2 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

पेट्रोल-डीजल में कटौती फिलहाल नहीं: हरदीप पुरी, ₹2.18 लाख करोड़ अंडर-रिकवरी का हवाला

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
पेट्रोल-डीजल में कटौती फिलहाल नहीं: हरदीप पुरी, ₹2.18 लाख करोड़ अंडर-रिकवरी का हवाला

सारांश

पेट्रोल-डीजल सस्ता होने की उम्मीद फिलहाल धराशायी — पेट्रोलियम मंत्री हरदीप पुरी ने साफ कहा कि ₹2.18 लाख करोड़ की अंडर-रिकवरी और महँगे पुराने स्टॉक के बोझ तले ओएमसी के लिए कीमत घटाना अभी व्यावहारिक नहीं। वैश्विक कच्चे तेल में नरमी के बावजूद उपभोक्ताओं को राहत मिलती नहीं दिख रही।

मुख्य बातें

पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने 2 जुलाई को कहा कि पेट्रोल-डीजल की खुदरा कीमतों में अभी कटौती संभव नहीं।
सरकारी तेल विपणन कंपनियाँ (ओएमसी) करीब ₹2.18 लाख करोड़ की संचयी अंडर-रिकवरी की भरपाई कर रही हैं।
पिछले चार वर्षों में पेट्रोल 5.58% और डीजल 6.23% ही महँगा हुआ।
देश भर के करीब 1.07 लाख पेट्रोल पंप स्ट्रेट ऑफ होर्मुज संकट के दौरान भी निर्बाध चलते रहे।
2030 तक भारत की रिफाइनिंग क्षमता 309.5 एमएमटीपीए तक बढ़ाने का लक्ष्य।

केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने गुरुवार, 2 जुलाई को स्पष्ट किया कि मौजूदा हालात में पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में कोई कटौती संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि सरकारी तेल विपणन कंपनियाँ (ओएमसी) अभी भी करीब ₹2.18 लाख करोड़ की संचयी अंडर-रिकवरी की भरपाई कर रही हैं, जो किसी भी मूल्य राहत को फिलहाल व्यावहारिक नहीं बनाती।

मंत्री का स्पष्ट रुख

पुरी ने कहा, 'इसलिए इस समय ईंधन की कीमतों को कम करने का सवाल जायज नहीं है।' उन्होंने बताया कि ओएमसी के पास अभी भी वह ईंधन स्टॉक मौजूद है जिसे तब खरीदा गया था जब अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में कच्चे तेल की कीमतें काफी ऊँची थीं। ऐसे में खुदरा दरों में कटौती करना वित्तीय दृष्टि से उचित नहीं होगा।

पिछले चार वर्षों में मूल्य स्थिरता

मंत्री ने आँकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि पिछले चार वर्षों में पेट्रोल की कीमतों में केवल 5.58 प्रतिशत और डीजल की कीमतों में 6.23 प्रतिशत की ही बढ़ोतरी हुई है। उनके अनुसार, वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल में भारी उतार-चढ़ाव के बावजूद भारत में ईंधन दरें काफी हद तक स्थिर रही हैं। यह स्थिरता सरकार की ओर से जानबूझकर झटकों को खुद वहन करने की नीति का परिणाम बताई गई।

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज संकट और आपूर्ति सुरक्षा

पुरी ने हाल ही में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के आसपास उत्पन्न भू-राजनीतिक तनाव का उल्लेख करते हुए कहा कि उस दौरान भी देश में ईंधन आपूर्ति पूरी तरह सामान्य रही। उन्होंने कहा, 'देश के किसी भी पेट्रोल पंप पर ईंधन खत्म होने (ड्राई-आउट) की स्थिति नहीं आई।' देश भर में करीब 1.07 लाख पेट्रोल पंप पूरे संकट के दौरान निर्बाध रूप से संचालित होते रहे।

2030 तक रिफाइनिंग क्षमता का विस्तार

मंत्री ने बताया कि सरकार देश के ऊर्जा ढाँचे को और सुदृढ़ करने की दिशा में काम कर रही है। 2030 तक भारत की रिफाइनिंग क्षमता बढ़कर 309.5 मिलियन मीट्रिक टन प्रति वर्ष (एमएमटीपीए) होने का लक्ष्य है। इसके लिए कई रिफाइनरी विस्तार परियोजनाएँ और नई ग्रीनफील्ड रिफाइनरियाँ विकसित की जा रही हैं, जिनमें से कुछ अगले दो वर्षों में पूरी होने की उम्मीद है।

आम उपभोक्ता पर असर

पेट्रोल-डीजल की कीमतों में राहत की प्रतीक्षा कर रहे करोड़ों उपभोक्ताओं के लिए यह बयान निराशाजनक संकेत है। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक कच्चे तेल की कीमतें हाल के महीनों में नरम हुई हैं और विपक्षी दलों ने ईंधन मूल्य कटौती की माँग तेज़ की है। सरकार का तर्क है कि ओएमसी की वित्तीय स्थिति और पुराने महँगे स्टॉक को देखते हुए अभी कटौती का दबाव उचित नहीं है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो सरकार की 'बफर-अवशोषण' नीति की सीमाओं को उजागर करता है। ₹2.18 लाख करोड़ की अंडर-रिकवरी का तर्क वैध है, लेकिन सवाल यह है कि इस घाटे की पारदर्शी ऑडिट कब होगी और ओएमसी के मुनाफे के वर्षों में इसकी भरपाई क्यों नहीं हुई। विपक्ष और आम उपभोक्ता दोनों यह जानना चाहते हैं कि 'राहत की खिड़की' खुलने की कोई समय-सीमा है या यह अनिश्चितकाल के लिए टाली जाती रहेगी।
RashtraPress
2 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पेट्रोल-डीजल की कीमतें अभी क्यों नहीं घटाई जा रहीं?
पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी के अनुसार, सरकारी तेल विपणन कंपनियाँ अभी भी करीब ₹2.18 लाख करोड़ की संचयी अंडर-रिकवरी की भरपाई कर रही हैं। इसके अलावा, ओएमसी के पास महँगे दामों पर खरीदा गया पुराना ईंधन स्टॉक भी मौजूद है, जिससे फिलहाल कटौती व्यावहारिक नहीं है।
पिछले चार वर्षों में पेट्रोल-डीजल कितना महँगा हुआ?
मंत्री हरदीप पुरी ने बताया कि पिछले चार वर्षों में पेट्रोल की कीमतों में केवल 5.58 प्रतिशत और डीजल में 6.23 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। उन्होंने इसे वैश्विक कच्चे तेल के भारी उतार-चढ़ाव के बावजूद सरकार की स्थिरता नीति का परिणाम बताया।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज संकट के दौरान भारत में ईंधन आपूर्ति पर क्या असर पड़ा?
पुरी के अनुसार, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के आसपास तनाव के बावजूद भारत में किसी भी पेट्रोल पंप पर ईंधन खत्म होने की स्थिति नहीं आई। देश भर के करीब 1.07 लाख पेट्रोल पंप पूरे संकट के दौरान सामान्य रूप से संचालित होते रहे।
2030 तक भारत की रिफाइनिंग क्षमता कितनी होगी?
सरकार का लक्ष्य है कि 2030 तक भारत की रिफाइनिंग क्षमता बढ़कर 309.5 मिलियन मीट्रिक टन प्रति वर्ष (एमएमटीपीए) हो जाए। इसके लिए कई रिफाइनरी विस्तार परियोजनाएँ और नई ग्रीनफील्ड रिफाइनरियाँ विकसित की जा रही हैं, जिनमें से कुछ अगले दो वर्षों में पूरी होने की उम्मीद है।
क्या भविष्य में पेट्रोल-डीजल सस्ता होने की कोई संभावना है?
मंत्री पुरी ने फिलहाल कोई समय-सीमा नहीं बताई है। उनका कहना है कि जब तक ओएमसी की अंडर-रिकवरी और पुराने महँगे स्टॉक का बोझ कम नहीं होता, तब तक खुदरा कीमतों में कटौती का सवाल जायज नहीं है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 2 सप्ताह पहले
  2. 2 सप्ताह पहले
  3. 3 सप्ताह पहले
  4. 1 महीना पहले
  5. 1 महीना पहले
  6. 1 महीना पहले
  7. 3 महीने पहले
  8. 3 महीने पहले