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भारत इनोवेट्स 2026: आईआईटी मद्रास ने नीस में किए 7 एमओयू, ₹840 करोड़ मूल्य सृजन की संभावना

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भारत इनोवेट्स 2026: आईआईटी मद्रास ने नीस में किए 7 एमओयू, ₹840 करोड़ मूल्य सृजन की संभावना

सारांश

नीस में 'भारत इनोवेट्स 2026' महज़ एक प्रदर्शनी नहीं थी — यह भारतीय डीप-टेक की वैश्विक दावेदारी का ऐलान था। आईआईटी मद्रास के 7 व्यावसायिक एमओयू और 100 मिलियन डॉलर मूल्य सृजन की संभावना यह दिखाती है कि भारतीय अनुसंधान संस्थान अब प्रयोगशाला से बाज़ार तक की दूरी तेज़ी से पाट रहे हैं।

मुख्य बातें

आईआईटी मद्रास और आईआईटीएम ग्लोबल ने 16 जून 2026 को नीस, फ्रांस में 7 व्यावसायिक और 2 संस्थागत एमओयू पर हस्ताक्षर किए।
इन समझौतों से लगभग 100 मिलियन डॉलर (₹840 करोड़) के मूल्य सृजन की संभावना बताई गई है।
आईआईटीएम ग्लोबल और अग्ना कैपिटल के बीच 'भारत इनोवेट्स फंड' बनाने का समझौता हुआ, जो डीप-टेक स्टार्टअप्स में निवेश करेगा।
साउथवेस्टएक्स साझेदारी भारतीय स्टार्टअप्स को जर्मनी और फ्रांस के बाज़ारों तक पहुँचने में मदद करेगी।
प्रदर्शित तकनीकों में हाइपरलूप , 5जी/6जी , पोर्ट ऑटोमेशन , लैब-ग्रोन डायमंड और स्वदेशी एआई सिस्टम शामिल रहे।

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मद्रास (आईआईटी मद्रास) और आईआईटीएम ग्लोबल ने फ्रांस के नीस शहर में आयोजित 'भारत इनोवेट्स 2026' के पहले दिन सात व्यावसायिक और दो संस्थागत समझौता ज्ञापनों (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए। संस्थान द्वारा जारी बयान के अनुसार, इन समझौतों से लगभग 100 मिलियन डॉलर (करीब ₹840 करोड़) के मूल्य सृजन की संभावना है। यह आयोजन भारतीय डीप-टेक स्टार्टअप्स को यूरोपीय बाज़ार से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

मुख्य समझौते और साझेदारियाँ

बयान के अनुसार, सात व्यावसायिक एमओयू भारतीय डीप-टेक स्टार्टअप्स को अंतरराष्ट्रीय साझेदारों — विशेष रूप से फ्रांस की कंपनियों और संस्थानों — से जोड़ते हैं। दो संस्थागत समझौते वैश्विक बाज़ार तक पहुँच, निवेश और नवाचार को गति देने के उद्देश्य से किए गए हैं।

एक प्रमुख एमओयू के तहत आईआईटीएम ग्लोबल और अग्ना कैपिटल के बीच रणनीतिक साझेदारी स्थापित की गई है। इसके अंतर्गत 'भारत इनोवेट्स फंड' बनाया जाएगा, जो उच्च संभावनाओं वाले डीप-टेक स्टार्टअप्स में निवेश को बढ़ावा देगा। एक अन्य समझौते में आईआईटीएम ग्लोबल और साउथवेस्टएक्स ने हाथ मिलाए हैं, जिसके ज़रिए भारतीय स्टार्टअप्स को जर्मनी और फ्रांस जैसे बड़े यूरोपीय बाज़ारों तक विस्तार में सहायता मिलेगी।

आईआईटी मद्रास के निदेशक का बयान

आईआईटी मद्रास के निदेशक प्रोफेसर वी. कामाकोटी ने कहा, 'भारत इनोवेट्स 2026 भारतीय डीप-टेक क्षेत्र के लिए एक ऐतिहासिक अवसर साबित हुआ है। जिन एमओयू का आदान-प्रदान हुआ है, वे केवल औपचारिक समझौते नहीं हैं, बल्कि व्यावसायिक रूप से लागू किए जाने वाले समझौते हैं, जिनके पीछे गंभीर वित्तीय प्रतिबद्धताएं हैं। भारत के प्रमुख उच्च शिक्षण संस्थानों ने साबित कर दिया है कि भारतीय नवाचार वैश्विक मंच पर नेतृत्व करने के लिए तैयार है।'

संस्थान के डीन (औद्योगिक परामर्श और प्रायोजित अनुसंधान) प्रोफेसर मनु संथानम ने कहा कि ये साझेदारियाँ वैज्ञानिक उत्कृष्टता को सीमाओं के पार आर्थिक मूल्य में बदलने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।

प्रदर्शित तकनीकें और नवाचार

समझौतों के साथ-साथ आईआईटी मद्रास ने इस कार्यक्रम में अपने शोध समूहों और स्टार्टअप इकोसिस्टम द्वारा विकसित कई अत्याधुनिक तकनीकों का प्रदर्शन किया। इनमें हाइपरलूप परिवहन तकनीक, 5जी और 6जी संचार प्रणाली, पोर्ट ऑटोमेशन, लैब में विकसित हीरा तकनीक और कम संसाधनों में बेहतर कंप्यूटिंग के लिए विकसित स्वदेशी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) सिस्टम शामिल रहे।

गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब भारत वैश्विक डीप-टेक निवेश में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने की कोशिश कर रहा है और आईआईटी जैसे संस्थान अनुसंधान को व्यावसायिक मूल्य में बदलने की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रहे हैं।

यूरोपीय जगत की प्रतिक्रिया और आगे की संभावनाएँ

औपचारिक समझौतों से परे, इस कार्यक्रम में यूरोपीय संघ के उद्योग जगत के नेताओं, शैक्षणिक संस्थानों, निवेशकों और सरकारी प्रतिनिधियों ने भी रुचि दिखाई। बयान के अनुसार, यह रुचि संकेत देती है कि भविष्य में अनुसंधान, उद्यमिता, प्रतिभा विकास और बाज़ार विस्तार जैसे क्षेत्रों में और अधिक अंतरराष्ट्रीय सहयोग की संभावनाएँ मौजूद हैं। आने वाले महीनों में इन समझौतों के क्रियान्वयन से यह स्पष्ट होगा कि भारतीय डीप-टेक का यूरोपीय बाज़ार में विस्तार किस गति से होता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन एमओयू और वास्तविक निवेश के बीच की खाई भारतीय शिक्षा-उद्योग सहयोग में पुरानी चुनौती रही है — अधिकांश समझौते घोषणा के बाद क्रियान्वयन के स्तर पर धीमे पड़ जाते हैं। 'भारत इनोवेट्स फंड' की संरचना और वितरण तंत्र अभी सार्वजनिक नहीं है, जो निवेशकों के लिए एक महत्वपूर्ण प्रश्न है। यह भी उल्लेखनीय है कि आईआईटी मद्रास जैसे संस्थान अब कूटनीतिक मंचों की भूमिका निभा रहे हैं — जो परंपरागत रूप से सरकारी व्यापार प्रतिनिधिमंडलों का काम था। यदि ये साझेदारियाँ वास्तविक स्टार्टअप विस्तार और रोज़गार में तब्दील हों, तो यह भारत के शिक्षा-उद्यमिता मॉडल के लिए एक नई मिसाल होगी।
RashtraPress
2 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत इनोवेट्स 2026 क्या है और यह कहाँ आयोजित हुआ?
भारत इनोवेट्स 2026 एक अंतरराष्ट्रीय नवाचार और प्रौद्योगिकी कार्यक्रम है जो फ्रांस के नीस शहर में आयोजित किया गया। इसमें भारतीय शोध संस्थानों, स्टार्टअप्स और यूरोपीय उद्योग जगत के बीच साझेदारी को बढ़ावा देने का लक्ष्य है।
आईआईटी मद्रास ने भारत इनोवेट्स 2026 में कितने और किस तरह के एमओयू किए?
आईआईटी मद्रास और आईआईटीएम ग्लोबल ने कुल 9 एमओयू किए — 7 व्यावसायिक और 2 संस्थागत। ये समझौते भारतीय डीप-टेक स्टार्टअप्स को फ्रांस और अन्य यूरोपीय कंपनियों तथा संस्थानों से जोड़ते हैं।
भारत इनोवेट्स फंड क्या है?
भारत इनोवेट्स फंड, आईआईटीएम ग्लोबल और अग्ना कैपिटल के बीच हुई साझेदारी के तहत बनाया जाने वाला निवेश कोष है। इसका उद्देश्य उच्च संभावनाओं वाले भारतीय डीप-टेक स्टार्टअप्स में निवेश को प्रोत्साहित करना है।
इन एमओयू से कितने मूल्य सृजन की संभावना है?
आईआईटी मद्रास द्वारा जारी बयान के अनुसार, इन समझौतों से लगभग 100 मिलियन डॉलर (करीब ₹840 करोड़) के मूल्य सृजन की संभावना है। हालाँकि यह अनुमान है और वास्तविक आँकड़े क्रियान्वयन पर निर्भर करेंगे।
आईआईटी मद्रास ने इस कार्यक्रम में कौन-सी तकनीकें प्रदर्शित कीं?
संस्थान ने हाइपरलूप परिवहन तकनीक, 5जी और 6जी संचार प्रणाली, पोर्ट ऑटोमेशन, लैब में विकसित हीरा तकनीक और स्वदेशी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सिस्टम का प्रदर्शन किया। ये सभी तकनीकें आईआईटी मद्रास के शोध समूहों और स्टार्टअप इकोसिस्टम द्वारा विकसित की गई हैं।
राष्ट्र प्रेस
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