यूपीआई एमडीआर से लेनदेन की मात्रा पर असर नहीं: आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने 7 अक्टूबर 2026 को मुंबई स्थित RBI मुख्यालय में कहा कि बेहद कम मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) से यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) के लेनदेन की मात्रा पर कोई उल्लेखनीय प्रभाव नहीं पड़ेगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि केंद्रीय बैंक को अब तक UPI वॉल्यूम में किसी प्रकार की गिरावट नहीं दिखी है।
गवर्नर का बयान
पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए मल्होत्रा ने कहा, 'फिलहाल हमें लेनदेन की मात्रा में कोई गिरावट नहीं दिख रही है और मुझे व्यक्तिगत रूप से नहीं लगता कि एक छोटी सी फीस लेनदेन की मात्रा पर कोई बड़ा प्रभाव डालेगी।' यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (NPCI) ने 15 अक्टूबर से ₹2,000 से अधिक के UPI लेनदेन पर 0.4% MDR शुल्क लागू करने की घोषणा की है।
NPCI का रुख और व्यापारियों पर प्रभाव
इससे पहले NPCI के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी दिलीप अस्बे ने बताया था कि देश के करीब तीन-चौथाई डिजिटल भुगतान स्वीकार करने वाले व्यापारियों पर नई MDR नीति का कोई असर नहीं पड़ेगा। इसका कारण यह है कि इन व्यापारियों ने कभी भी ₹2,000 से अधिक का कोई UPI लेनदेन दर्ज नहीं किया।
भारत में 6 करोड़ से अधिक व्यापारी डिजिटल भुगतान स्वीकार करते हैं। इनमें से 75% ने आज तक ₹2,000 से ऊपर का एकल UPI लेनदेन नहीं किया है, जिससे MDR नीति का व्यापक प्रभाव सीमित रहने की संभावना है। अस्बे ने कहा, 'अधिकांश व्यापारी एमडीआर से प्रभावित नहीं होंगे।'
ब्याज दरें और ऋण वृद्धि
RBI की ओर से ब्याज दरें बढ़ाने और कटौती की संभावना को खारिज किए जाने के कुछ घंटों बाद मल्होत्रा ने कहा कि बैंक ऋण वृद्धि मज़बूत बनी रहने और व्यापक आर्थिक गतिविधियों को समर्थन मिलने की उम्मीद है। यह संकेत घरेलू अर्थव्यवस्था की स्थिरता को लेकर केंद्रीय बैंक के भरोसे को दर्शाता है।
गैर-बैंकिंग संस्थाओं पर सतर्कता
RBI गवर्नर ने यह भी स्वीकार किया कि केंद्रीय बैंक गैर-बैंकिंग ऋणदाताओं (Non-Bank Lenders) के पास मौजूद अतिरिक्त तरलता और उसके संपत्ति गुणवत्ता पर पड़ने वाले संभावित प्रभाव को लेकर सतर्क है। हालाँकि, उन्होंने कहा कि उन्हें इन चिंताओं के वास्तव में सच होने की संभावना कम ही लगती है।
आगे क्या होगा
15 अक्टूबर 2026 से NPCI की MDR नीति लागू होने के बाद डिजिटल भुगतान परिदृश्य में किस हद तक बदलाव आता है, यह देखने वाली बात होगी। RBI की निगरानी और NPCI के आँकड़े आने वाले महीनों में इस नीति के वास्तविक प्रभाव को स्पष्ट करेंगे।