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आईआईटी मद्रास का AI-आधारित मिश्रधातु डेटाबेस: 1,85,000 रिकॉर्ड, दुनिया में सबसे बड़ा

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आईआईटी मद्रास का AI-आधारित मिश्रधातु डेटाबेस: 1,85,000 रिकॉर्ड, दुनिया में सबसे बड़ा

सारांश

IIT मद्रास ने 10,000 शोधपत्रों के AI-विश्लेषण से 1,85,000 रिकॉर्ड का दुनिया का सबसे बड़ा सार्वजनिक मिश्रधातु डेटाबेस बनाया है। यह प्लेटफ़ॉर्म 350 से अधिक भौतिक गुणों को दर्ज करता है और EV से लेकर समुद्री ढाँचे तक पर्यावरण अनुकूल सामग्री की खोज को तेज़ करेगा।

मुख्य बातें

IIT मद्रास ने AI-आधारित प्लेटफ़ॉर्म से दुनिया का सबसे बड़ा सार्वजनिक बहु-घटक मिश्रधातु डेटाबेस तैयार किया।
डेटाबेस में 10,000 से अधिक शोधपत्रों से निकाले गए 1,85,000 से अधिक रिकॉर्ड हैं।
प्रणाली 350 से अधिक भौतिक गुणों को स्वतः दर्ज करती है और पर्यावरणीय, आर्थिक व सामाजिक पहलुओं का भी ध्यान रखती है।
रोहित बत्रा ने किया; निष्कर्ष एडवांस्ड साइंस पत्रिका में प्रकाशित।
वित्तपोषण DRDO , राष्ट्रीय अनुसंधान प्रतिष्ठान और IIT मद्रास वाधवानी स्कूल ऑफ़ डेटा साइंस एंड AI से।
भविष्य में तकनीक का विस्तार बहुलक, सिरेमिक और मिश्रित सामग्रियों तक होगा।

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) मद्रास के शोधकर्ताओं ने 24 अगस्त 2026 को एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है — उन्होंने एक AI-आधारित प्लेटफ़ॉर्म विकसित किया है जो 10,000 से अधिक शोधपत्रों का स्वचालित विश्लेषण कर 1,85,000 से अधिक रिकॉर्ड वाला विशाल सार्वजनिक डेटाबेस तैयार करता है। यह डेटाबेस दुनिया का सबसे बड़ा सार्वजनिक बहु-घटक मिश्रधातु (multi-component alloy) डेटाबेस बताया जा रहा है, जो इलेक्ट्रिक वाहनों, विमानन, नवीकरणीय ऊर्जा और समुद्री ढाँचे के लिए पर्यावरण अनुकूल सामग्री की खोज को तेज़ करेगा।

डेटाबेस में क्या है खास

IIT मद्रास की इस प्रणाली की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह मिश्रधातुओं की संरचना, निर्माण प्रक्रिया और परीक्षण परिस्थितियों की जानकारी स्वतः निकाल सकती है। यह 350 से अधिक भौतिक गुणों को दर्ज करती है, जिससे वैज्ञानिकों को पहले किए गए प्रयोगों का पूरा ब्यौरा एक ही स्थान पर उपलब्ध होगा।

इस प्लेटफ़ॉर्म की एक और महत्त्वपूर्ण विशेषता यह है कि यह केवल मज़बूत और टिकाऊ सामग्री की तलाश तक सीमित नहीं है। इसमें पर्यावरणीय, आर्थिक और सामाजिक पहलुओं को भी शामिल किया गया है — यानी कम पर्यावरणीय प्रभाव वाली मिश्रधातुओं की पहचान और महत्त्वपूर्ण कच्चे माल पर निर्भरता घटाने में भी यह सहायक होगा।

तीन प्रमुख क्षेत्रों में संभावनाएँ

शोधकर्ताओं ने तीन क्षेत्रों में संभावित मिश्रधातुओं की पहचान की है। पहली — हल्की सामग्री, जो वाहनों और विमानों का वज़न एवं ईंधन खपत घटा सकती है। दूसरी — चुंबकीय सामग्री, जिसका उपयोग इलेक्ट्रिक मोटर और ट्रांसफ़ॉर्मर में हो सकता है। तीसरी — क्षरण-रोधी मिश्रधातु, जो समुद्री ढाँचे, ऊर्जा और रासायनिक उद्योगों के लिए उपयोगी हो सकती है।

संस्थान के अनुसार, इनमें से कुछ मिश्रधातुएँ पारंपरिक सामग्रियों के बराबर या उनसे बेहतर प्रदर्शन करने में सक्षम हैं।

शोध का नेतृत्व और वित्तपोषण

इस शोध का नेतृत्व डॉ. रोहित बत्रा ने किया। परियोजना को राष्ट्रीय अनुसंधान प्रतिष्ठान, रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) के उद्योग एवं अकादमिक निदेशालय, तथा IIT मद्रास के वाधवानी स्कूल ऑफ़ डेटा साइंस एंड AI से वित्तीय एवं संस्थागत सहायता मिली। इस शोध के निष्कर्ष प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय पत्रिका एडवांस्ड साइंस में प्रकाशित हुए हैं।

आगे की योजना

IIT मद्रास की टीम अब AI को वैज्ञानिक चित्रों और सूक्ष्म संरचना वाली तस्वीरों से भी डेटा निकालने में सक्षम बनाने पर काम कर रही है। भविष्य में इस तकनीक का विस्तार बहुलक (polymers), सिरेमिक और मिश्रित सामग्रियों तक किए जाने की योजना है। यह कदम भारत को सामग्री विज्ञान अनुसंधान में वैश्विक अग्रणी के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण पड़ाव है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा उद्योग-अनुकूलन में होगी — क्या यह डेटा प्रयोगशाला से उत्पादन लाइन तक पहुँचेगा? गौरतलब है कि भारत अभी भी उन्नत मिश्रधातुओं के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर है, और DRDO की भागीदारी रक्षा अनुप्रयोगों की ओर संकेत करती है। पर्यावरणीय पहलुओं को शामिल करना सराहनीय है, लेकिन यह देखना होगा कि क्या निजी क्षेत्र इस सार्वजनिक डेटाबेस का व्यावसायिक लाभ उठाने के लिए आगे आता है।
RashtraPress
24 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

IIT मद्रास का मिश्रधातु डेटाबेस क्या है?
यह 10,000 से अधिक शोधपत्रों के AI-विश्लेषण से तैयार किया गया 1,85,000 रिकॉर्ड वाला सार्वजनिक डेटाबेस है, जिसे दुनिया का सबसे बड़ा बहु-घटक मिश्रधातु डेटाबेस बताया जा रहा है। यह 350 से अधिक भौतिक गुणों को दर्ज करता है और नई मिश्रधातुओं की खोज को तेज़ करने के लिए बनाया गया है।
इस AI प्लेटफ़ॉर्म से किन क्षेत्रों को फ़ायदा होगा?
इस प्लेटफ़ॉर्म से इलेक्ट्रिक वाहन, विमानन, नवीकरणीय ऊर्जा और समुद्री ढाँचा क्षेत्र सीधे लाभान्वित होंगे। हल्की सामग्री, चुंबकीय सामग्री और क्षरण-रोधी मिश्रधातुओं की पहचान से ईंधन दक्षता बढ़ेगी और औद्योगिक लागत घटेगी।
इस शोध का नेतृत्व किसने किया और यह कहाँ प्रकाशित हुआ?
इस शोध का नेतृत्व IIT मद्रास के डॉ. रोहित बत्रा ने किया। इसके निष्कर्ष अंतरराष्ट्रीय पत्रिका एडवांस्ड साइंस में प्रकाशित हुए हैं। परियोजना को DRDO, राष्ट्रीय अनुसंधान प्रतिष्ठान और IIT मद्रास के वाधवानी स्कूल ऑफ़ डेटा साइंस एंड AI का समर्थन मिला।
यह डेटाबेस पर्यावरण के लिहाज़ से कैसे अलग है?
अधिकांश सामग्री डेटाबेस केवल प्रदर्शन गुणों पर केंद्रित होते हैं, लेकिन IIT मद्रास का यह प्लेटफ़ॉर्म पर्यावरणीय, आर्थिक और सामाजिक पहलुओं को भी शामिल करता है। इससे कम पर्यावरणीय प्रभाव वाली मिश्रधातुओं की पहचान और दुर्लभ कच्चे माल पर निर्भरता घटाने में मदद मिलेगी।
इस तकनीक का भविष्य में क्या विस्तार होगा?
IIT मद्रास की टीम AI को वैज्ञानिक चित्रों और सूक्ष्म संरचना वाली तस्वीरों से डेटा निकालने में सक्षम बनाने पर काम कर रही है। भविष्य में इस तकनीक का उपयोग बहुलक, सिरेमिक और मिश्रित सामग्रियों के अनुसंधान में भी किया जाएगा।
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