24 सितंबर 2026
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यूपीआई एमडीआर नीति: NPCI प्रमुख दिलीप अस्बे बोले — 75% व्यापारियों पर नहीं पड़ेगा कोई असर

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यूपीआई एमडीआर नीति: NPCI प्रमुख दिलीप अस्बे बोले — 75% व्यापारियों पर नहीं पड़ेगा कोई असर

सारांश

NPCI प्रमुख दिलीप अस्बे ने एसबीआई कॉन्क्लेव में स्पष्ट किया कि 6 करोड़ यूपीआई व्यापारियों में से 75% पर नई एमडीआर नीति का कोई असर नहीं पड़ेगा। 80% एमडीआर राजस्व ₹1,000 करोड़ से अधिक जीएमवी वाले बड़े कारोबारों से आएगा।

मुख्य बातें

NPCI प्रमुख दिलीप अस्बे ने 24 सितंबर 2026 को मुंबई में एसबीआई कॉन्क्लेव में यह जानकारी दी।
देश में 6 करोड़ से अधिक यूनिक यूपीआई व्यापारी हैं; इनमें से 75% ने ₹2,000 से अधिक का कोई लेनदेन नहीं किया।
कुल एमडीआर मूल्य का 80% उन व्यापारियों से आएगा जिनका सालाना जीएमवी ₹1,000 करोड़ से अधिक है।
ग्राहकों पर शुल्क डाले जाने का वास्तविक जोखिम कुल मूल्य का केवल 10% तक सीमित बताया गया।
बैंक, पेमेंट एग्रीगेटर और NPCI मिलकर ग्राहकों से शुल्क वसूली रोकने के लिए काम करेंगे।

नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी दिलीप अस्बे ने 24 सितंबर 2026 को स्पष्ट किया कि ₹2,000 से अधिक के यूपीआई लेनदेन पर लागू की गई नई मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) नीति का असर भारत के करीब तीन-चौथाई डिजिटल व्यापारियों पर नहीं पड़ेगा। उनके अनुसार, इन व्यापारियों ने आज तक ₹2,000 से अधिक का एक भी यूपीआई लेनदेन नहीं किया है।

मुख्य घटनाक्रम

मुंबई में आयोजित एसबीआई बैंकिंग एंड इकोनॉमिक कॉन्क्लेव में बोलते हुए अस्बे ने बताया कि देश में अभी 6 करोड़ से अधिक यूनिक यूपीआई व्यापारी हैं। इनमें से 75 प्रतिशत ने कभी भी ₹2,000 से ऊपर का कोई लेनदेन दर्ज नहीं किया है।

उन्होंने कहा, 'हमारे पास करीब 6 करोड़ यूनिक यूपीआई व्यापारी हैं और इनमें से 75 प्रतिशत ने ₹2,000 से अधिक का कोई लेनदेन नहीं किया है। इसलिए अधिकांश व्यापारी एमडीआर से प्रभावित नहीं होंगे।'

बड़े कारोबारों पर केंद्रित होगा बोझ

अस्बे के अनुसार, कुल एमडीआर मूल्य का करीब 80 प्रतिशत हिस्सा उन व्यापारियों से आने की उम्मीद है, जिनका सालाना ग्रॉस मर्चेंडाइज वैल्यू (जीएमवी) ₹1,000 करोड़ से अधिक है। शेष राशि में से करीब आधा हिस्सा उन कारोबारों से आएगा, जिनका सालाना जीएमवी ₹1 करोड़ से अधिक है।

उन्होंने यह भी कहा कि इन बड़े व्यापारियों में से अधिकांश पहले से ही क्रेडिट कार्ड भुगतान स्वीकार करते हैं और इसी प्रकार के लेनदेन शुल्क से भलीभाँति परिचित हैं। इसलिए उद्योग को आशा नहीं है कि वे यह अतिरिक्त लागत ग्राहकों पर डालेंगे।

ग्राहकों पर शुल्क का जोखिम कितना

अस्बे ने माना कि व्यापारी मूल्य के करीब 10 प्रतिशत हिस्से वाला एक छोटा वर्ग संभावित रूप से एमडीआर का बोझ ग्राहकों पर डालने की कोशिश कर सकता है। हालाँकि, उन्होंने भरोसा दिलाया कि बैंक, पेमेंट एग्रीगेटर, अधिग्रहण करने वाले बैंक और NPCI मिलकर यह सुनिश्चित करेंगे कि ग्राहकों से इस प्रकार का कोई शुल्क न वसूला जाए।

उन्होंने कहा, 'किसी ग्राहक से शुल्क लिए जाने का वास्तविक जोखिम कुल मूल्य का सिर्फ 10 प्रतिशत है।'

यूपीआई लेनदेन की मात्रा पर असर नहीं

NPCI प्रमुख ने यह भी विश्वास जताया कि नए एमडीआर ढाँचे से यूपीआई लेनदेन की समग्र मात्रा या मूल्य पर कोई महत्वपूर्ण प्रभाव नहीं पड़ेगा। यह ऐसे समय में आया है जब यूपीआई भारत की डिजिटल भुगतान प्रणाली की रीढ़ बन चुका है और करोड़ों छोटे व्यापारी इस पर निर्भर हैं।

गौरतलब है कि एमडीआर पर यह बहस उस वृहत्तर नीतिगत सवाल से जुड़ी है कि डिजिटल भुगतान अवसंरचना की लागत कौन वहन करे — बैंक, व्यापारी या सरकार। नई नीति इस संतुलन को पुनः परिभाषित करने का प्रयास है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि बाकी 25% — यानी डेढ़ करोड़ से अधिक व्यापारी — किस श्रेणी में आते हैं और उन पर लागत का क्या बोझ पड़ेगा। '10% जोखिम' की स्वीकारोक्ति यह भी संकेत देती है कि कुछ उपभोक्ताओं तक शुल्क पहुँच सकता है — और जब करोड़ों लेनदेन की बात हो, तो 10% भी कम नहीं। यूपीआई की सफलता की नींव 'शून्य लागत' वाले लेनदेन के वादे पर टिकी थी; एमडीआर की वापसी उस मूल समझ को बदल रही है। NPCI और सरकार को यह सुनिश्चित करना होगा कि डिजिटल भुगतान का विस्तार इस बदलाव से बाधित न हो।
RashtraPress
24 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

यूपीआई एमडीआर नीति क्या है और यह कब से लागू है?
यूपीआई एमडीआर (मर्चेंट डिस्काउंट रेट) नीति के तहत ₹2,000 से अधिक के यूपीआई लेनदेन पर व्यापारियों से एक निश्चित प्रतिशत शुल्क वसूला जाएगा। यह नीति डिजिटल भुगतान अवसंरचना की लागत को बैंकों और व्यापारियों के बीच साझा करने के उद्देश्य से लाई गई है।
क्या छोटे दुकानदारों और स्ट्रीट वेंडर्स को यूपीआई एमडीआर चुकाना होगा?
NPCI प्रमुख दिलीप अस्बे के अनुसार, 6 करोड़ यूपीआई व्यापारियों में से 75% ने कभी ₹2,000 से अधिक का लेनदेन नहीं किया है, इसलिए उन पर एमडीआर लागू नहीं होगा। अधिकांश छोटे दुकानदार और स्ट्रीट वेंडर इस श्रेणी में आते हैं।
एमडीआर का सबसे अधिक बोझ किन व्यापारियों पर पड़ेगा?
अस्बे के अनुसार, कुल एमडीआर मूल्य का 80% हिस्सा उन व्यापारियों से आएगा जिनका सालाना ग्रॉस मर्चेंडाइज वैल्यू (जीएमवी) ₹1,000 करोड़ से अधिक है। शेष का आधा हिस्सा ₹1 करोड़ से अधिक जीएमवी वाले कारोबारों से आएगा।
क्या यूपीआई एमडीआर का बोझ ग्राहकों पर डाला जा सकता है?
अस्बे ने स्वीकार किया कि कुल व्यापारी मूल्य के लगभग 10% वाला एक छोटा वर्ग यह बोझ ग्राहकों पर डाल सकता है। हालाँकि, उन्होंने कहा कि बैंक, पेमेंट एग्रीगेटर और NPCI मिलकर इसे रोकने की कोशिश करेंगे।
क्या नई एमडीआर नीति से यूपीआई लेनदेन की संख्या घट सकती है?
NPCI प्रमुख ने भरोसा जताया है कि नए एमडीआर ढाँचे से यूपीआई लेनदेन की समग्र मात्रा या मूल्य पर कोई महत्वपूर्ण असर नहीं पड़ेगा। उनके अनुसार, बड़े व्यापारी पहले से ही कार्ड एमडीआर चुकाते हैं और इस बदलाव के अभ्यस्त हैं।
राष्ट्र प्रेस
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