताओं को वर्तमान में कोई कमी का सामना नहीं करना पड़ेगा।
उन्होंने यह भी बताया कि पहले घरेलू उपभोक्ताओं के लिए गैस सिलेंडर लेने का अंतराल २१ दिन था, जिसे अब ४ दिन बढ़ाकर २५ दिन कर दिया गया है। इसका मतलब है कि ग्राहक अब २५ दिन बाद गैस सिलेंडर ले सकेंगे।
हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि घरेलू उपभोक्ताओं के लिए गैस की कोई कमी नहीं है, लेकिन वाणिज्यिक ग्राहकों के लिए गैस की डिलीवरी फिलहाल रोक दी गई है।
इस निर्णय का असर होटल और कैटरिंग व्यवसाय पर पड़ा है। हुबली कैटरिंग एसोसिएशन के प्रमुख रत्नाकर शेट्टी ने कहा कि गैस की आपूर्ति की समस्या अत्यंत गंभीर हो गई है।
उन्होंने कहा, "अचानक गैस सप्लाई बंद होने से हमें बहुत कठिनाई हो रही है और कारोबार चलाना बेहद चुनौतीपूर्ण हो गया है। हमारा व्यवसाय न केवल हमारी रोजी-रोटी है, बल्कि लगभग १५० लोग हमारे साथ काम करते हैं और उनकी आजीविका भी इसी पर निर्भर है।"
रत्नाकर शेट्टी ने बताया कि इस समस्या को लेकर सभी व्यापारी एकजुट होकर सरकार से सहायता की गुहार कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार को जल्द से जल्द गैस सिलेंडर सप्लाई से जुड़ी समस्याओं का समाधान करना चाहिए।
वहीं, बेंगलुरु में कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने इस मुद्दे पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि देशभर में हालात गंभीर हो सकते हैं।
डीके शिवकुमार ने कहा, "पूरा देश इस समस्या का सामना कर रहा है। गैस की कमी के कारण कई होटल बंद होने की स्थिति में हैं। यदि यह स्थिति बनी रही, तो सभी चीजों के मूल्य बढ़ जाएंगे। लोग मजबूरी में लकड़ी, इलेक्ट्रिक स्टोव या केरोसिन स्टोव का सहारा लेने लगेंगे। लेकिन केरोसिन भी सभी को उपलब्ध नहीं है।"
उन्होंने केंद्र सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा कि इस मुद्दे पर संसद में चर्चा होनी चाहिए, क्योंकि विदेश नीति और सप्लायर देशों के साथ संबंध अब सीधे देश की सप्लाई पर प्रभाव डाल रहे हैं।