पेट्रोल-डीजल कीमतें काबू में रखने को सरकार प्रतिबद्ध, ₹1.23 लाख करोड़ के राजस्व नुकसान की कीमत पर दी राहत
सारांश
मुख्य बातें
केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में तेल कीमतों में आई तेज़ी के बावजूद पेट्रोल और डीजल की घरेलू कीमतों को नियंत्रण में रखने के लिए वित्तीय और प्रशासनिक उपाय जारी रहेंगे। राज्यसभा में 4 अगस्त 2026 को दिए गए एक लिखित उत्तर में वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि उपभोक्ताओं पर वैश्विक ऊर्जा मूल्य वृद्धि का बोझ न्यूनतम रखने के लिए स्थिति पर निरंतर नज़र रखी जा रही है।
उत्पाद शुल्क में कटौती और राजस्व का बोझ
मंत्री पंकज चौधरी ने बताया कि इस वर्ष सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर लागू विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क में ₹10 प्रति लीटर की कटौती की। यह निर्णय पश्चिम एशिया में बढ़े तनाव — विशेषकर होर्मुज़ जलडमरूमध्य के बंद होने के बाद — के चलते अंतरराष्ट्रीय ईंधन कीमतों में आई उछाल के असर को कम करने के उद्देश्य से लिया गया था।
इस शुल्क कटौती के कारण वित्त वर्ष 2026-27 में सरकारी खज़ाने को अनुमानतः ₹1.23 लाख करोड़ के राजस्व का नुकसान होने की संभावना है। इसके बावजूद सरकार का तर्क है कि इस कदम से आम उपभोक्ताओं को प्रत्यक्ष राहत मिली और सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों (OMC) को भी बढ़ती लागत के दबाव से आंशिक राहत प्राप्त हुई।
तेल कंपनियों की आपूर्ति निर्बाध रखना प्राथमिकता
चौधरी ने कहा कि उत्पाद शुल्क में की गई कमी ने सरकारी तेल कंपनियों द्वारा वहन किए जा रहे आंशिक घाटे को संतुलित करने में सहायता की, जिससे ये कंपनियाँ देश भर में बिना किसी व्यवधान के ईंधन आपूर्ति बनाए रख सकीं। गौरतलब है कि वैश्विक ऊर्जा संकट के दौरान OMC पर मूल्य नियंत्रण और बाज़ार दरों के बीच के अंतर का सीधा वित्तीय दबाव पड़ता है।
राजकोषीय अनुशासन के साथ राहत का संतुलन
सरकार की रणनीति तीन स्तंभों पर टिकी है — राजस्व और व्यय रुझानों की सतत निगरानी, प्राथमिकता के आधार पर सरकारी खर्च में फेरबदल, और आर्थिक परिस्थितियों के अनुरूप समय पर वित्तीय निर्णय। मंत्री ने स्पष्ट किया कि भविष्य में भी ईंधन कीमतों में अस्थिरता आने पर आवश्यक कदम उठाए जाएंगे, लेकिन यह सुनिश्चित किया जाएगा कि इससे राजकोषीय अनुशासन पर अनावश्यक दबाव न पड़े।
यह ऐसे समय में आया है जब सरकार बजटीय प्रतिबद्धताओं को पूरा करने और व्यापक आर्थिक स्थिरता बनाए रखने के दोहरे लक्ष्य पर काम कर रही है।
ऊर्जा सुरक्षा की दिशा में बहुआयामी रणनीति
दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा को मज़बूत करने के लिए सरकार कई मोर्चों पर सक्रिय है। इनमें कच्चे तेल के आयात स्रोतों में विविधता, सामरिक पेट्रोलियम भंडार का विस्तार, वैकल्पिक एवं स्वच्छ ईंधनों को प्रोत्साहन, और ऊर्जा दक्षता में सुधार शामिल हैं। सरकार का मानना है कि इन उपायों से भारतीय अर्थव्यवस्था बाहरी ऊर्जा झटकों के प्रति कम संवेदनशील बनेगी।
रूसी कच्चे तेल की खरीद में उल्लेखनीय वृद्धि
इस बीच, जुलाई में भारत ने रियायती दरों पर उपलब्ध रूसी कच्चे तेल की खरीद में उल्लेखनीय बढ़ोतरी की, जो उस महीने देश के कुल तेल आयात का 50 प्रतिशत से अधिक रही। होर्मुज़ जलडमरूमध्य बंद होने के बाद खाड़ी देशों पर निर्भरता घटाने और आयात विविधीकरण की रणनीति के तहत यह कदम उठाया गया है। आलोचकों का कहना है कि रूसी तेल पर बढ़ती निर्भरता एक अलग किस्म का भू-राजनीतिक जोखिम पैदा कर सकती है, जिस पर दीर्घकालिक नज़र रखना ज़रूरी होगा।