झारखंड: स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी से वार्ता के बाद 108 एंबुलेंस कर्मियों ने हड़ताल वापस ली
सारांश
मुख्य बातें
झारखंड में 108 एंबुलेंस सेवा के कर्मियों ने बुधवार, 16 सितंबर 2026 को स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी के साथ हुई बैठक के बाद 25 सितंबर की प्रस्तावित पूर्ण हड़ताल और 28 सितंबर से प्रस्तावित अनिश्चितकालीन हड़ताल वापस लेने की घोषणा की। बैठक में वेतन भुगतान में देरी, स्थानांतरण और कार्यस्थल सुविधाओं से जुड़ी शिकायतों पर सरकार ने जाँच का आश्वासन दिया।
बैठक में कौन-कौन शामिल रहे
स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग के मंत्री डॉ. इरफान अंसारी की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक में 108 एंबुलेंस कर्मियों के प्रतिनिधियों के साथ-साथ सेवा का संचालन करने वाली एजेंसी के प्रतिनिधि भी मौजूद रहे। अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अभियान निदेशक शशि प्रकाश झा और डीआईसी डॉ. सिद्धार्थ सान्याल भी बैठक में उपस्थित रहे।
कर्मियों की मुख्य शिकायतें
एंबुलेंस कर्मियों ने संचालन एजेंसी पर पूर्व में दिए गए आश्वासन पूरे न करने का आरोप लगाया। उनकी प्रमुख शिकायतें वेतन भुगतान में देरी, स्थानांतरण में अनियमितता और कार्य से जुड़ी सुविधाओं में कमी से संबंधित थीं। कर्मियों ने विशेष रूप से स्थानांतरित कर्मचारियों के मामलों की स्वतंत्र जाँच की माँग की।
एजेंसी का पक्ष
संचालन एजेंसी के प्रतिनिधियों ने वेतन न देने या कम देने के आरोपों को गलत बताया। एजेंसी की ओर से कहा गया कि कर्मियों को नियमानुसार वेतन और सुविधाएँ प्रदान की जा रही हैं। एजेंसी ने यह भी कहा कि कुछ ड्राइवरों और कर्मियों का स्थानांतरण उनकी कार्य में रुचि न होने के कारण किया गया।
सरकार का आश्वासन और हड़ताल वापसी
दोनों पक्षों की बात सुनने के बाद मंत्री डॉ. इरफान अंसारी और अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह ने कर्मियों की शिकायतों की जाँच कराने और विशेष रूप से स्थानांतरण से जुड़े मामलों में आवश्यक कार्रवाई का भरोसा दिया। इसके बाद कर्मियों ने 25 सितंबर की प्रस्तावित पूर्ण हड़ताल और 28 सितंबर से की जाने वाली अनिश्चितकालीन हड़ताल वापस लेने की घोषणा की।
चरणबद्ध आंदोलन का था खाका
गौरतलब है कि एंबुलेंस कर्मियों के संघ ने पहले से एक चरणबद्ध आंदोलन कार्यक्रम घोषित किया था। इसके तहत 14 सितंबर से काला बिल्ला लगाकर विरोध, 19 सितंबर को कैंडल मार्च, 21 सितंबर को भिक्षाटन और 23 सितंबर को धरना-प्रदर्शन प्रस्तावित था। बुधवार की वार्ता के बाद इन कार्यक्रमों के बारे में संघ की ओर से अलग से स्थिति स्पष्ट की जानी है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में आया है जब राज्य में आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं की निरंतरता एक अहम सार्वजनिक चिंता का विषय बनी हुई है।