सविता पूनिया को पद्म श्री: हॉकी इंडिया ने कहा — 'पूरी तरह सम्मान की हकदार'
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय महिला हॉकी टीम की अनुभवी गोलकीपर सविता पूनिया को 24 जून 2026 को राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने भारत के चौथे सबसे बड़े नागरिक सम्मान पद्म श्री से नवाज़ा। एक दशक से अधिक समय तक भारतीय गोलपोस्ट की अजेय प्रहरी रहीं सविता की इस उपलब्धि पर हॉकी इंडिया सहित पूरे खेल जगत ने बधाइयाँ दीं।
हॉकी इंडिया की प्रतिक्रिया
हॉकी इंडिया ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर अपनी पोस्ट में सविता को भारतीय खेल का 'सच्चा आइकन' बताया। संस्था ने लिखा, 'एक सच्चे आइकन के लिए पद्म श्री। भारतीय महिला हॉकी की दिग्गज खिलाड़ी सविता को भारतीय खेलों में उनके शानदार योगदान के लिए माननीय राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से पद्म श्री मिला। एक खिलाड़ी के लिए यह बहुत बड़ा सम्मान है, जिसने एक दशक से ज़्यादा समय तक भारत के गोल पोस्ट की रक्षा की है, और अपनी बेहतरीन प्रतिभा, हिम्मत और लीडरशिप से लाखों लोगों को प्रेरित किया है।' हॉकी इंडिया ने स्पष्ट रूप से कहा कि यह सम्मान सविता के योगदान को 'सही पहचान' देता है।
सविता की भावुक प्रतिक्रिया
पद्म श्री मिलने पर भावुक हुईं सविता ने कहा, 'मुझे बहुत अच्छा लग रहा है क्योंकि यह अपने आप में एक बहुत बड़ा अवॉर्ड है। जब मैंने हॉकी खेलना शुरू किया, तो मैंने कभी नहीं सोचा था कि मेरा सफर इतना लंबा होगा और मुझे इतना बड़ा व्यक्तिगत सम्मान मिलेगा। यह मेरे, मेरे परिवार और मेरी टीम के लिए बहुत बड़ी बात है।' उन्होंने यह भी जोड़ा कि यह पुरस्कार केवल उनका नहीं, बल्कि उन सभी का है जो उनके संघर्ष के सफर में साथ खड़े रहे।
परिवार का सहारा — मुश्किलों में भी डटी रहीं
सविता ने अपने करियर की चुनौतियों का ज़िक्र करते हुए कहा कि कई बार ऐसे हालात बने जब उन्हें लगा कि खेलना बंद करना पड़ेगा। उन्होंने कहा, 'हालांकि, मेरे परिवार के सपोर्ट की वजह से मैंने अपना हॉकी का सफर जारी रखा। आज मेरा परिवार मेरे साथ है, और सब बहुत खुश हैं। एक मिडिल-क्लास परिवार की लड़की होने के नाते, अपने माता-पिता से इतना सपोर्ट मिलना बहुत खास लगता है।' यह स्वीकारोक्ति उनके संघर्ष को और भी प्रेरणादायक बनाती है।
युवा पीढ़ी के लिए संदेश
सविता ने देशभर की युवा लड़कियों को संबोधित करते हुए कहा, 'सभी के लिए एक अच्छा उदाहरण सेट होता है कि अगर सविता यह कर सकती है, तो हमारी लड़कियाँ भी कर सकती हैं। अगर आप किसी भी फील्ड में हैं, तो आपमें पैशन, डेडिकेशन और सब्र होना चाहिए। आज की पीढ़ी जल्दी नतीजे चाहती है, लेकिन स्पोर्ट्स में आपको कई चुनौतियों और संघर्षों का सामना करना पड़ता है। चोटें खेल का एक बड़ा हिस्सा हैं। सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं है।'
सविता का करियर — एक नज़र में
भारतीय हॉकी इतिहास की सबसे कामयाब गोलकीपरों में से एक, सविता ने 20 वर्ष की उम्र में सीनियर अंतरराष्ट्रीय डेब्यू किया और तब से विश्व की शीर्ष गोलकीपरों में अपनी जगह पक्की की। 2025 में वह पीआर श्रीजेश के बाद 300 अंतरराष्ट्रीय कैप पूरे करने वाली दूसरी भारतीय गोलकीपर बनीं — एक ऐसा कीर्तिमान जो उनकी दीर्घकालिक प्रतिबद्धता और सर्वोच्च स्तर पर निरंतर प्रदर्शन की गवाही देता है। यह पद्म श्री सम्मान उनके उस पूरे सफर की आधिकारिक स्वीकृति है।