31 अक्टूबर 2026
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भारत में सामाजिक सुरक्षा कवरेज 2015 के 19% से बढ़कर 2026 में 68.4% हुआ, 1 अरब से अधिक लोग दायरे में

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भारत में सामाजिक सुरक्षा कवरेज 2015 के 19% से बढ़कर 2026 में 68.4% हुआ, 1 अरब से अधिक लोग दायरे में

सारांश

भारत ने एक दशक में सामाजिक सुरक्षा कवरेज को 19% से 68.4% तक पहुँचाया — 1 अरब से अधिक लोग इस दायरे में। EPFO सदस्यता दोगुनी हुई, पेंशनभोगी 82 लाख तक पहुँचे और दावों का निपटान पाँच गुना बढ़ा। अब असली चुनौती बाकी 31.6% अनौपचारिक कार्यबल को इस सुरक्षा छत्र के नीचे लाना है।

मुख्य बातें

भारत में सामाजिक सुरक्षा कवरेज 2015 के 19% से बढ़कर 2026 में 68.4% हो गया है।
1 अरब से अधिक लोग सामाजिक सुरक्षा ढाँचे के दायरे में आए।
EPFO की योगदान-सदस्यता 3.49 करोड़ (2014-15) से बढ़कर 7.98 करोड़ ( 16 सितंबर 2026 तक) हुई।
पेंशनभोगियों की संख्या 51.04 लाख से बढ़कर 82 लाख तक पहुँची — 31 लाख से अधिक नए पेंशनभोगी जुड़े।
वार्षिक दावों का निपटान 1.30 करोड़ से बढ़कर 6.42 करोड़ हुआ।
7.68 लाख प्रतिष्ठान सितंबर 2026 तक EPFO में योगदान दे रहे हैं।

भारत में सामाजिक सुरक्षा कवरेज वर्ष 2015 के 19 प्रतिशत से बढ़कर 2026 में 68.4 प्रतिशत तक पहुँच गया है, जिससे देश में 1 अरब से अधिक लोग सामाजिक सुरक्षा के दायरे में आ गए हैं। केंद्र सरकार की ओर से 31 अक्टूबर 2026 को जारी फैक्टशीट में यह जानकारी सामने आई।

मुख्य घटनाक्रम

सरकारी फैक्टशीट के अनुसार, कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) ने पिछले एक दशक में अपनी सदस्यता, संस्थागत कवरेज और पेंशन सहायता तीनों मोर्चों पर उल्लेखनीय विस्तार दर्ज किया है। यह विस्तार भारत के औपचारिक कार्यबल की बढ़ती संख्या के साथ समानांतर हुआ है।

गौरतलब है कि सामाजिक सुरक्षा के दायरे में यह विस्तार केवल संख्यात्मक नहीं, बल्कि संरचनात्मक भी है — जिसमें डिजिटल सेवा वितरण और सरलीकृत अनुपालन तंत्र की भूमिका बताई गई है।

EPFO सदस्यता में वृद्धि

आँकड़ों के अनुसार, EPFO की योगदान-सदस्यता 2014-15 में 3.49 करोड़ थी, जो 16 सितंबर 2026 तक बढ़कर 7.98 करोड़ हो गई — यानी इस अवधि में लगभग 4.49 करोड़ नए सदस्य जुड़े।

सितंबर 2026 तक देशभर में 7.68 लाख प्रतिष्ठान EPFO में योगदान दे रहे हैं, जो पात्र श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा का व्यापक संस्थागत आधार प्रदान करता है।

पेंशनभोगियों की संख्या में उछाल

फैक्टशीट के अनुसार, 2014-15 में EPFO ने 51.04 लाख पेंशनभोगियों को पेंशन का भुगतान किया था। सितंबर 2026 तक यह संख्या बढ़कर लगभग 82 लाख हो गई है — अर्थात् 31 लाख से अधिक नए पेंशनभोगी इस ढाँचे में जुड़े।

यह ऐसे समय में आया है जब देश में वृद्ध होती जनसंख्या और असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा देने की माँग लगातार बढ़ रही है।

दावों के निपटान में छह गुना वृद्धि

सेवाओं के पैमाने में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है। 2014-15 के दौरान EPFO ने 1.30 करोड़ दावों का निपटान किया था। पिछले एक वर्ष की अवधि (अक्टूबर 2026 तक) में यह संख्या बढ़कर 6.42 करोड़ हो गई — यानी निपटाए गए दावों में लगभग पाँच गुना की वृद्धि।

सरकार का कहना है कि सरलीकृत अनुपालन प्रक्रियाओं और प्रौद्योगिकी-सक्षम डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म ने इस त्वरित सेवा वितरण को संभव बनाया है।

आगे की राह

फैक्टशीट में कहा गया है कि भविष्य निधि, पेंशन, बीमा और सामाजिक सहायता की पहल मिलकर औपचारिक और अनौपचारिक दोनों क्षेत्रों में श्रमिकों की मदद करती हैं। सरकार के अनुसार, एक अधिक समावेशी और सुलभ सामाजिक सुरक्षा प्रणाली बनाने की दिशा में प्रयास जारी रहेंगे। अनौपचारिक क्षेत्र के शेष 31.6 प्रतिशत कार्यबल तक पहुँचना सरकार के लिए अगला बड़ा लक्ष्य माना जा रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसे परिप्रेक्ष्य में देखना ज़रूरी है — यह कवरेज मुख्यतः EPFO जैसी औपचारिक संस्थाओं के विस्तार पर टिका है, जबकि भारत का लगभग 90% कार्यबल आज भी अनौपचारिक क्षेत्र में है। बाकी 31.6 प्रतिशत तक पहुँचना सबसे कठिन काम होगा, क्योंकि इसमें प्रवासी मज़दूर, घरेलू कामगार और दिहाड़ी श्रमिक शामिल हैं जो संस्थागत रिकॉर्ड से बाहर हैं। फैक्टशीट में दिए गए आँकड़े सरकारी दृष्टिकोण से प्रगति दर्शाते हैं, लेकिन स्वतंत्र सत्यापन और गुणवत्ता-आधारित लाभ वितरण के आँकड़ों की अनुपस्थिति इस तस्वीर को अधूरा बनाती है।
RashtraPress
31 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत में सामाजिक सुरक्षा कवरेज 2026 में कितने प्रतिशत हो गया है?
सरकारी फैक्टशीट के अनुसार, भारत में सामाजिक सुरक्षा कवरेज 2015 के 19 प्रतिशत से बढ़कर 2026 में 68.4 प्रतिशत हो गया है। इससे 1 अरब से अधिक लोग इस सुरक्षा ढाँचे के दायरे में आ गए हैं।
EPFO की सदस्यता में कितनी वृद्धि हुई है?
EPFO की योगदान-सदस्यता 2014-15 में 3.49 करोड़ थी, जो 16 सितंबर 2026 तक बढ़कर 7.98 करोड़ हो गई — यानी लगभग 4.49 करोड़ नए सदस्य जुड़े। सितंबर 2026 तक 7.68 लाख प्रतिष्ठान EPFO में योगदान दे रहे हैं।
EPFO के तहत पेंशन पाने वालों की संख्या कितनी हो गई है?
सितंबर 2026 तक EPFO के तहत लगभग 82 लाख पेंशनभोगियों को पेंशन लाभ मिल रहा है, जबकि 2014-15 में यह संख्या 51.04 लाख थी। इस अवधि में 31 लाख से अधिक नए पेंशनभोगी जुड़े हैं।
EPFO द्वारा दावों के निपटान में कितना सुधार हुआ है?
2014-15 में EPFO ने 1.30 करोड़ दावों का निपटान किया था। अक्टूबर 2026 तक की एक वर्ष की अवधि में यह संख्या बढ़कर 6.42 करोड़ हो गई — यानी लगभग पाँच गुना वृद्धि। सरकार के अनुसार डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म और सरलीकृत प्रक्रियाओं ने इसमें अहम भूमिका निभाई है।
क्या भारत के सभी श्रमिक सामाजिक सुरक्षा के दायरे में आ गए हैं?
नहीं। सरकारी आँकड़ों के अनुसार कवरेज 68.4 प्रतिशत तक पहुँचा है, जिसका अर्थ है कि अभी भी लगभग 31.6 प्रतिशत आबादी इस ढाँचे से बाहर है। अनौपचारिक क्षेत्र के श्रमिकों — जैसे प्रवासी मज़दूर और दिहाड़ी कामगार — तक पहुँचना बड़ी चुनौती बनी हुई है।
राष्ट्र प्रेस
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