खाद्य तेल सस्ता होगा: कच्चे सूरजमुखी तेल पर आयात शुल्क शून्य, सोयाबीन-पाम ऑयल पर 5% किया
सारांश
मुख्य बातें
केंद्र सरकार ने 24 सितंबर 2026 को खाद्य महंगाई से राहत दिलाने के लिए प्रमुख आयातित कच्चे खाद्य तेलों पर बेसिक कस्टम ड्यूटी (BCD) में उल्लेखनीय कटौती की है। नई व्यवस्था के तहत कच्चे सूरजमुखी तेल पर लागू 10 प्रतिशत आयात शुल्क पूरी तरह समाप्त कर शून्य कर दिया गया है, जबकि कच्चे सोयाबीन तेल और कच्चे पाम ऑयल पर शुल्क 10 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत कर दिया गया है। यह निर्णय ऐसे समय में आया है जब अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में खाद्य तेलों की कीमतों में तेज़ उछाल आई है और उसका सीधा असर घरेलू खुदरा बाज़ार पर पड़ रहा था।
नई शुल्क संरचना क्या है
शुल्क कटौती की नई व्यवस्था के अनुसार, कच्चे सूरजमुखी तेल (क्रूड सनफ्लावर ऑयल) पर पहले लागू 10% की बेसिक कस्टम ड्यूटी को पूरी तरह हटा दिया गया है। वहीं, कच्चे सोयाबीन तेल और कच्चे पाम ऑयल पर आयात शुल्क 10% से घटाकर 5% कर दिया गया है।
सरकार ने परिष्कृत (रिफाइंड) खाद्य तेलों पर लागू सीमा शुल्क में भी कमी की है, लेकिन कच्चे और रिफाइंड तेलों के बीच 19.25 प्रतिशत का शुल्क अंतर बरकरार रखा है। यह फर्क जानबूझकर बनाए रखा गया है, ताकि रिफाइंड तेल के आयात को प्रोत्साहन न मिले।
घरेलू रिफाइनिंग उद्योग की सुरक्षा
सरकार ने शुल्क ढाँचे में यह सुनिश्चित किया है कि कच्चे तेल पर राहत देते हुए भी देश के रिफाइनिंग उद्योग की प्रतिस्पर्धात्मकता बनी रहे। अधिकारियों के अनुसार, यह नीति घरेलू रिफाइनर्स के लिए समान प्रतिस्पर्धात्मक माहौल तैयार करेगी और देश के भीतर वैल्यू एडिशन को प्रोत्साहित करेगी। इस तरह तैयार तेल के आयात पर अंकुश लगाते हुए स्थानीय उद्योग को संरक्षित रखा गया है।
वैश्विक कीमतों का दबाव और भारत की आयात-निर्भरता
भारत अपनी खाद्य तेल ज़रूरतों का बड़ा हिस्सा आयात के ज़रिए पूरा करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में आई तेज़ी का सीधा असर घरेलू लैंडेड कॉस्ट और खुदरा कीमतों पर पड़ता है। गौरतलब है कि वैश्विक आपूर्ति में व्यवधान और मुद्रा उतार-चढ़ाव के कारण पिछले कुछ महीनों में आयात लागत काफी बढ़ी है, जिसका बोझ अंततः उपभोक्ताओं पर आ रहा था।
यह ऐसे समय में आया है जब खाद्य महंगाई पर नियंत्रण सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है और उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) में खाद्य तेल की कीमतें प्रमुख योगदानकर्ता रही हैं।
उद्योग को सलाह: राहत उपभोक्ताओं तक पहुँचाएँ
शुल्क कटौती के साथ-साथ सरकार ने खाद्य तेल उद्योग संगठनों और संबंधित कंपनियों को एक सलाह (advisory) भी जारी की है। इसमें उनसे अपील की गई है कि आयात शुल्क में कमी का लाभ जल्द से जल्द उपभोक्ताओं तक पहुँचाया जाए, ताकि खुदरा बाज़ार में कीमतों में वास्तविक राहत दिखे और यह कदम महज़ कागज़ी न रहे।
आम उपभोक्ता पर असर और आगे की राह
सरकार के अनुसार, आयात लागत में कमी का फायदा पूरी आपूर्ति शृंखला के ज़रिए उपभोक्ताओं तक पहुँचने की उम्मीद है। यह कदम घरेलू परिवारों पर बढ़ती खाद्य महंगाई का बोझ कम करने और समग्र मुद्रास्फीति को नियंत्रित रखने की व्यापक रणनीति का हिस्सा है। अब देखना होगा कि बाज़ार में यह कटौती कितनी तेज़ी से प्रतिबिंबित होती है और उद्योग सरकार की इस अपील पर किस हद तक अमल करता है।