पद्म पुरस्कार 2026: सविता पूनिया से सरदार सिद्धू तक, सम्मानित हस्तियों ने साझा किए संघर्ष और सफलता के अनुभव
सारांश
मुख्य बातें
राष्ट्रपति भवन, नई दिल्ली में 23 जून 2026 को आयोजित 'सिविल इन्वेस्टिचर सेरेमनी-2' से पूर्व, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के हाथों पद्म पुरस्कार प्राप्त करने वाली कई विशिष्ट हस्तियों ने अपनी भावनाएँ साझा कीं। खेल, समाज सेवा, चिकित्सा और मनोरंजन — चारों क्षेत्रों के सम्मानितों ने एक स्वर में कहा कि यह पुरस्कार उनके वर्षों के परिश्रम और समर्पण की स्वीकृति है।
मैदान से राष्ट्रपति भवन तक: सविता पूनिया का सफर
भारतीय महिला हॉकी टीम की अनुभवी गोलकीपर और पद्म पुरस्कार विजेता सविता पूनिया ने इस अवसर पर गहरी भावुकता व्यक्त की। उन्होंने कहा, 'बहुत अच्छा लग रहा है। यह अपने आप में एक बड़ा पुरस्कार है। मैंने कभी नहीं सोचा था कि मेरी जर्नी इतनी लंबी रहेगी और मुझे इतना बड़ा पुरस्कार मिलेगा। मेरे लिए, मेरे परिवार और मेरी टीम के लिए यह बहुत बड़ी बात है।'
सविता ने अपने संघर्ष के दिनों को याद करते हुए बताया कि एक मध्यमवर्गीय परिवार से आने के कारण राह आसान नहीं थी। उन्होंने स्वीकार किया, 'कई बार मैंने सोचा था कि मुझे खेलना छोड़ना पड़ेगा, लेकिन परिवार की सपोर्ट की वजह से मैंने अपना सफर जारी रखा।' युवा खिलाड़ियों को संदेश देते हुए उन्होंने कहा कि डेडिकेशन और पेशेंस ही सफलता की असली कुंजी है — कोई शॉर्टकट नहीं होता।
कचरे से कर्तव्य तक: सरदार इंदरजीत सिंह सिद्धू की प्रेरणादायक कहानी
समाज सेवा के क्षेत्र में पद्म पुरस्कार से सम्मानित सरदार इंदरजीत सिंह सिद्धू ने बताया कि उनकी यात्रा ताने और उपेक्षा के बीच शुरू हुई थी। उन्होंने कहा, 'पहले लोग मुझे अलग नजरिए से देखते थे और सवाल उठाते थे कि मैं कचरे के साथ क्यों काम कर रहा हूँ, लेकिन अब वे मेरे काम की तारीफ करते हैं।'
सिद्धू ने बताया कि उनके परिवार की सैन्य पृष्ठभूमि ने उनमें स्वच्छता के संस्कार डाले। 1996 में सेवानिवृत्ति के बाद उन्होंने स्वच्छता अभियान को अपना मिशन बना लिया। उन्होंने कहा, 'जहाँ भी गंदगी देखता था, मुझे बुरा लगता था और उसे उठाकर डस्टबिन में डालना शुरू कर देता था।' उन्होंने इस सम्मान के लिए सरकार का आभार व्यक्त करते हुए हर नागरिक से अपने इलाके की सफाई की जिम्मेदारी लेने का आग्रह किया।
चिकित्सा विज्ञान में योगदान: प्रोफेसर प्रतीक शर्मा
गैस्ट्रोएंटरोलॉजी के क्षेत्र में पद्म श्री से सम्मानित प्रोफेसर प्रतीक शर्मा ने इस पुरस्कार को 'गौरव और विनम्रता दोनों का विषय' बताया। उन्होंने कहा, 'यह सम्मान मिलना मेरे लिए सम्मान की बात है — इससे विनम्रता का एहसास होता है, लेकिन साथ ही बहुत उत्साह और खुशी भी होती है कि आपके काम को पहचान मिली है।'
प्रोफेसर शर्मा ने बताया कि उनका शोध मुख्यतः आंत की सूजन, गट हेल्थ, बैरेट एसोफैगस और एसिडिटी से जुड़ी बीमारियों पर केंद्रित रहा है। उन्होंने इन विषयों पर अनेक पुस्तकें लिखी हैं और उनके शोध कार्य कई अंतरराष्ट्रीय प्रकाशनों में प्रकाशित हुए हैं। उन्होंने केंद्र सरकार के अलावा गुजरात और आंध्र प्रदेश की राज्य सरकारों के साथ भी कार्य किया है।
सतीश शाह को श्रद्धांजलि: परिवार ने दी भावभीनी प्रतिक्रिया
दिवंगत अभिनेता सतीश शाह को पद्म श्री से मरणोपरांत सम्मानित किए जाने पर उनके चचेरे भाई अरविंद ममानिया ने गहरी भावुकता के साथ प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, 'इसे शब्दों में बयाँ करना बहुत मुश्किल है। मुझे पता है कि अगर वह आज यहाँ होते तो इस सम्मान का भरपूर आनंद लेते।'
अरविंद ने कहा, 'आज हमें खुशी है कि उन्हें यह पुरस्कार मिला, लेकिन अगर वह जीवित होते तो यह खुशी और भी ज्यादा होती। हम उन्हें बहुत याद करते हैं — उनके साथ बिताया गया हर पल यादगार था।' उन्होंने इस सम्मान को भारतीय सिनेमा और टेलीविजन में सतीश शाह के दीर्घकालीन और उल्लेखनीय योगदान की उचित पहचान बताया।
पुरस्कार का व्यापक संदर्भ
पद्म पुरस्कार भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों में से एक हैं, जो प्रतिवर्ष गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर घोषित किए जाते हैं और राष्ट्रपति भवन में आयोजित समारोहों में प्रदान किए जाते हैं। इस वर्ष के सम्मानित व्यक्तियों की विविधता — एक हॉकी खिलाड़ी, एक सफाई योद्धा, एक चिकित्सा शोधकर्ता और एक दिवंगत अभिनेता — इस बात की पुष्टि करती है कि राष्ट्र निर्माण में हर क्षेत्र का योगदान समान रूप से मूल्यवान है। इन हस्तियों की कहानियाँ आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनती रहेंगी।