31 जुलाई 2026
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101 करोड़ भारतीय सामाजिक सुरक्षा दायरे में, ILO ने सराहा; EPFO डिजिटलीकरण और UPI निकासी पर विचार

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101 करोड़ भारतीय सामाजिक सुरक्षा दायरे में, ILO ने सराहा; EPFO डिजिटलीकरण और UPI निकासी पर विचार

सारांश

भारत में अब 101 करोड़ लोग — देश की 68% से अधिक आबादी — सामाजिक सुरक्षा के दायरे में हैं, जिसे ILO ने भी मान्यता दी है। EPFO में UPI-आधारित निकासी और स्वत: खाता हस्तांतरण जैसे डिजिटल सुधार तथा ESIC में निजी अस्पतालों को शामिल करने की योजना श्रम कल्याण की दिशा में अगला बड़ा कदम है।

मुख्य बातें

भारत की सामाजिक सुरक्षा प्रणाली के दायरे में अब लगभग 101 करोड़ लोग — देश की 68% से अधिक आबादी — शामिल हैं।
ILO ने पुष्टि की कि भारत में एक अरब से अधिक लोग कम से कम एक सामाजिक सुरक्षा योजना के अंतर्गत आ चुके हैं।
जीडीपी में 1% वृद्धि पर रोजगार में अब 1.11% की बढ़ोतरी हो रही है, जो 12 वर्ष पहले मात्र 0.008% थी।
EPFO दावा प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल बनाने और UPI-आधारित निकासी की संभावना पर विचार कर रहा है।
ESIC सुधारों के तहत बेहतर प्रदर्शन करने वाले निजी अस्पतालों को भी ESIC सुविधाओं के रूप में नामित किया जा सकता है।
मनसुख मंडाविया ने चौथे ग्लोबल इंडस्ट्रियल रिलेशंस समिट , नई दिल्ली में यह जानकारी दी।

केंद्र सरकार ने 31 जुलाई 2026 को घोषणा की कि भारत की सामाजिक सुरक्षा प्रणाली के अंतर्गत अब लगभग 101 करोड़ नागरिक — यानी देश की 68 प्रतिशत से अधिक आबादी — कम से कम एक सरकारी योजना के दायरे में आ चुके हैं। अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) ने भी इस उपलब्धि को मान्यता दी है।

मुख्य घोषणाएँ और नीतिगत दिशा

नई दिल्ली में ऑल इंडिया ऑर्गेनाइजेशन ऑफ एम्प्लॉयर्स (AIOE) और फिक्की (FICCI) द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित चौथे ग्लोबल इंडस्ट्रियल रिलेशंस समिट को संबोधित करते हुए केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री डॉ. मनसुख मंडाविया ने कहा कि एक संतुलित विकास मॉडल की आवश्यकता है — जो श्रमिकों के कल्याण और सामाजिक सुरक्षा को सुनिश्चित करे और साथ ही नियोक्ताओं के लिए व्यापार सुगमता भी बनाए रखे।

उन्होंने कहा कि औद्योगिक संबंधों में स्थिरता के लिए सरकार, उद्योग जगत, नियोक्ता संगठनों, श्रमिकों और ट्रेड यूनियनों के बीच निरंतर समन्वय अनिवार्य है, ताकि आर्थिक विकास और रोजगार सृजन एक साथ आगे बढ़ सकें।

रोजगार लोच में ऐतिहासिक सुधार

डॉ. मंडाविया ने रोजगार लोच के आँकड़े साझा करते हुए बताया कि अब जीडीपी में 1 प्रतिशत की वृद्धि पर रोजगार में 1.11 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज हो रही है। यह उल्लेखनीय बदलाव है, क्योंकि 12 वर्ष पहले यही आँकड़ा मात्र 0.008 प्रतिशत था। गौरतलब है कि यह सुधार रोजगार नीति की प्रभावशीलता का एक प्रमुख संकेतक माना जाता है।

मंत्री ने स्वयं सहायता समूहों (SHG) और सहकारी मॉडल — विशेषकर महिलाओं के नेतृत्व वाली पहलों — की भूमिका को भी रेखांकित किया। उनके अनुसार ये पहलें आजीविका के अवसर बढ़ाने, अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने और महिला सशक्तिकरण में महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं।

EPFO और ESIC में सुधार की रूपरेखा

केंद्रीय मंत्री ने कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) में डिजिटल सुधारों की जानकारी देते हुए बताया कि दावों की पूरी प्रक्रिया को डिजिटल किया जा रहा है और एकल UAN (यूनिवर्सल अकाउंट नंबर) के माध्यम से खातों के स्वत: हस्तांतरण की व्यवस्था लागू की जा रही है। इसके अतिरिक्त, UPI-आधारित निकासी की संभावना पर भी विचार किया जा रहा है।

कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ESIC) के संदर्भ में डॉ. मंडाविया ने कहा कि ESIC अब अकेले स्वास्थ्य सेवाएँ प्रदान करने वाला संस्थान नहीं रहेगा। बेहतर प्रदर्शन करने वाले निजी अस्पतालों को भी ESIC सुविधाओं के रूप में नामित किया जा सकता है — जो आगामी सुधारों का हिस्सा होगा।

ILO की पुष्टि और वैश्विक संदर्भ

दक्षिण एशिया के लिए ILO DWT और भारत कार्यालय की निदेशक मिचिको मियामोतो ने पुष्टि की कि ILO के अनुमान के अनुसार भारत में अब एक अरब से अधिक लोग कम से कम एक सामाजिक सुरक्षा योजना के दायरे में आ चुके हैं। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि आने वाले वर्षों में भारत की आर्थिक वृद्धि को नई गति देने में सहायक होगी।

यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर सामाजिक सुरक्षा के विस्तार को श्रम बाजार की स्थिरता और उपभोग-आधारित विकास से सीधे जोड़कर देखा जा रहा है। भारत के लिए यह आँकड़ा विशेष महत्व रखता है, क्योंकि देश की बड़ी आबादी अभी भी असंगठित क्षेत्र में कार्यरत है।

आगे की राह

EPFO के UPI-आधारित निकासी और स्वत: खाता हस्तांतरण जैसे सुधार लागू होने पर करोड़ों कर्मचारियों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है। ESIC में निजी अस्पतालों को शामिल करने की योजना स्वास्थ्य सेवाओं की पहुँच और गुणवत्ता दोनों को बेहतर कर सकती है। सरकार का अगला लक्ष्य असंगठित क्षेत्र के शेष श्रमिकों को भी सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि 'दायरे में आना' और 'वास्तविक लाभ मिलना' — ये दोनों एक नहीं हैं। असंगठित क्षेत्र के करोड़ों श्रमिक तकनीकी रूप से किसी योजना में पंजीकृत हो सकते हैं, परंतु दावा प्रक्रिया की जटिलता, जागरूकता की कमी और डिजिटल पहुँच के अभाव में वे लाभ से वंचित रह जाते हैं। EPFO में UPI-आधारित निकासी और स्वत: खाता हस्तांतरण जैसे सुधार सही दिशा में हैं, लेकिन इनकी सफलता ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में डिजिटल साक्षरता और इंटरनेट कनेक्टिविटी पर निर्भर करेगी। रोजगार लोच का 0.008% से 1.11% तक का सफर प्रभावशाली दिखता है, किंतु इसके पीछे की कार्यप्रणाली और डेटा स्रोत की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।
RashtraPress
31 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत में 101 करोड़ लोग सामाजिक सुरक्षा दायरे में कैसे आए?
केंद्र सरकार के अनुसार विभिन्न सरकारी योजनाओं — जैसे ESIC, EPFO, PM-JAY और अन्य सामाजिक सुरक्षा कार्यक्रमों — के विस्तार के कारण अब लगभग 101 करोड़ लोग यानी देश की 68% से अधिक आबादी कम से कम एक योजना के दायरे में है। ILO ने भी इस आँकड़े की पुष्टि की है।
EPFO में UPI-आधारित निकासी क्या है और कब लागू होगी?
EPFO की दावा प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल बनाने के साथ-साथ UPI के माध्यम से भविष्य निधि की निकासी की संभावना पर विचार किया जा रहा है। सरकार ने इसे आगामी सुधारों का हिस्सा बताया है, हालाँकि अभी तक कोई निश्चित तिथि घोषित नहीं की गई है।
ESIC में निजी अस्पतालों को शामिल करने का क्या मतलब है?
केंद्रीय मंत्री डॉ. मनसुख मंडाविया के अनुसार बेहतर प्रदर्शन करने वाले निजी अस्पतालों को ESIC-अधिकृत सुविधाओं के रूप में नामित किया जा सकता है। इससे ESIC लाभार्थियों को अधिक अस्पतालों में इलाज की सुविधा मिलेगी और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार की उम्मीद है।
रोजगार लोच में सुधार का क्या अर्थ है?
रोजगार लोच यह मापता है कि जीडीपी में 1% वृद्धि पर कितने प्रतिशत नए रोजगार सृजित होते हैं। सरकार के अनुसार यह आँकड़ा 12 वर्ष पहले के 0.008% से बढ़कर अब 1.11% हो गया है, जो दर्शाता है कि आर्थिक विकास अब रोजगार सृजन के साथ अधिक प्रभावी ढंग से जुड़ा है।
चौथे ग्लोबल इंडस्ट्रियल रिलेशंस समिट में क्या हुआ?
31 जुलाई 2026 को नई दिल्ली में AIOE और FICCI द्वारा आयोजित इस समिट में केंद्रीय श्रम मंत्री डॉ. मनसुख मंडाविया ने सामाजिक सुरक्षा विस्तार, EPFO-ESIC सुधार और रोजगार लोच में सुधार के आँकड़े साझा किए। ILO की दक्षिण एशिया निदेशक मिचिको मियामोतो ने भी भारत की उपलब्धि की पुष्टि की।
राष्ट्र प्रेस
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