6 अगस्त 2026
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मोहन भागवत के जेन-Z बयान पर अमित मालवीय बोले — संवाद की यह सकारात्मक और विचारशील शुरुआत

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मोहन भागवत के जेन-Z बयान पर अमित मालवीय बोले — संवाद की यह सकारात्मक और विचारशील शुरुआत

सारांश

RSS सरसंघचालक मोहन भागवत ने मुंबई में जेन-Z को 'ईमानदार' बताया और उनके विरोध को वैध माना। BJP आईटी प्रमुख अमित मालवीय ने इसे एक्स पर 'विचारशील शुरुआत' कहकर सराहा। यह संघ-परिवार की ओर से युवा पीढ़ी के प्रति एक उल्लेखनीय सकारात्मक संकेत है।

मुख्य बातें

BJP आईटी प्रमुख अमित मालवीय ने 6 अगस्त को एक्स पर RSS सरसंघचालक मोहन भागवत के जेन-Z बयान का स्वागत किया।
भागवत ने मुंबई में 2,000 से अधिक जेन-Z और जेन-अल्फा छात्रों को संबोधित करते हुए कहा था कि उनकी शिकायतें 'वास्तविक' हैं।
भागवत ने स्पष्ट किया कि विरोध-प्रदर्शन करने वाले युवाओं को 'राष्ट्रविरोधी' नहीं कहा जा सकता।
मालवीय ने कहा कि लोकतंत्र में वास्तविक चिंताओं को स्वीकार कर संवाद करना आत्मविश्वासी राष्ट्र की पहचान है।
भागवत ने शिक्षा नीति में सुधार की ज़रूरत पर भी ज़ोर दिया था।

भारतीय जनता पार्टी (BJP) के आईटी प्रकोष्ठ के प्रमुख अमित मालवीय ने 6 अगस्त 2026 को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत के जेन-Z और छात्र विरोध-प्रदर्शनों पर दिए गए बयान का खुलकर स्वागत किया। मालवीय ने कहा कि सार्थक संवाद की बुनियाद यही है कि दूसरे पक्ष के विचारों को सुनने और समझने की इच्छाशक्ति हो।

मालवीय ने एक्स पर क्या लिखा

मालवीय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा — 'सार्थक संवाद की दिशा में पहला कदम यह स्वीकार करना है कि सामने वाले के पास भी ऐसा दृष्टिकोण है, जिसे सुना जाना चाहिए। जेन-Z को लेकर मोहन भागवत जी की टिप्पणी इसी दिशा में एक विचारशील शुरुआत है।' उन्होंने भागवत के उस वक्तव्य का विशेष उल्लेख किया जिसमें सरसंघचालक ने कहा था कि 'उनकी (जेन-Z की) शिकायतें वास्तविक हैं।'

विरोध-प्रदर्शन पर भागवत का रुख और मालवीय की व्याख्या

मालवीय के अनुसार, भागवत ने लोकतंत्र में विरोध-प्रदर्शन की भूमिका को लेकर एक महत्वपूर्ण अंतर स्पष्ट किया — जब संवाद से समाधान नहीं निकलता, तब विरोध-प्रदर्शन सहमति बनाने का एक वैध माध्यम है। हालाँकि, उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि इसका उद्देश्य मतभेदों को सुलझाना होना चाहिए, न कि सामाजिक विभाजन को और गहरा करना।

BJP नेता ने कहा कि वास्तविक चिंताओं को स्वीकार करते हुए संवाद की आवश्यकता पर बल देना एक आत्मविश्वासी लोकतंत्र की पहचान है। उन्होंने उम्मीद जताई कि यदि जेन-Z के साथ संवाद इसी सोच के साथ आगे बढ़ता है, तो यह एक रचनात्मक और स्वागतयोग्य कदम होगा।

भागवत ने मुंबई कार्यक्रम में क्या कहा था

दरअसल, RSS प्रमुख मोहन भागवत ने मुंबई में आयोजित इंटरनेशनल मूवमेंट टू यूनाइट नेशंस के एक कार्यक्रम में 2,000 से अधिक जेन-Z और जेन-अल्फा छात्रों को संबोधित करते हुए कहा था कि नई पीढ़ी पिछली पीढ़ियों की तुलना में अधिक ईमानदार है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि उन्हें किसी पर आँख मूँदकर भरोसा करना हो, तो वह जेन-Z पर करेंगे।

भागवत ने स्पष्ट किया था कि किसी मुद्दे पर विरोध करने वाले युवाओं को 'राष्ट्रविरोधी' नहीं कहा जा सकता और उनकी शिकायतों को गंभीरता से सुना जाना चाहिए। उन्होंने शिक्षा नीति में सुधार की ज़रूरत पर भी ज़ोर दिया था।

व्यापक संदर्भ और महत्व

यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में छात्र-युवा आंदोलनों को लेकर राजनीतिक विमर्श तेज़ है। गौरतलब है कि RSS और BJP, दोनों की ओर से एक साथ जेन-Z के प्रति इस तरह का सकारात्मक और समावेशी स्वर अपेक्षाकृत नया है। आलोचकों का कहना है कि इस बयान की व्यावहारिक परिणति नीतिगत बदलावों में दिखनी चाहिए, केवल वक्तव्यों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। आगे देखना होगा कि यह संवाद की शुरुआत ठोस नीतिगत संवाद का रूप लेती है या नहीं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी यह होगी कि क्या यह संवाद शिक्षा नीति, रोज़गार या नागरिक स्वतंत्रता जैसे ठोस मुद्दों पर नीतिगत बदलाव में तब्दील होता है। आलोचकों का कहना है कि बिना नीतिगत जवाबदेही के यह वक्तव्य केवल जनसंपर्क का औज़ार बनकर रह सकता है।
RashtraPress
6 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मोहन भागवत ने जेन-Z के बारे में क्या कहा था?
RSS सरसंघचालक मोहन भागवत ने मुंबई में एक कार्यक्रम में कहा था कि जेन-Z पिछली पीढ़ियों से अधिक ईमानदार है और उनकी शिकायतें वास्तविक हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि विरोध करने वाले युवाओं को 'राष्ट्रविरोधी' नहीं कहा जा सकता।
अमित मालवीय ने भागवत के बयान का स्वागत क्यों किया?
BJP के आईटी प्रमुख अमित मालवीय ने एक्स पर लिखा कि भागवत की टिप्पणी सार्थक संवाद की दिशा में एक विचारशील शुरुआत है। उनके अनुसार, दूसरे पक्ष के दृष्टिकोण को सुनने की इच्छाशक्ति ही किसी भी संवाद की पहली शर्त है।
भागवत ने विरोध-प्रदर्शन को लेकर क्या रुख अपनाया?
भागवत ने कहा कि लोकतंत्र में विरोध-प्रदर्शन संवाद का एक वैध माध्यम है, लेकिन इसका उपयोग सामाजिक विभाजन बढ़ाने के लिए नहीं होना चाहिए। उनके अनुसार, विरोध का उद्देश्य मतभेदों को सुलझाना होना चाहिए।
यह कार्यक्रम कहाँ और किसके लिए आयोजित था?
यह कार्यक्रम मुंबई में इंटरनेशनल मूवमेंट टू यूनाइट नेशंस द्वारा आयोजित किया गया था, जिसमें 2,000 से अधिक जेन-Z और जेन-अल्फा छात्र शामिल हुए। भागवत ने इन्हीं छात्रों को संबोधित किया था।
भागवत ने शिक्षा नीति पर क्या कहा?
भागवत ने अपने संबोधन में शिक्षा नीति में सुधार की आवश्यकता पर ज़ोर दिया, हालाँकि उन्होंने विशिष्ट सुधारों का विस्तार से उल्लेख नहीं किया। यह टिप्पणी जेन-Z की चिंताओं को स्वीकार करने के व्यापक संदर्भ में की गई थी।
राष्ट्र प्रेस
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