सविता पूनिया को पद्मश्री: 'द ग्रेट वॉल' बोलीं — अगर मैं कर सकती हूं, तो देश की हर बेटी कर सकती है
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय महिला हॉकी टीम की पूर्व कप्तान और मौजूदा गोलकीपर सविता पूनिया को 23 जून 2026 को राष्ट्रपति भवन में आयोजित पद्म पुरस्कार समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के हाथों पद्मश्री से सम्मानित किया गया। यह सम्मान पाने के बाद सविता ने श्रेय अपने परिवार को दिया और कहा कि उनकी यह यात्रा देश की हर बेटी के लिए एक प्रेरणा है।
सविता पूनिया का संघर्ष और सम्मान
महिला हॉकी की दुनिया में 'द ग्रेट वॉल ऑफ इंडिया' के नाम से मशहूर सविता पूनिया लगातार तीन बार एफआईएच गोलकीपर ऑफ द ईयर का पुरस्कार जीतने वाली पहली भारतीय महिला हैं — एक ऐसी उपलब्धि जो उन्हें विश्व हॉकी के इतिहास में विशेष स्थान देती है। पद्मश्री मिलने के बाद उन्होंने कहा, "यह सम्मान अपने आप में बहुत बड़ा है। मैंने जब हॉकी खेलना शुरू किया था, तो कभी नहीं सोचा था कि मेरा सफर इतना लंबा होगा। मुझे इतने बड़े व्यक्तिगत सम्मान से सम्मानित किया जाएगा। यह मेरे, मेरे परिवार और मेरी टीम के लिए बहुत बड़ी बात है।"
सविता ने स्वीकार किया कि उनके करियर में कई ऐसे मोड़ आए जब उन्हें लगा कि हॉकी छोड़नी पड़ सकती है, लेकिन परिवार के अटूट समर्थन ने उन्हें मैदान पर टिकाए रखा। उन्होंने कहा, "जब एक लड़की होने के बावजूद मध्यमवर्गीय परिवार में आपको इतना समर्थन मिलता है, तो यह बेहद खास होता है। अगर सविता ऐसा कर सकती है, तो अन्य बेटियां भी ऐसा कर सकती हैं।"
विजय अमृतराज को पद्म भूषण
इसी समारोह में टेनिस के दिग्गज विजय अमृतराज को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने पद्म भूषण से सम्मानित किया। भारत के महानतम ओपन एरा टेनिस खिलाड़ी ने अपने करियर में 16 एटीपी एकल खिताब — जो एक एशियन रिकॉर्ड है — और 13 युगल खिताब अपने नाम किए। वह 14 वर्षों तक एशियन नंबर-1 रैंकिंग पर काबिज रहे।
रोहित शर्मा को भी पद्मश्री
भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान रोहित शर्मा को भी इसी समारोह में पद्मश्री से नवाजा गया। राष्ट्रपति मुर्मू ने क्रिकेट में उनके असाधारण योगदान और विश्व कप विजेता कप्तान के रूप में उनकी भूमिका को देखते हुए यह सम्मान प्रदान किया। मई में आयोजित पहले समारोह में शामिल न हो पाने के कारण रोहित अपनी पत्नी रितिका सजदेह के साथ इस बार राष्ट्रपति भवन पहुंचे।
खेल जगत के लिए ऐतिहासिक दिन
गौरतलब है कि एक ही समारोह में हॉकी, टेनिस और क्रिकेट — तीन अलग-अलग खेलों के दिग्गजों का एक साथ सम्मानित होना भारतीय खेल इतिहास की एक विशेष झलक है। यह ऐसे समय में आया है जब भारत में महिला खेलों को लेकर जागरूकता और निवेश दोनों में उल्लेखनीय वृद्धि हो रही है। सविता पूनिया जैसी खिलाड़ियों की कहानी न केवल हॉकी मैदान पर, बल्कि सामाजिक बदलाव की दिशा में भी एक मजबूत संदेश देती है।
आने वाले समय में यह सम्मान युवा खिलाड़ियों, विशेषकर ग्रामीण और मध्यमवर्गीय परिवारों की बेटियों को खेल में करियर बनाने के लिए प्रेरित करता रहेगा।