IIT दिल्ली ने बनाया भारत का पहला स्वदेशी माइक्रो-GPU, AI और डिजिटल डिवाइड पर बड़ा असर
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) दिल्ली के शोधकर्ताओं ने 24 सितंबर 2026 को देश का पहला कार्यशील और प्रदर्शनयोग्य स्वदेशी माइक्रो-GPU (ग्राफिक्स प्रोसेसिंग यूनिट) विकसित कर एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। विद्युत अभियांत्रिकी विभाग की इस टीम का दावा है कि यह किसी भारतीय विश्वविद्यालय द्वारा तैयार किया गया पहला ऐसा स्वदेशी ग्राफिक्स प्रोसेसर है, जिसे वास्तव में प्रोग्राम किया जा सके और प्रदर्शित किया जा सके।
परियोजना का नेतृत्व और तकनीकी आधार
इस परियोजना का नेतृत्व MTech छात्रों नम्मी आकाश और एम. रवि तेजा ने किया, जिन्हें प्रो. जयदेव और प्रो. कौशिक साहा ने शैक्षणिक मार्गदर्शन प्रदान किया। इस माइक्रो-GPU को Spartan-7 FPGA (फील्ड-प्रोग्रामेबल गेट ऐरे) प्लेटफॉर्म पर सफलतापूर्वक लागू किया गया है।
शोधकर्ताओं के अनुसार, यह एक प्रोग्रामयोग्य ग्राफिक्स प्रोसेसर ढाँचा है जिसे भविष्य में ASIC (एप्लीकेशन-स्पेसिफिक इंटीग्रेटेड सर्किट) या FPGA जैसे प्रोग्रामयोग्य हार्डवेयर पर भी उपयोग किया जा सकता है। प्रो. जयदेव ने बताया कि सामान्य FPGA बोर्ड पर इस डिज़ाइन को साकार करने के लिए टीम को कई महत्वपूर्ण तकनीकी नवाचार करने पड़े।
किन उपकरणों में होगा उपयोग
यह तकनीक महंगे और बड़े कंप्यूटरों तक सीमित न रहकर कई किफायती और छोटे उपकरणों में इस्तेमाल की जा सकती है। संस्थान के अनुसार इसके अनुप्रयोगों में शामिल हैं:
- औद्योगिक नियंत्रण डिस्प्ले और कम लागत वाले मानव-मशीन इंटरफेस
- ई-रिक्शा के डैशबोर्ड और नेविगेशन सिस्टम
- छोटी मछली पकड़ने वाली नौकाओं के लिए अंतर्देशीय जलमार्ग नेविगेशन टर्मिनल
- शैक्षणिक ई-बुक रीडर
नम्मी आकाश और एम. रवि तेजा ने कहा कि उनका लक्ष्य एक ऐसा छोटा, लेकिन वास्तविक रूप से प्रोग्रामयोग्य ग्राफिक्स प्रोसेसिंग ढाँचा बनाना था जिसे FPGA पर लागू किया जा सके और आगे चलकर चिप के रूप में विकसित किया जा सके। उनके अनुसार, ऐसे स्वदेशी हार्डवेयर सिस्टम किफायती डिजिटल प्लेटफॉर्म तैयार करने और डिजिटल डिवाइड को कम करने में सहायक हो सकते हैं।
GPU आयात निर्भरता और राष्ट्रीय महत्व
यह ऐसे समय में आया है जब भारत GPU के लिए काफी हद तक आयात पर निर्भर है, विशेष रूप से AI, मशीन लर्निंग और आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक्स के लिए। गौरतलब है कि वैश्विक सेमीकंडक्टर आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान और भू-राजनीतिक तनाव के मद्देनज़र भारत की स्वदेशी चिप विकास क्षमता बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया जाता रहा है। इस संदर्भ में IIT दिल्ली की यह उपलब्धि 'आत्मनिर्भर भारत' की दिशा में एक ठोस शैक्षणिक कदम मानी जा रही है।
अगले चरण की योजनाएँ
IIT दिल्ली की टीम अब इस तकनीक को और उन्नत बनाने की तैयारी में है। अगले चरण में 8 से 16 कोर वाले वेक्टर-शैली के ग्राफिक्स प्रोसेसर को विकसित करने की योजना है। इसके साथ ही बेहतर कंपाइलर और ग्राफिक्स सॉफ्टवेयर टूलचेन भी तैयार किया जाएगा। दीर्घावधि में 65 नैनोमीटर ASIC प्रक्रिया पर प्रूफ-ऑफ-कॉन्सेप्ट बनाने की दिशा में भी कार्य होगा।
टीम अब ASIC विकास, सिस्टम एकीकरण और व्यावसायिक उपयोग के लिए वित्तीय सहायता जुटाने की योजना बना रही है। यदि यह प्रयास सफल होता है, तो भारत में ही निर्मित ग्राफिक्स प्रोसेसिंग तकनीक का रास्ता और सुदृढ़ हो सकता है।