आईआईटी मद्रास का AI-आधारित मिश्रधातु डेटाबेस: 1,85,000 रिकॉर्ड, दुनिया में सबसे बड़ा
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) मद्रास के शोधकर्ताओं ने 24 अगस्त 2026 को एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है — उन्होंने एक AI-आधारित प्लेटफ़ॉर्म विकसित किया है जो 10,000 से अधिक शोधपत्रों का स्वचालित विश्लेषण कर 1,85,000 से अधिक रिकॉर्ड वाला विशाल सार्वजनिक डेटाबेस तैयार करता है। यह डेटाबेस दुनिया का सबसे बड़ा सार्वजनिक बहु-घटक मिश्रधातु (multi-component alloy) डेटाबेस बताया जा रहा है, जो इलेक्ट्रिक वाहनों, विमानन, नवीकरणीय ऊर्जा और समुद्री ढाँचे के लिए पर्यावरण अनुकूल सामग्री की खोज को तेज़ करेगा।
डेटाबेस में क्या है खास
IIT मद्रास की इस प्रणाली की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह मिश्रधातुओं की संरचना, निर्माण प्रक्रिया और परीक्षण परिस्थितियों की जानकारी स्वतः निकाल सकती है। यह 350 से अधिक भौतिक गुणों को दर्ज करती है, जिससे वैज्ञानिकों को पहले किए गए प्रयोगों का पूरा ब्यौरा एक ही स्थान पर उपलब्ध होगा।
इस प्लेटफ़ॉर्म की एक और महत्त्वपूर्ण विशेषता यह है कि यह केवल मज़बूत और टिकाऊ सामग्री की तलाश तक सीमित नहीं है। इसमें पर्यावरणीय, आर्थिक और सामाजिक पहलुओं को भी शामिल किया गया है — यानी कम पर्यावरणीय प्रभाव वाली मिश्रधातुओं की पहचान और महत्त्वपूर्ण कच्चे माल पर निर्भरता घटाने में भी यह सहायक होगा।
तीन प्रमुख क्षेत्रों में संभावनाएँ
शोधकर्ताओं ने तीन क्षेत्रों में संभावित मिश्रधातुओं की पहचान की है। पहली — हल्की सामग्री, जो वाहनों और विमानों का वज़न एवं ईंधन खपत घटा सकती है। दूसरी — चुंबकीय सामग्री, जिसका उपयोग इलेक्ट्रिक मोटर और ट्रांसफ़ॉर्मर में हो सकता है। तीसरी — क्षरण-रोधी मिश्रधातु, जो समुद्री ढाँचे, ऊर्जा और रासायनिक उद्योगों के लिए उपयोगी हो सकती है।
संस्थान के अनुसार, इनमें से कुछ मिश्रधातुएँ पारंपरिक सामग्रियों के बराबर या उनसे बेहतर प्रदर्शन करने में सक्षम हैं।
शोध का नेतृत्व और वित्तपोषण
इस शोध का नेतृत्व डॉ. रोहित बत्रा ने किया। परियोजना को राष्ट्रीय अनुसंधान प्रतिष्ठान, रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) के उद्योग एवं अकादमिक निदेशालय, तथा IIT मद्रास के वाधवानी स्कूल ऑफ़ डेटा साइंस एंड AI से वित्तीय एवं संस्थागत सहायता मिली। इस शोध के निष्कर्ष प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय पत्रिका एडवांस्ड साइंस में प्रकाशित हुए हैं।
आगे की योजना
IIT मद्रास की टीम अब AI को वैज्ञानिक चित्रों और सूक्ष्म संरचना वाली तस्वीरों से भी डेटा निकालने में सक्षम बनाने पर काम कर रही है। भविष्य में इस तकनीक का विस्तार बहुलक (polymers), सिरेमिक और मिश्रित सामग्रियों तक किए जाने की योजना है। यह कदम भारत को सामग्री विज्ञान अनुसंधान में वैश्विक अग्रणी के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण पड़ाव है।