आईआईटी खड़गपुर की AIAA 'डिज़ाइन/बिल्ड/फ्लाई' में ऐतिहासिक शुरुआत, एशिया में 5वीं और विश्व में 39वीं रैंक
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) खड़गपुर ने अपनी पहली ही भागीदारी में अमेरिकी एयरोस्पेस जगत को प्रभावित किया है। विचिटा, कंसास में आयोजित अमेरिकन इंस्टीट्यूट ऑफ एयरोनॉटिक्स एंड एस्ट्रोनॉटिक्स (AIAA) की प्रतिष्ठित 'डिज़ाइन/बिल्ड/फ्लाई' प्रतियोगिता में संस्थान की टीम ने एशिया में 5वाँ और वैश्विक स्तर पर 39वाँ स्थान हासिल किया। इसके साथ ही टीम ने सभी भारतीय प्रतिभागी टीमों में सर्वाधिक कुल स्कोर अर्जित किया।
मुख्य घटनाक्रम
इस वर्ष की प्रतियोगिता अपना 30वाँ संस्करण थी। कुल 175 प्रस्ताव जमा किए गए, जिनमें से 102 टीमों को डिज़ाइन रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए आमंत्रित किया गया। अंततः 98 टीमों ने डिज़ाइन रिपोर्ट जमा कीं और 89 टीमें फ्लाई-ऑफ चरण में पहुँचीं, जिनमें 17 अंतरराष्ट्रीय टीमें शामिल थीं। 12 देशों की 1,179 छात्र-प्रतिभागियों के बीच यह मुकाबला हुआ।
89 में से 83 टीमों ने तकनीकी निरीक्षण (Tech Inspection) पूरा किया। 197 आधिकारिक उड़ान प्रयासों में से 143 सफल रहे। 73 टीमों ने कम से कम एक सफल फ्लाइट स्कोर हासिल किया, जबकि केवल 17 टीमों ने सभी चारों मिशन — एक ज़मीनी और तीन उड़ान मिशन — सफलतापूर्वक पूरे किए।
चार महीने में तैयार हुआ पूरा विमान
आईआईटी खड़गपुर की 21 सदस्यीय छात्र टीम ने मात्र चार महीनों में एक संपूर्ण विमान डिज़ाइन किया, निर्मित किया, परीक्षण किया और सफलतापूर्वक उड़ाया। संस्थान के अनुसार, एयरोडायनामिक्स, संरचना, प्रणोदन, एवियोनिक्स, CAD, निर्माण और फ्लाइट वैलिडेशन जैसे सभी पहलुओं को कड़ी समय-सीमा के भीतर अंजाम दिया गया। यह उपलब्धि व्यावहारिक इंजीनियरिंग, टीमवर्क और नवाचार की क्षमता को रेखांकित करती है।
इस वर्ष का थीम और मिशन संरचना
इस संस्करण का थीम 'बैनर टोइंग बुश प्लेन' था। प्रतियोगिता में तीन उड़ान मिशन और एक ज़मीनी मिशन शामिल थे। पहले मिशन में विमान को पाँच मिनट के भीतर तीन चक्कर पूरे करने थे। दूसरे मिशन में रबर डक (यात्री) और हॉकी पक (कार्गो) ले जाने की क्षमता, चक्करों की संख्या और बैटरी दक्षता के आधार पर स्कोर तय हुआ। तीसरे मिशन में बैनर खींचने की दूरी, चक्करों की संख्या और विंगस्पैन (RAC) के आधार पर अंक दिए गए।
ज़मीनी मिशन में यात्रियों को चढ़ाने-उतारने की क्षमता प्रदर्शित करनी थी और फिर विमान को बैनर-टोइंग कॉन्फ़िगरेशन में रूपांतरित करना था।
शीर्ष स्थान और मेंटरशिप
प्रतियोगिता में पहला स्थान यूनिवर्सिटी ऑफ ल्युब्लियाना को मिला। यूनिवर्सिटी ऑफ वॉशिंगटन-सिएटल दूसरे और यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया, लॉस एंजिल्स तीसरे स्थान पर रही। आईआईटी खड़गपुर की इस सफलता का श्रेय एयरोस्पेस इंजीनियरिंग विभाग, एरियल रोबोटिक्स खड़गपुर (ARK) लैब और प्रोफेसर अर्नब रॉय, अनूप घोष, नाबा कुमार पेयाडा, संदीप साहा तथा सोमेश कुमार की मेंटरशिप को दिया गया है।
AIAA ने टीमों की गुणवत्ता, तैयारी और उड़ान संचालन को असाधारण बताया। यह आईआईटी खड़गपुर के लिए वैश्विक मंच पर एयरोस्पेस इंजीनियरिंग में अनुभव-आधारित शिक्षा और नवाचार संस्कृति को स्थापित करने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण पड़ाव है।