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पेट्रोल-डीजल एक्साइज ड्यूटी कटौती से केंद्र पर ₹30,000 करोड़ का बोझ, उपभोक्ताओं को राहत बरकरार

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पेट्रोल-डीजल एक्साइज ड्यूटी कटौती से केंद्र पर ₹30,000 करोड़ का बोझ, उपभोक्ताओं को राहत बरकरार

सारांश

पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी कटौती का ₹30,000 करोड़ का बोझ केंद्र सरकार ने खुद उठाया — उपभोक्ताओं को राहत मिली। साथ ही, कांग्रेस के 2014 मूल्य-तुलना तर्क पर सवाल उठे, क्योंकि वह कीमत ₹1.34 लाख करोड़ के ऑयल बॉन्ड की छाया में बनी थी।

मुख्य बातें

27 मार्च 2026 को पेट्रोल-डीजल पर एसएईडी कटौती से चालू वित्त वर्ष में केंद्र सरकार पर करीब ₹30,000 करोड़ का राजस्व बोझ पड़ा।
कटौती के बाद पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी ₹3 प्रति लीटर और डीजल पर शून्य कर दी गई।
यूपीए सरकार ने 2005-2010 के बीच तेल कंपनियों को करीब ₹1.34 लाख करोड़ के ऑयल बॉन्ड जारी किए थे, जिनका भुगतान मोदी सरकार कर रही है।
मोदी सरकार ने वित्त वर्ष 2024-25 में ₹52,860 करोड़ और 2025-26 में ₹36,913 करोड़ बॉन्ड भुगतान किया।
सूत्रों के अनुसार, इस बार कोई नया ऑयल बॉन्ड जारी नहीं किया गया और न ही भविष्य के करदाताओं पर बोझ डाला गया।

नई दिल्ली27 मार्च 2026 को पेट्रोल और डीजल पर स्पेशल एडिशनल एक्साइज ड्यूटी (एसएईडी) में की गई कटौती से चालू वित्त वर्ष में केंद्र सरकार के राजस्व पर करीब ₹30,000 करोड़ का अतिरिक्त भार पड़ा है। सूत्रों के अनुसार, कच्चे तेल की बढ़ी हुई कीमतों का यह बोझ उपभोक्ताओं पर नहीं डाला गया — सरकार ने इसे स्वयं वहन किया।

कटौती का विवरण और तत्काल असर

होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यवधान के बीच अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आने के बाद केंद्र सरकार ने एसएईडी में कटौती का निर्णय लिया। इस कटौती के बाद पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी घटाकर ₹3 प्रति लीटर कर दी गई, जबकि डीजल पर एक्साइज ड्यूटी शून्य कर दी गई। सूत्रों के अनुसार, यह कटौती पारदर्शी तरीके से और बजट के दायरे में की गई, जिसका असर एक दिन के भीतर पेट्रोल पंपों पर दिखाई दिया।

कांग्रेस का तर्क और सरकार का पक्ष

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस / INC) का तर्क है कि मई 2014 में पेट्रोल की कीमत लगभग ₹71 प्रति लीटर थी, जबकि वर्तमान में यह करीब ₹98 प्रति लीटर है। पार्टी इस अंतर को अधिक कर वसूली का प्रमाण बता रही है।

हालांकि, सूत्रों के मुताबिक यह तुलना भ्रामक है। 2005 से 2010 के बीच तत्कालीन यूपीए सरकार ने सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों को मूल्य अंतर की भरपाई के बदले करीब ₹1.34 लाख करोड़ के ऑयल बॉन्ड जारी किए थे। इस कारण 2014 की कीमत वास्तविक आपूर्ति लागत को नहीं, बल्कि एक स्थगित कर-बोझ को दर्शाती थी, जिसे अगली पीढ़ी के उपभोक्ताओं पर डाला गया था।

ऑयल बॉन्ड का बोझ और मौजूदा सरकार का भुगतान

सूत्रों के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार पिछले कई वर्षों से इन्हीं बॉन्ड्स का भुगतान कर रही है। आँकड़ों के अनुसार, सरकार ने वित्त वर्ष 2021-22 में करीब ₹10,000 करोड़, 2023-24 में ₹31,150 करोड़, 2024-25 में ₹52,860 करोड़ और 2025-26 में ₹36,913 करोड़ का भुगतान किया है। इसके अतिरिक्त हजारों करोड़ रुपए का ब्याज भी अदा किया गया है।

यह ऐसे समय में आया है जब ईंधन मूल्य नीति पर राजनीतिक बहस तेज है। गौरतलब है कि मौजूदा सरकार ने कोई नया ऑयल बॉन्ड जारी नहीं किया और न ही भविष्य के करदाताओं पर अतिरिक्त बोझ डाला।

सरकार का नीतिगत दृष्टिकोण

जब 2022 और पुनः 2026 में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया, तब केंद्र सरकार ने एक्साइज ड्यूटी में कटौती का मार्ग अपनाया। सूत्रों के अनुसार, इस बार राजस्व में हुई कमी को सरकार ने सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया और उसे बजट के भीतर समायोजित किया — बिना किसी छिपे वित्तीय दायित्व के।

आगे क्या

कच्चे तेल की वैश्विक कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रहने की स्थिति में एक्साइज ड्यूटी की समीक्षा का प्रश्न प्रासंगिक बना रहेगा। आलोचकों का कहना है कि दीर्घकालिक ईंधन मूल्य स्थिरता के लिए एक स्थायी नीति ढाँचे की आवश्यकता है, न कि केवल स्थितिजन्य कटौतियों की।

संपादकीय दृष्टिकोण

000 करोड़ की यह राजस्व कटौती सरकार की उपभोक्ता-हितैषी मंशा को दर्शाती है, लेकिन असली सवाल यह है कि क्या यह नीति टिकाऊ है। होर्मुज जैसे भू-राजनीतिक झटकों के हर दौर में एक्साइज ड्यूटी घटाना एक अल्पकालिक समाधान है, दीर्घकालिक नीति नहीं। ऑयल बॉन्ड की बहस राजनीतिक रूप से सुविधाजनक है, लेकिन यह इस तथ्य को नहीं बदलती कि भारत में ईंधन कर अभी भी वैश्विक औसत से ऊँचे हैं। जब तक ईंधन को जीएसटी के दायरे में लाने पर गंभीर विचार नहीं होता, तब तक यह बहस हर कीमत-उछाल के साथ लौटती रहेगी।
RashtraPress
8 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी कटौती से केंद्र सरकार पर कितना बोझ पड़ा?
27 मार्च 2026 को की गई एसएईडी कटौती से चालू वित्त वर्ष में केंद्र सरकार के खजाने पर करीब ₹30,000 करोड़ का अतिरिक्त बोझ पड़ा है। सरकार ने यह बोझ स्वयं वहन किया और उपभोक्ताओं पर कीमत वृद्धि नहीं डाली।
एसएईडी कटौती के बाद पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी कितनी रह गई?
कटौती के बाद पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी ₹3 प्रति लीटर कर दी गई, जबकि डीजल पर एक्साइज ड्यूटी शून्य कर दी गई। यह कटौती होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यवधान के कारण कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के बाद की गई।
कांग्रेस का 2014 की पेट्रोल कीमत वाला तर्क क्यों विवादास्पद है?
कांग्रेस मई 2014 की ₹71 प्रति लीटर कीमत को संदर्भ बिंदु बता रही है, लेकिन सूत्रों के अनुसार वह कीमत यूपीए सरकार द्वारा 2005-2010 के बीच जारी किए गए करीब ₹1.34 लाख करोड़ के ऑयल बॉन्ड की वजह से कृत्रिम रूप से कम थी। इन बॉन्ड्स का भुगतान मौजूदा सरकार कर रही है।
मोदी सरकार ने ऑयल बॉन्ड के भुगतान में अब तक कितनी राशि चुकाई है?
आँकड़ों के अनुसार, सरकार ने वित्त वर्ष 2021-22 में ₹10,000 करोड़, 2023-24 में ₹31,150 करोड़, 2024-25 में ₹52,860 करोड़ और 2025-26 में ₹36,913 करोड़ का भुगतान किया है। इसके अलावा हजारों करोड़ रुपए का ब्याज भी अदा किया गया है।
क्या इस बार सरकार ने नए ऑयल बॉन्ड जारी किए?
सूत्रों के अनुसार, इस बार कोई नया ऑयल बॉन्ड जारी नहीं किया गया और न ही भविष्य के करदाताओं पर कोई अतिरिक्त वित्तीय दायित्व डाला गया। राजस्व में हुई कमी को बजट के भीतर पारदर्शी तरीके से समायोजित किया गया।
राष्ट्र प्रेस
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