केंद्र सरकार ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बदलाव नहीं किया, एक्साइज कट से तेल कंपनियों को मिलेगा सहारा
सारांश
Key Takeaways
- पेट्रोल और डीजल की कीमतें स्थिर रहेंगी।
- एक्साइज ड्यूटी में कमी का लाभ उपभोक्ताओं को नहीं मिलेगा।
- तेल कंपनियों के नुकसान की भरपाई के लिए यह निर्णय लिया गया है।
- अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी का असर।
- भारत ने अन्य देशों की तुलना में ईंधन की कीमतें स्थिर रखी हैं।
नई दिल्ली, 27 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। केंद्र सरकार ने शुक्रवार को पुष्टि की है कि पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में कोई परिवर्तन नहीं किया जाएगा और एक्साइज ड्यूटी में कमी का लाभ सीधे उपभोक्ताओं को नहीं दिया जाएगा। इसके बजाय, यह तेल कंपनियों को हो रहे नुकसान की भरपाई के लिए उपयोग किया जाएगा।
पेट्रोलियम मंत्रालय ने बताया कि, "इससे सरकारी ऑयल मार्केटिंग कंपनियों - इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन, भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन की अंडर रिकवरी में कमी लाने में मदद मिलेगी, क्योंकि ये कंपनियां लागत से बहुत कम दाम पर पेट्रोल और डीजल बेच रही हैं।"
वर्तमान अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों के कारण, तेल कंपनियों को पेट्रोल पर लगभग 26 रुपए प्रति लीटर और डीजल पर 81.90 रुपए प्रति लीटर का नुकसान हो रहा है।
ऑयल मार्केटिंग कंपनियों द्वारा प्रतिदिन उठाए जा रहे कुल नुकसान की राशि लगभग 2,400 करोड़ रुपए है।
मंत्रालय ने बताया कि एक्साइज ड्यूटी में कटौती से इन नुकसानों में से 10 रुपए प्रति लीटर की भरपाई हो जाएगी, जिससे कंपनियां खुदरा कीमतों को अपरिवर्तित रखते हुए ईंधन की आपूर्ति जारी रख सकेंगी।
सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी में तत्काल प्रभाव से 10 रुपए प्रति लीटर की कमी की है।
मंत्रालय ने कहा, "यह निर्णय अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में हुई तीव्र वृद्धि के जवाब में लिया गया है, जो पश्चिम एशिया में संघर्ष और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखलाओं में व्यवधान के कारण चार सप्ताह में 75 प्रतिशत बढ़कर लगभग 122 डॉलर प्रति बैरल हो गई है।"
वैश्विक ईंधन बाजारों के संदर्भ में, वर्तमान संकट की शुरुआत के बाद से दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों में ईंधन की कीमतों में 30 से 50 प्रतिशत, उत्तरी अमेरिका में 30 प्रतिशत और यूरोप में 20 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। भारत ने इस पर स्थिरता बनाए रखी है, जिससे एक वित्तीय लागत भी आई है, जिसे सरकार ने वहन करने का निर्णय लिया है।
इससे पहले, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा था कि पश्चिम एशिया में तनाव के बीच घरेलू खपत के लिए पेट्रोल और डीजल पर सेंट्रल एक्साइज ड्यूटी में 10 रुपए प्रति लीटर की कमी की गई है, जिससे उपभोक्ताओं को कीमतों में वृद्धि से सुरक्षा मिलेगी।
अब पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी घटकर 3 रुपए प्रति लीटर हो गई है, जो पहले 13 रुपए प्रति लीटर थी। वहीं, डीजल पर एक्साइज ड्यूटी शून्य हो गई है, जो पहले 10 रुपए प्रति लीटर थी।
वित्त मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नागरिकों को आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति और लागत में उतार-चढ़ाव से बचाने के लिए हमेशा प्रयास किए हैं।
इसके अतिरिक्त, डीजल के निर्यात पर 21.5 रुपए प्रति लीटर और एटीएफ पर 29.5 रुपए प्रति लीटर का शुल्क लगाया गया है, जिससे घरेलू खपत के लिए इन उत्पादों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित होगी।