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सविता पूनिया को पद्म श्री: हॉकी इंडिया ने कहा — 'पूरी तरह सम्मान की हकदार'

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सविता पूनिया को पद्म श्री: हॉकी इंडिया ने कहा — 'पूरी तरह सम्मान की हकदार'

सारांश

एक मिडिल-क्लास परिवार से निकलकर भारत के गोलपोस्ट की अजेय प्रहरी बनीं सविता पूनिया को 24 जून को पद्म श्री से नवाज़ा गया। 300 से अधिक अंतरराष्ट्रीय कैप और एक दशक से ज़्यादा की सेवा — यह सम्मान सिर्फ एक खिलाड़ी का नहीं, लाखों युवा लड़कियों के सपनों की जीत है।

मुख्य बातें

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने 24 जून 2026 को राष्ट्रपति भवन में सविता पूनिया को पद्म श्री से सम्मानित किया।
हॉकी इंडिया ने सविता को भारतीय खेल का 'सच्चा आइकन' बताते हुए एक्स पर बधाई दी।
2025 में सविता पीआर श्रीजेश के बाद 300 अंतरराष्ट्रीय कैप पूरे करने वाली दूसरी भारतीय गोलकीपर बनीं।
सविता ने 20 वर्ष की उम्र में सीनियर अंतरराष्ट्रीय डेब्यू किया और एक दशक से अधिक समय तक भारतीय गोलपोस्ट की रक्षा की।
सविता ने कहा कि मिडिल-क्लास परिवार से आने के बावजूद माता-पिता के सपोर्ट ने उनका सफर जारी रखवाया।

भारतीय महिला हॉकी टीम की अनुभवी गोलकीपर सविता पूनिया को 24 जून 2026 को राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने भारत के चौथे सबसे बड़े नागरिक सम्मान पद्म श्री से नवाज़ा। एक दशक से अधिक समय तक भारतीय गोलपोस्ट की अजेय प्रहरी रहीं सविता की इस उपलब्धि पर हॉकी इंडिया सहित पूरे खेल जगत ने बधाइयाँ दीं।

हॉकी इंडिया की प्रतिक्रिया

हॉकी इंडिया ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर अपनी पोस्ट में सविता को भारतीय खेल का 'सच्चा आइकन' बताया। संस्था ने लिखा, 'एक सच्चे आइकन के लिए पद्म श्री। भारतीय महिला हॉकी की दिग्गज खिलाड़ी सविता को भारतीय खेलों में उनके शानदार योगदान के लिए माननीय राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से पद्म श्री मिला। एक खिलाड़ी के लिए यह बहुत बड़ा सम्मान है, जिसने एक दशक से ज़्यादा समय तक भारत के गोल पोस्ट की रक्षा की है, और अपनी बेहतरीन प्रतिभा, हिम्मत और लीडरशिप से लाखों लोगों को प्रेरित किया है।' हॉकी इंडिया ने स्पष्ट रूप से कहा कि यह सम्मान सविता के योगदान को 'सही पहचान' देता है।

सविता की भावुक प्रतिक्रिया

पद्म श्री मिलने पर भावुक हुईं सविता ने कहा, 'मुझे बहुत अच्छा लग रहा है क्योंकि यह अपने आप में एक बहुत बड़ा अवॉर्ड है। जब मैंने हॉकी खेलना शुरू किया, तो मैंने कभी नहीं सोचा था कि मेरा सफर इतना लंबा होगा और मुझे इतना बड़ा व्यक्तिगत सम्मान मिलेगा। यह मेरे, मेरे परिवार और मेरी टीम के लिए बहुत बड़ी बात है।' उन्होंने यह भी जोड़ा कि यह पुरस्कार केवल उनका नहीं, बल्कि उन सभी का है जो उनके संघर्ष के सफर में साथ खड़े रहे।

परिवार का सहारा — मुश्किलों में भी डटी रहीं

सविता ने अपने करियर की चुनौतियों का ज़िक्र करते हुए कहा कि कई बार ऐसे हालात बने जब उन्हें लगा कि खेलना बंद करना पड़ेगा। उन्होंने कहा, 'हालांकि, मेरे परिवार के सपोर्ट की वजह से मैंने अपना हॉकी का सफर जारी रखा। आज मेरा परिवार मेरे साथ है, और सब बहुत खुश हैं। एक मिडिल-क्लास परिवार की लड़की होने के नाते, अपने माता-पिता से इतना सपोर्ट मिलना बहुत खास लगता है।' यह स्वीकारोक्ति उनके संघर्ष को और भी प्रेरणादायक बनाती है।

युवा पीढ़ी के लिए संदेश

सविता ने देशभर की युवा लड़कियों को संबोधित करते हुए कहा, 'सभी के लिए एक अच्छा उदाहरण सेट होता है कि अगर सविता यह कर सकती है, तो हमारी लड़कियाँ भी कर सकती हैं। अगर आप किसी भी फील्ड में हैं, तो आपमें पैशन, डेडिकेशन और सब्र होना चाहिए। आज की पीढ़ी जल्दी नतीजे चाहती है, लेकिन स्पोर्ट्स में आपको कई चुनौतियों और संघर्षों का सामना करना पड़ता है। चोटें खेल का एक बड़ा हिस्सा हैं। सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं है।'

सविता का करियर — एक नज़र में

भारतीय हॉकी इतिहास की सबसे कामयाब गोलकीपरों में से एक, सविता ने 20 वर्ष की उम्र में सीनियर अंतरराष्ट्रीय डेब्यू किया और तब से विश्व की शीर्ष गोलकीपरों में अपनी जगह पक्की की। 2025 में वह पीआर श्रीजेश के बाद 300 अंतरराष्ट्रीय कैप पूरे करने वाली दूसरी भारतीय गोलकीपर बनीं — एक ऐसा कीर्तिमान जो उनकी दीर्घकालिक प्रतिबद्धता और सर्वोच्च स्तर पर निरंतर प्रदर्शन की गवाही देता है। यह पद्म श्री सम्मान उनके उस पूरे सफर की आधिकारिक स्वीकृति है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि क्या यह सम्मान तंत्रगत बदलाव की शुरुआत है या सिर्फ एकल उपलब्धि का उत्सव। भारतीय महिला हॉकी ने ओलंपिक सेमीफाइनल तक का सफर तय किया, फिर भी अवसंरचना और वेतन के मामले में पुरुष टीम से अंतर बना हुआ है। सविता का 'मिडिल-क्लास परिवार' वाला संदर्भ यह रेखांकित करता है कि प्रतिभा अभी भी व्यवस्थागत समर्थन के बिना संघर्ष करती है। पद्म श्री सम्मान तभी सार्थक होगा जब यह महिला हॉकी के लिए बेहतर बुनियादी ढाँचे और संसाधनों की माँग को भी बल दे।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सविता पूनिया को पद्म श्री कब और किसने दिया?
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने 24 जून 2026 को राष्ट्रपति भवन में सविता पूनिया को पद्म श्री से सम्मानित किया। पद्म श्री भारत का चौथा सबसे बड़ा नागरिक सम्मान है।
सविता पूनिया कौन हैं और उनका हॉकी करियर कैसा रहा है?
सविता पूनिया भारतीय महिला हॉकी टीम की अनुभवी गोलकीपर हैं, जिन्होंने 20 वर्ष की उम्र में सीनियर अंतरराष्ट्रीय डेब्यू किया। 2025 में वह पीआर श्रीजेश के बाद 300 अंतरराष्ट्रीय कैप पूरे करने वाली दूसरी भारतीय गोलकीपर बनीं।
हॉकी इंडिया ने सविता पूनिया के बारे में क्या कहा?
हॉकी इंडिया ने एक्स पर पोस्ट करते हुए सविता को भारतीय खेल का 'सच्चा आइकन' बताया। संस्था ने कहा कि यह सम्मान एक दशक से अधिक समय तक भारतीय हॉकी में उनके योगदान को सही पहचान देता है।
सविता पूनिया ने युवा खिलाड़ियों को क्या संदेश दिया?
सविता ने कहा कि सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं है और किसी भी क्षेत्र में पैशन, डेडिकेशन और सब्र ज़रूरी है। उन्होंने युवा लड़कियों को प्रेरित करते हुए कहा कि अगर वे यह कर सकती हैं, तो देश की हर लड़की भी कर सकती है।
सविता पूनिया के करियर में परिवार की क्या भूमिका रही?
सविता ने बताया कि कई बार ऐसे हालात बने जब उन्हें लगा कि खेलना बंद करना पड़ेगा, लेकिन परिवार के समर्थन ने उन्हें आगे बढ़ाया। एक मिडिल-क्लास परिवार से आने के बावजूद माता-पिता का सहयोग उनके लिए सबसे बड़ी ताकत रहा।
राष्ट्र प्रेस
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