पद्म पुरस्कार 2026: राष्ट्रपति भवन में 65 हस्तियों को सम्मान, विजेताओं ने कहा — 'मेहनत कभी बेकार नहीं जाती'
सारांश
मुख्य बातें
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु 23 जून 2026 को राष्ट्रपति भवन में आयोजित नागरिक सम्मान समारोह में कुल 65 पद्म पुरस्कार प्रदान करेंगी — जिनमें 2 पद्म विभूषण, 7 पद्म भूषण और 56 पद्मश्री शामिल हैं। शाम 5 बजे से शुरू होने वाले इस समारोह में उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह सहित अनेक केंद्रीय मंत्री और गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहेंगे।
किसे मिला सम्मान
इस वर्ष के पद्म पुरस्कार विजेताओं में तेलंगाना के डॉ. चंद्रमौली गद्दामनुगु और पश्चिम बंगाल के प्रोफेसर डॉ. महेंद्र नाथ रॉय प्रमुख हैं। इसके अलावा मशहूर इंडोलॉजिस्ट ल्यूडमिला विक्टोरोवना खोखलोवा, मृदंग वादक तिरुवारूर भक्तवत्सलम, मुरादाबाद के पीतल-शिल्पकार चिरंजीलाल यादव और असम की लोक गायिका पोखिला लेक्थेपी को भी पद्मश्री से नवाज़ा जाएगा।
विजेताओं की आवाज़ — मेहनत का संदेश
मृदंग वादक तिरुवारूर भक्तवत्सलम ने पद्मश्री मिलने पर अपनी प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा, 'मैं बहुत खुश हूं। यह कला क्षेत्र में एक बहुत प्रतिष्ठित पुरस्कार है। मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु, पद्म पुरस्कार समिति के सभी सदस्यों और सभी संगीत प्रेमियों को हार्दिक धन्यवाद देता हूं।'
डॉ. चंद्रमौली गद्दामनुगु ने कहा कि तकनीक के क्षेत्र में की गई कड़ी मेहनत का यह फल है और इस सम्मान के लिए चुने जाने पर उन्हें गर्व है।
प्रोफेसर डॉ. महेंद्र नाथ रॉय भारत में रासायनिक अनुसंधान और शिक्षा के प्रमुख व्यक्तित्वों में से एक माने जाते हैं। भौतिक रसायन विज्ञान में उनके योगदान को व्यापक रूप से मान्यता मिली है।
विदेशी विद्वान को भी सम्मान
साहित्य और शिक्षा के क्षेत्र में असाधारण योगदान के लिए इंडोलॉजिस्ट ल्यूडमिला विक्टोरोवना खोखलोवा को पद्मश्री दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि जब एक मित्र ने उन्हें इस पुरस्कार की सूचना दी तो उन्हें विश्वास नहीं हुआ। 'मैंने इतना बड़ा काम नहीं किया है,' उन्होंने कहा। दूतावास से पुष्टि के बाद उन्हें यह जानकर खुशी हुई कि साहित्य के क्षेत्र में उनके काम को यह सम्मान मिला है। वे अपने छात्रों को भारतीय साहित्य के प्रमुख लेखकों से परिचित कराने का प्रयास करती हैं।
शिल्पकला और लोक संगीत को पहचान
मुरादाबाद के पीतल-शिल्पकार चिरंजीलाल यादव ने कहा, 'राष्ट्रपति के हाथों यह पुरस्कार पाना मेरे लिए गर्व की बात है। मैं वर्षों से पीतल के बर्तनों पर नक्काशी का काम कर रहा हूं।' असम की लोक गायिका पोखिला लेक्थेपी ने कहा, 'मुझे गाना बहुत पसंद है — मैं खुद गीत लिखती हूं, सुर देती हूं और गाती हूं। हर तरफ से आगे बढ़ने का प्रयास कीजिए, सफलता जरूर मिलेगी।' गौरतलब है कि पद्म पुरस्कार देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों में से हैं और इन्हें हर वर्ष गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर घोषित किया जाता है।