101 करोड़ भारतीय सामाजिक सुरक्षा दायरे में, ILO ने सराहा; EPFO डिजिटलीकरण और UPI निकासी पर विचार
सारांश
मुख्य बातें
केंद्र सरकार ने 31 जुलाई 2026 को घोषणा की कि भारत की सामाजिक सुरक्षा प्रणाली के अंतर्गत अब लगभग 101 करोड़ नागरिक — यानी देश की 68 प्रतिशत से अधिक आबादी — कम से कम एक सरकारी योजना के दायरे में आ चुके हैं। अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) ने भी इस उपलब्धि को मान्यता दी है।
मुख्य घोषणाएँ और नीतिगत दिशा
नई दिल्ली में ऑल इंडिया ऑर्गेनाइजेशन ऑफ एम्प्लॉयर्स (AIOE) और फिक्की (FICCI) द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित चौथे ग्लोबल इंडस्ट्रियल रिलेशंस समिट को संबोधित करते हुए केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री डॉ. मनसुख मंडाविया ने कहा कि एक संतुलित विकास मॉडल की आवश्यकता है — जो श्रमिकों के कल्याण और सामाजिक सुरक्षा को सुनिश्चित करे और साथ ही नियोक्ताओं के लिए व्यापार सुगमता भी बनाए रखे।
उन्होंने कहा कि औद्योगिक संबंधों में स्थिरता के लिए सरकार, उद्योग जगत, नियोक्ता संगठनों, श्रमिकों और ट्रेड यूनियनों के बीच निरंतर समन्वय अनिवार्य है, ताकि आर्थिक विकास और रोजगार सृजन एक साथ आगे बढ़ सकें।
रोजगार लोच में ऐतिहासिक सुधार
डॉ. मंडाविया ने रोजगार लोच के आँकड़े साझा करते हुए बताया कि अब जीडीपी में 1 प्रतिशत की वृद्धि पर रोजगार में 1.11 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज हो रही है। यह उल्लेखनीय बदलाव है, क्योंकि 12 वर्ष पहले यही आँकड़ा मात्र 0.008 प्रतिशत था। गौरतलब है कि यह सुधार रोजगार नीति की प्रभावशीलता का एक प्रमुख संकेतक माना जाता है।
मंत्री ने स्वयं सहायता समूहों (SHG) और सहकारी मॉडल — विशेषकर महिलाओं के नेतृत्व वाली पहलों — की भूमिका को भी रेखांकित किया। उनके अनुसार ये पहलें आजीविका के अवसर बढ़ाने, अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने और महिला सशक्तिकरण में महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं।
EPFO और ESIC में सुधार की रूपरेखा
केंद्रीय मंत्री ने कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) में डिजिटल सुधारों की जानकारी देते हुए बताया कि दावों की पूरी प्रक्रिया को डिजिटल किया जा रहा है और एकल UAN (यूनिवर्सल अकाउंट नंबर) के माध्यम से खातों के स्वत: हस्तांतरण की व्यवस्था लागू की जा रही है। इसके अतिरिक्त, UPI-आधारित निकासी की संभावना पर भी विचार किया जा रहा है।
कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ESIC) के संदर्भ में डॉ. मंडाविया ने कहा कि ESIC अब अकेले स्वास्थ्य सेवाएँ प्रदान करने वाला संस्थान नहीं रहेगा। बेहतर प्रदर्शन करने वाले निजी अस्पतालों को भी ESIC सुविधाओं के रूप में नामित किया जा सकता है — जो आगामी सुधारों का हिस्सा होगा।
ILO की पुष्टि और वैश्विक संदर्भ
दक्षिण एशिया के लिए ILO DWT और भारत कार्यालय की निदेशक मिचिको मियामोतो ने पुष्टि की कि ILO के अनुमान के अनुसार भारत में अब एक अरब से अधिक लोग कम से कम एक सामाजिक सुरक्षा योजना के दायरे में आ चुके हैं। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि आने वाले वर्षों में भारत की आर्थिक वृद्धि को नई गति देने में सहायक होगी।
यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर सामाजिक सुरक्षा के विस्तार को श्रम बाजार की स्थिरता और उपभोग-आधारित विकास से सीधे जोड़कर देखा जा रहा है। भारत के लिए यह आँकड़ा विशेष महत्व रखता है, क्योंकि देश की बड़ी आबादी अभी भी असंगठित क्षेत्र में कार्यरत है।
आगे की राह
EPFO के UPI-आधारित निकासी और स्वत: खाता हस्तांतरण जैसे सुधार लागू होने पर करोड़ों कर्मचारियों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है। ESIC में निजी अस्पतालों को शामिल करने की योजना स्वास्थ्य सेवाओं की पहुँच और गुणवत्ता दोनों को बेहतर कर सकती है। सरकार का अगला लक्ष्य असंगठित क्षेत्र के शेष श्रमिकों को भी सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाना है।